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ट्विटर पर ट्रेंड कर गई पुलिस मांग, राजस्थान में पुलिस को मिले टाइम स्केल प्रमोशन

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जोधपुर। राज्य में कुछ विभाग अपनी मांगो को लेकर धरना प्रदर्शन करते है मगर चुनाव पूर्व पुलिस ने रविवार को सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर अपनी मांग सरकार के समक्ष उठाई। इससे सरकार विभाग सकते में आ सकते है क्योंकि चुनाव में 80 हजार पुलिस कर्मियो का परिवार भी अहम भूमिका रखता है। इस बीच पुलिस कर्मी भी आस लगाए बैठे है कि गहलोत सरकार उनकी भी कुछ प्रमुख मांग में से एक टाइम स्केल प्रमोशन की मांग को स्वीकार करेंगे, मामला अधीनस्थ पुलिस सेवा से जुड़े पुलिस कर्मियों के प्रमोशन से जुड़ा हुआ है।

राज्य में पुलिस की मांगो की प्रखर आवाज उठाने वाले नागरिक सुरक्षा समन्वय समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश कुमावत ने बताया की तीन चार बार मुख्यमंत्री से मिलकर पुलिस मांगो को अवगत करवाया गया था मगर अभी सिर्फ वर्दी भत्ता रोकड़ बस पास व साप्ताहिक अवकाश (जो अभी भी पूर्ण लागू नहीं है) की माँग पूरी हुई है। राजस्थान पुलिस मे अधीनस्थ पुलिस सेवा से जुड़े कांस्टेबल से लेकर निरीक्षक स्तर के कर्मचारियों के प्रमोशन राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियमों के तहत प्रमोशन परीक्षा से हो रहें हैं। प्रमोशन एग्जाम में लिखित, फिजिकल, इंटरव्यू तीन स्तर पर अभ्यर्थी का परीक्षण किया जाता है। अखिल भारतीय स्तर पर अर्थात सभी राज्यों जैसे पंजाब दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, यूपी, उत्तराखंड, कर्नाटक आदि अधीनस्थ पुलिस सेवा से जुड़े पुलिस कर्मियों के प्रमोशन पदोन्नति परीक्षा की बजाए डीपीसी से हो रहें हैं। राजस्थान में भी पुलिस में आरपीएस से आईपीएस स्तर के अधिकारियों के प्रोमोशन डीपीसी ऑर्डर के जरिए हो रहें हैं। राजस्थान में ही अन्य बेल्ट सर्विसेज वनपाल, वनरक्षक, मोटर व्हीकल एस आई के प्रोमोशन डीपीसी से हो रहें हैं। इसके अलावा अन्य सभी सेवाओं में भी पद्दोनत्ति डीपीसी से हो रही है। आर्मी, पैरामिलिट्री फोर्स में भी प्रोमोशन प्रत्येक रैंक पर डीपीसी ऑर्डर से ही हो रहे हैं।
प्रोमोशन मे इस विसंगति को दूर करने की मांग यानी डीपीसी से प्रमोशन करवाने की मांग समय समय पर जनप्रतिनिधियों द्वारा विधान सभा में भी उठाई गई है। विभाग द्वारा कारवाई जा रही प्रमोशन परीक्षा प्रणाली को सुगम बनाए जाने की बजाय गत वर्ष इसे और पेचीदा बना दिया गया है इस कारण अधीनस्थ पुलिस कर्मियों के प्रमोशन समय पर नहीं हो पाते और वे बिना प्रमोशन ही रिटायर हो जाते हैं। आज तक पुलिस विभाग कभी भी समय पर पदोन्नति परीक्षाओं का आयोजन नहीं करवा पाया है। इस तरह यह एग्जाम के जरिए प्रमोशन करवाए जाने प्रक्रिया कहा तक उचित है। गत वर्ष कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल पदोन्नति में 50 पसेंटेज पदोन्नति डीपीसी और 50 पसेंटेज पदोन्नति परीक्षा के जरिए करवाए जाने का आर्डर राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियमों में संशोधन के उपरांत जारी किया गया जिसके विरुद्ध माननीय जयपुर उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश जारी करते हुए वर्तमान में कॉन्स्टेबल से निरीक्षक स्तर की पदोन्नति परीक्षाओं पर रोक लगा दी है। इस तरह राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियमों में संशोधन करते हुए राज्य सरकार प्रमोशन पदोन्नति परीक्षा के बजाय डीपीसी के जरिए करवा कर लाखों अधिनस्थ पुलिसकर्मियों को उपकृत करते हुए उनका मनोबल बढ़ा सकती है। कई विधायक ने इस मुद्दे को लेटर पैड पर लिख कर सीएम साहब को दिया है व विधानसभा में कई विधायको ने इस मांग को मुख्य रूप से उठाया भी है। निचले स्तर पर यह बदलाव कर देने से जैसा कि पिछले चुनाव से ठीक पहले शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा किया गया था। कुमावत ने बताया की अगर राजस्थान में भी कांस्टेबल से निरीक्षक पुलिस तक टाइम स्केल प्रमोशन की सुविधा लागू होती है तो सरकार और पुलिस दोनों को जबरदस्त फायदा होगा।

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