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लट-कीट रोग व कर्रा के कहर से परेशान किसानों के हाथ आया खरीफ का दाना हो रहा खोखला

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पुखराज माली धुंधाड़ा। 

नारद लूणी। पिछले एक माह से दिनोदिन बदल रहे मौसम की मार इन दिनों खरीफ की फसलों पर भारी पड़ रहा हैं। लगभग कटाई के कगार पर पहुंची खरीफ में आगत की फसलें जहां लट-कीट व अन्य रोग पनपने के साथ बदलते मौसम के कारण खराबे की भेंट चढ़ रही हैं। वहीं पास्त की फसलें एक मेह की आस में अभी तक आसानुसार बढ़वार नहीं करने से किसान वर्ग में भारी चिंता व्याप्त हैं। साथ राज्य सरकार की अनदेखी के कारण पूरे माह में चार दिन ही चला सर्वर जिस कारण हजारों किसान अपनी फसलों का बीमा कराने से वंचित रह गए।

उल्लेखनीय हैं कि इसबार बिपरजॉय तुफान के साथ ही हुई अच्छी बारिश के कारण किसान वर्ग के लिए खुशी की बात यह रही की मानसून पूर्व ही खरीफ फसलों के लिए मानसून पूर्व ही बुवाई के लायक आवश्यकता से भी अधिक बारिश होने से किसानों द्वारा असिंचित के साथ सिंचित खेतों में भी बड़ी मात्रा में खरीफ फसलों की बुवाई की गई। जो किसान आगत के समय बुवाई से वंचित रहे उन्होंने बाद में पास्त के समय की बारिश के समय में भी शेष खेतों में बुवाई कर दी।

80 से 90 फिसदी खेतों में की बुवाई, सभी में खराबा:

प्रगतिशील किसान भैराराम पटेल ने बताया कि पिछले कई सालों के मुकाबले इसबार बिपरजॉय तुफान के कारण क्षेत्र में हुई अच्छी बरसात से उत्साहित किसानों द्वारा खेतों में बड़ी मात्रा में बाजरा, मूंग, तील, ग्वार, ज्वार, मोठ, चवला व काचरा तथा मतीरा की बुवाई की गई। जो फसलें पहले बोई गई थी उनमें से अधिकांश फसलें अब कटाई के लायक पहुंच गई हैं। लेकिन फसलों की किसान वर्ग द्वारा कटाई शुरू की जाती उससे पहले ही इन फसलों में पिछले एक माह से चली आ रही विपरित हवाओं ने जहां काफी हद तक खराबा कर दिया वहीं इन फसलों के सीट्टों एवं फलियों में दाना बनने के साथ इन फसलों के सीट्टों एवं फलियों पर लट, कीट, कर्रा के साथ कई रोग कहर बनकर टूट पड़े जिससे अब किसानों के हाथ आने से पहले फसलों के दानें खोखले हो रहे हैं। हालांकि किसान वर्ग द्वारा कई प्रकार से फसलों को रोगों से बचाने के जतन किए जा रहे हैं, लेकिन कोई भी जरिया कारगर साबित नहीं हो रहा हैं। इसलिए किसान वर्ग को भारी नुकसान उठना पड़ रहा हैं।

पास्त की फसलों के लिए एक मेह के इंतजार में पथराई आंखें:

युवा प्रगतिशल किसान अजय चौधरी ने बताया कि बिपरजॉय तुफान के समय जो किसान खरीफ की बुवाई से वंचित रहे थे, उन्होंने बाद की बरसात के समय पास्त की बुवाई की थी। जो पिछले एक माह से बारिश के इंतजार में बढ़वार नहीं कर रही हैं। इसलिए किसान वर्ग इन फसलों की अच्छी बढ़वार के लिए एक अच्छे मेह का इंतजार पिछले एक माह से कर रहे हैं। लेकिन पूरा माह बिन बारिश के गुजरा हैं एवं हवाएं भी फसलों की बढ़वार के विपरित चल रही हैं, इसकारण किसान वर्ग को जहां आगत की फसलों में नुकसान हो रहा हैं वहीं पास्त की फसलों को भी भगवान भरोसे छोडऩा ही पड़ सकता हैं।

चार दिन चला सर्वर, हजारों किसान बीमा से वंचित, बीमित-अबीमित को राज्य सरकार दे मुआवजा: पटेल

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को केंद्र सरकार ने एक जुलाई से शुरू कर दिया था। लेकिन राजस्थान सरकार की किसान विरोधी नीति के कारण पोर्टल पर देश के सभी राज्य दिखाई दे रहे थे। लेकिन राजस्थान राज्य नहीं खुल रहा था। इस कारण राजस्थान राज्य के साथ ही राजस्थान के जिले, तहसीलें एवं ग्राम पंचायत के साथ राजस्व गांव भी पोर्टल पर नहीं खुलने के कारण किसान वर्ग द्वारा ऑन लाईन खसरा की प्रतिलिपि भी नहीं निकाली जा सकती थी और जिन्होंने पटवारी से नकल बनवा भी ली तो उन्हें पोर्टल पर अपलोड नहीं किया जा सका। बीमा कराने की अंतिम तारीख से महज चार दिन पहले ही पोर्टल पर राजस्थान के किसानों की फसलों का बीमा आरंभ हुआ। खेती के कार्य में व्यस्त होने के चलते पहले से ही कई दिनों तक ई-मित्र केंद्रों के चक्कर लगा चुके किसान असमंझ में रहे कि बीमा होगा या नही। इसी के चलते प्रदेश भर से लाखों किसान एवं बंटाईदार कास्तकार फसलों का बीमा कराने से वंचित रहे हैं। अब राज्य सरकार जल्द ही गिरदावरी करवाकर बीमा धारक किसानों के साथ अबिमित किसानों की भी खराब हो रही फसलों का उचित मुहावजा देकर राहत एवं संबल प्रदान करें, इस सबंध में मुख्यमंत्री को भी किसान हित में पत्र लिखकर मांग की गई हैं।

– जोगाराम पटेल, पूर्व विधायक व पूर्व संसदीय सचिव।

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