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OPS को चुनावी रेवड़ी बताने पर CM गहलोत मोटेंक सिंह पर बरसे, जानें वजह

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राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोटेंक सिंह अहलूवालिया को निशाने पर लिया है।  अहलूवालिया द्वारा ओपीएस पर सवाल उठाने पर सीएम गहलोत ने कहा– देखिए सारे अर्थशास्त्री जो है उनके पास बुद्धिमता की प्रोपट्री है, काम लेते है ये लोग। सब लेते हैं। हम तो ये मानते हैं हमारा मैनेजमेंट, वित्त प्रबंधन हमारे विभाग ने किया है, हम लोगों ने बैठकर। हमारा मानना है कि कोई काम ऐसा नहीं जो कि हो नहीं सकता हो। एक सवाल मेरे दिमाग में आता हो जो मैं आप लोगों से शेयर करना चाहता हूं। अगर 60 साल तक देश ओपीएस लागू करके और पेंशन देकर भी विकास कर सकता है। तो क्या एक इंसान को जो नौकरी कर रहा है, कर्मचारी, क्या उसको बुढ़ापे में अपनी सामाजिक सुरक्षा करने का अधिकार नहीं है क्या । तो वह समझ से परे है। तो आप बताइए सीएनजी ने क्यों आपत्ति की, नियम कायदे बनाए नहीं, 15 साल हो गए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग क्यों बोल रहा है। इनके साथ अन्याय हो रहा है। न्यायिक आय़ोग बोल रहा है कि हम लागू नहीं करेंगे। जो आलोचना कर रहे हैं, उनको इसका जवाब भी देना चाहिए। कर्मचारी 35 साल सेवा देता है। सामाजिक व्यवस्थाएं ऐसी है, कई घरों में तकलीफ भी आती है। बुढ़ापे के अनंदर पति-पत्नी सोचे कि अब हम कहा जाएंगे। हमें तो पेंशन भी नहीं मिल रही है। इसलिए जो पेंशन नहीं मिल है वो भी मांग कर है। हमने मानवीय दृष्टिकोण और पब्लिक इंटरेस्ट से ओपीएस लागू किया है। 

सीएम अगर कर्मचारी करप्शन करेंगे तो अच्छा लगेगा आपको, अगर कर्मचारी को पेंशन भी नहीं देंगे तो 35 साल से सोचेगा मैं पैसे कैसे कमाऊ। जिससे बुढ़ापा ठीक ढंग से निकले। मानवीय दृष्टिकोण भी है कि वह बुढ़ापे में तकलीफ नहीं पाए। कर्मचारी टेंशन में काम करेगा तो गुड गवर्नेंस में पूरी तरह से भागीदारी नहीं निभा पाएगा। फिर मोदी सरकार ने भेदभाव किया है। आर्मी को ओपीएस, बीएसएफ को ओपीएस नहीं। पैरा मिलट्री फोर्सेज को ओपीएस नहीं है। एनपीए है। ये भेदभाव क्यों। ये जवाब दे इसका। 

सीएम गहलोत ने कहा कि मुझे विपक्ष से शिकायत है। एसीबी रेड डालती है तो कहते है भ्रष्ट्रचार हो रहा है। इसका मतलब एसीबी छापा नहीं डाले। तो भ्रष्ट्रचार दिखाई नहीं देगा। यह अच्छा है क्या। हमनें थानों में एफआईआर दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया। केस तो बढ़ेंगे। पहले केस दर्ज नहीं होता था, केस नहीं बढ़ते। कितने राज्यों में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य किया है। एसीबी के आदेश पर सीएम गहलोत ने कहा कि इसमे कोई किरकिरी नहीं हुई है। मीडिया वालों को कुछ मसाला चाहिए। न्यूज जो बेचनी है। सीएम ने कहा कि मैंने उदयपुर में कहा था कि अगर कुछ गलत हुआ तो हम आदेश वापस ले लेंगे। हमने कोर्ट के एक आदेश पर चर्चा करके ही आदेश निकाला था। इसे हमने वापस ले लिया। सीएम ने कहा कि एसीबी शानदार काम कर रही है। चार साल में भ्रष्टाचार के मामले उजागर किए। विपक्ष को तारीफ करनी चाहिए। एसीबी छापे नहीं मारती तो मामले उजागर नहीं होते। एसीबी छापे नहीं मारती तो कैसे पता चलता कि भ्रष्टाचार हो रहा है।

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