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ट्रस्ट के एजीएम देवव्रत महापात्रा पर सप्लायर्स से 53 लाख का कमीशन लेने का मामला हुआ दर्ज

#JPNT : करोड़ों के घोटाले की एफआईआर में दो पेज और जुड़े

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प्रवीण धींगरा

जोधपुर। जोधपुर पोल्यूशन कन्ट्रोल एण्ड रिसर्व फाउन्डेशन (पूर्व में जेपीएनटी) में करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच शुरू ही हुई है कि अब इससे जुड़ी पुलिस रिपोर्ट में दो पेज और जुड़ गए हैं। ट्रस्ट मैनेजिंग डायरेक्टर की ओर से पुलिस को दी गई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि एसिस्टेंट जनरल मैनेजर देवव्रत महापात्रा ट्रस्ट के सप्लायर्स से अवैध वसूली करते हैं। इन्होंने लाखों रुपए का कमीशन स्वयं व पत्नी के खातों में जमा करवाया है। इसके पुख्ता सबूत जुटाकर पुलिस को सौंप गए है। इधर, मामले में मैनेजिंग ट्रस्टी जी.के. गर्ग, डायरेक्टर अकाउंट्स मनोहर खत्री व एजीएम महापात्रा की मिलीभगत से लगागार घोटाले होने का खुलासा हुआ है।
दरअसल, पूर्व में पुलिस थाना विवेक विहार में दर्ज एफआईआर में जहां गर्ग व अन्य ट्रस्टियों के खिलाफ जिला कलेक्टर ने बतौर ट्रस्ट के चेयरमैन पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए कहा था, उसमें अब कई और खुलासे हो रहे हैं। घोटाले की राशि भी बढ़ गई है तो ट्रस्ट को चपत लगाने के कई नए सबूत सामने आ रहे हैं। नई रिपोर्ट में ट्रस्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर भंवरलाल चौपड़ा ने पुलिस को बताया है कि देवव्रत महापात्रा सहायक जनरल मैनेजर (प्लान्ट) वर्ष 15.04.2015 से कार्यरत है। दी राजस्थान स्टेनलेस स्टील रिरोलिंग एसोसीएशन द्वारा गठित इन्टरनल इन्वेस्टीगेशन कमेटी की एडीशनल रिपोर्ट में देवव्रत महापात्रा द्वारा अपने पद का दुरूपयोग करते हुए विभिन्न सप्लायरों से अवैध रूप से राशि लेने के सबूत पाये गये। इस रिपोर्ट को जेपीसीआरएफ की बोर्ड मिटिंग में रखने के बाद यह निर्णय लिया गया कि देवव्रत महापात्रा के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट अवैध राशि लेने बाबत् मैनेजिंग डायरेक्टर द्वारा दर्ज करवाई जाए।

खुद व पत्नी के खाते में जमा करवाया लाखों का कमीशन

दरअसल, देवव्रत महापात्रा प्लान्ट के सर्वोच्च पद एजीएम पर कार्यरत था। जो प्लान्ट के परिषोदन के काम आने वाले कच्चे माल की खरीद तथा उसकी रेट तय करता था तथा माल कि क्वालिटी भी टेस्ट करता था और जेपीसीआरएफ के पूर्व मैनेजिंग ट्रस्टी जी. के. गर्ग से मिला हुआ था। देव महापात्रा द्वारा अवैध राशि के रूप में अरूण इन्डस्ट्रीयल प्रोडेक्ट जो कि एएवसी सप्लाई करता है, उससे आठ लाख रुपए, केलीटेक्नो केम, जो कि पोली सप्लाई करता है उससे 90 हजार, हेरोकेम इंडस्ट्रीज जो कि एचसीएल सप्लाई करता है उससे 7.83 लाख, बल्क केरियर से ढाई लाख रूपए, मरूधर प्रोडेक्शन सर्विसेस से 2.47 लाख, साहारा सुप्रीम सिक्यूरिटि सर्विसेस से 1.43 लाख रुपए सहित कुल 23.34 लाख रुपए महापात्रा ने अपने बैंक आईसीआईसीआई के खाते एवं पत्नी श्रीमती नमिता महापात्रा के बैंक यूको खाता में 30.61 लाख प्राप्त किये। इस प्रकार देवव्रत व नमिता के खातों में विभिन्न स्थानों अहमदाबाद इत्यादि से कुल 53 लाख से ज्यादा कमीशन वसूलना साबित हुआ है।

साले के खाते में भी ट्रांजेक्शन, कुछ को राशि ट्रांसफर कर नकद में ली

देवव्रत ने अपने साले दिलीप कुमार पत्री के खाते में 2.62 लाख रुपए भी अवैध तरीके से प्राप्त किये। फिर दिलिप कुमार ने अपनी बहन श्रीमती नमिता महापात्रा के खाते में यह राशि ट्रांसफर कर दी। जांच के दौरान पूछताछ में पता चला कि देवव्रत महापात्रा ने कुछ सप्लायर्स से खाते में आई कमीशन की राशि वापस उनके खाते में ट्रांसफर करके वापस नगद रूप में प्राप्त की।

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