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आज मणिपुर को गांधी और गांधीवादी लोगों की जरूरत है: कुमार प्रशांत

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– जेएनवीयू गांधी अध्ययन केंद्र की तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस शुरू

नारद जोधपुर। गांधी कोई व्यक्ति नहीं, एक मज़हब है। ऐसा मज़हब, जिससे हम अपने जीवन की अच्छी मंजिल और अच्छे रास्ते खोज सकते हैं। आज मणिपुर को गांधी और गांधीवादी लोगों की जरुरत है। नई दिल्ली गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने ये बात जोधपुर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कही। जेएनवीयू गांधी अध्ययन केंद्र के निदेशक व कॉन्फ्रेंस के आयोजन सचिव डॉ. हेमसिंह गहलोत ने बताया कि “समकालीन विश्व में शान्ति एवं अहिंसा के गांधीवादी मार्ग” विषय पर आयोजित की जा रही यह तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का मंगलवार को डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज सभागार में शुभारंभ हुआ।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कुमार प्रशांत ने कहा कि गांधीजी की किसी किताब में कोई उपदेश नहीं है, लेकिन यदि आप गांधी जी के जीवन को पढ़ लें, तो आपके जीवन का रास्ता गांधी के जीवन में मिल जायेगा। गांधी को अपनाते हुए हमें ’सब’ का भाव अपनाना होगा। इस सामूहिकता के भाव अर्थात जाति धर्म से इतर हमें एक इंसान की भावना से हिंदुस्तानी बनना होगा और वही भावना जिसने पूरे हिंदुस्तान को जोड़ रखा है उस भावना का नाम गांधी है।

जेएनवीयू गांधी अध्ययन केंद्र की तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस शुरू

मजबूरी का नाम नहीं, मजबूती का नाम है महात्मा गांधी: प्रो. अग्रवाल

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यूपीएससी के पूर्व सदस्य एवं जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि  आजकल सोशल मीडिया और अन्य प्रचार तंत्रों के कुप्रचार से भारत में गांधी के विचारों को नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। एक ओर जहां आज अफ्रीकन एशियाई और लैटिन अमेरिकी देश सहित पूरा विश्व गांधी के विचारों की तरफ अग्रसर है, वहीं दूसरी तरफ गांधी के खिलाफ कुप्रचार से भारत मे तर्क और विवेक का खात्मा किया जा रहा है। ऐसे में गांधी के विचारों को मानने वाले लोगों को अपने पूरे प्रयास से गाँधीजी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना होगा। तभी करुणा और संयम के जरिये भारत मे विवेक और प्रशिक्षित तर्क की स्थापना होगी। प्रो. अग्रवाल ने कहा कि मजबूरी का नाम महात्मा गांधी नही बल्कि मजबूती का नाम महात्मा गांधी है, क्योंकि गांधी के विचारो से ही हम न केवल आत्मिक शांति बल्कि विश्व शांति की स्थापना की जा सकती है साथ ही कहा कि अहिंसा का मतलब करुणा विवेक न्याय तथा संयम के साथ जीना है।

जिला स्तरीय गांधी कार्यालयों की स्थापना करने वाला पहला राज्य: शर्मा

शांति और अहिंसा निदेशालय, जयपुर के निदेशक मनीष शर्मा ने मणिपुर और यूक्रेन की चर्चा करते हुए गांधीवादी मूल्यों को वर्तमान में लागू करने पर बात रखी। उन्होंने बताया कि राजस्थान जिला स्तरीय गांधी कार्यालयों की स्थापना करने वाला पहला राज्य है। सिर्फ यही नहीं गांधीजी पर विभिन्न कार्यक्रमों और आयोजनों के माध्यम से अशोक गहलोत सरकार ने गांधीजी के विचारों को जन जन तक पहुंचाने का कार्य किया है।

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