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अटूट आस्था: 15 फीट का 90 किलो वजनी घोड़ा कंधे पर, बाबा के दर्शनार्थ पदयात्रा पर निकला जत्था

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– जत्थे में 8 साल के बच्चे भी पूरी करेंगे 180 किमी पैदल यात्रा

नारद जोधपुर। मारवाड़ के महाकुंभ यानि लोकदेवता बाबा रामदेव का मेला इन दिनों चरम पर पहुंचने लगा है, क्योंकि राजस्थान के साथ-साथ गुजरात, मध्यप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, बिहार सहित कई प्रदेशों से जातरू बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। रामदेवरा में बाबा के दर्शन की अटूट आस्था के साथ हजारों श्रद्धालु पैदल ही सैंकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर पहुंचते हैं। ऐसी ही अटूट आस्था लिए जोधपुर के युवाओं का एक जत्था लालसागर क्षेत्र से रवाना हुआ। जिसे देखकर हर कोई उस जत्थे की अपार श्रद्धा को प्रणाम करता नजर आया और ऐसा हो भी क्यों ना, क्योंकि जत्थे के युवा 15 फीट का 90 किलो वजनी घोड़ा अपने कंधों पर लेकर पैदल चल रहे हैं।

10 फीट लंबी ध्वजा कर रही अगुवाई

जत्थे की अगुवाई बाबा की 10 फीट की सफेद ध्वजा से हो रही है और इस बार इस युवा मंडली में 8 साल का लक्की भी है, जो अपने कंधों पर नन्हे अश्व के साथ पैदल चलते हुए भी थकने का नाम नहीं ले रहा है। बाबा रामदेव की समाधि जैसलमेर के पोकरण से 8 किलोमीटर दूर है और ऐसी मान्यता है कि रामदेवरा जाने वाला भक्त पहले जोधपुर के मसूरिया मंदिर बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथ के पहले दर्शन कर बाद में रामदेवरा के लिए जाते है तभी उनकी मनोकामना पूर्ण होती तेज गर्मी में  पैदल चलने वालों के  पैरों में छाले पड़ जाते है  बड़े बड़े अश्व लंबी लम्बी ध्वजा उठाये  बाबा की जयकारों के साथ आगे बढ़ते जाते है।

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