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खेतों ने ओढ़ी धानी चुनरिया: लहलहाती फसलों को देख खिले किसानों के चेहरे, बंपर पैदावार की उम्मीद

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नारद तिंवरी (जोधपुर). मारवाड़ के रेगिस्तानी क्षेत्र में इन दिनों धरा ने धानी चुनरिया ओढ़ ली है, हर तरफ हरियाली फैली हुई नजर आ रही है। खेतों से लेकर सड़कों े किनारों से लेकर दूर तक खेतों में सिर्फ हरी चादर बिछी नजर आ रही है। अकाल की मार झेलने को अभिशप्त मारवाड़ में इस बार लगातार अंतराल से हो रही अच्छी बारिश से खेतों में किसानों की मेहनत लहलहा रही है। किसानों के चेहरों पर रौनक नजर आ रही है।बंपर उपज की उम्मीद में किसान परिवार सहित खेतों में जुटे है।

किसानों ने प्रमुख खरीफ फसलों में मोटे अनाज बाजरे की अधिक मात्रा में बुआई की है। साथ ही मूंग,मोठ,तिल, ग्वार,ज्वार ओर सिंचित खेतों में मूंगफली,कपास सहित अन्य फसलों की भी बुआई की है। फसल बुवाई के लगभग पन्द्रह से बीस दिनों में किसानों ने अपने खेतों में खरपतवार नहीं उगे इसके लिए निदाण निकाल लिया है। एक किसान पुनराम जाट ने बताया की समय पर लगातार बारिश होने के चलते अभी तक सभी फसलों में जोरदार बढ़वार हो रही है। अच्छी पैदावार की संभावना है।फिलहाल किसी भी प्रकार की बीमारी फसलों में नहीं है।

कृषि विभाग के उपनिदेशक महेंद्रसिंह ने बताया की जिले में सभी फसलें अच्छी स्थिति में है। ना किसी भी प्रकार की खरपतवार है और ना ही कोई रोग। किसान बंधुओं के लिए सलाह है कि लगातार पानी बरस रहा हो तो अपने खेतों पर जाए और देखें कही जल भराव की स्थिति तो नहीं है। अगर खेतों में पानी भरा रहा है तो पानी निकासी के प्रबंध करें ताकि फसलें खराब ना हो।

मूंगफली के लिए अनुकूल परिस्थितियां

जिले में तिलहनी सिंचित फसल के रूप में मूंगफली की 1 लाख 62 हजार हेक्टेयर में बुवाई हुई है, बुवाई से पूर्व अच्छी बरसात होने से मूंगफली की समय पर एक साथ बुवाई हो गई। उसके पश्चात भी अब तक परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई है। किसानों का कहना है कि इसी तरह का अनुकूल मौसम रहा तो प्रति बीघा 5 क्विंटल तक पैदावार हो सकती है। इससे 5 लाख 6 हजार मिट्रिक टन मुंगफली पैदावार की उम्मीद है।

कपास में फाल आना शुरू

सफेद सोना के रूप में विख्यात कपास फसल की मई माह में बुवाई हो गई थी। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 82 हजार हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई है बुवाई से लेकर अब तक लगातार आवश्यकता अनुसार बारिश होने से कपास की अच्छी बढ़वार हुई है। फसल में फाल आना शुरू हो गया है। किसानों के अनुसार इस फसल की जितनी अधिक बढ़वार होती है उतने ही डोडे अधिक आते है और पैदावार में बढ़ोतरी होती है। अनुमान के अनुसार कपास की 2 लाख 56 हजार मिट्रिक टन पैदावार की उम्मीद है।

स्वाद बढ़ाएगा मूंग

जिले में 2 लाख 78 हजार हेक्टेयर में प्रमुख दलहनी फसल मूंग की बुवाई हुई है। अब तक फसल बढ़वार अच्छी रही है। मौसम भी अनुकूल है। इस बार उच्च गुमवत्ता का मूंग स्वाद को बढ़ाने वाला होगा।ऐसे में 2 लाख 60 हजार मिट्रिक टन पैदावार का अनुमान है।

बाजरा की सर्वाधिक बुवाई

जिले की प्रमुख खाद्यान्न फसल बाजरा की सर्वाधिक बुवाई हुई है। इसका बुवाई रकबा 4 लाख 61 हजार हैक्टेयर है। अगेती बुवाई वाली फसल में सिट्टे भी आने शुरू हो गए है इस फसल की भी जोरदार पैदावर होने की पक्की संभावना है। ओसत पैदावार के अनुसार 5 लाख 76 हजार मिट्रिक टन से ज्यादा बाजरा उत्पादन का अनुमान है।

इस बार बरसात ने इससे राहत दी

जून महीने में बांधो व जलाशयों का पानी पूरी तरह सुख जाने व मानसून में देरी के कारण कई बार पेयजल व पशुओं के चारे की किल्लत पैदा हो जाती है। इस बार जून माह में रिकॉर्ड बरसात से जलाशयों में भी पानी आया तथा पर्याप्त घास उगने से चारे की समस्या का भी समाधान हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र में घरों में बने टांको में ग्रामीण बरसात का जल एकत्र कर पेयजल में काम लेते है। कई बार मानसून में देरी के कारण टैंकर डलवाने पड़ते है। इस बार समय पर बरसात होने से राहत मिली है। गहरे भूजल वाले क्षेत्र में अच्छी बरसात से इस बार ट्यूबवेल में पाइप की गहराई बढ़ाने से भी राहत मिलेगी।

जोधपुर जिले में बुवाई व अनुमानित पैदावार –

(बुवाई लाख हैक्टेयर व अनुमानित पैदावार लाख मिट्रिक टन)

फसलों को लेकर विशेषज्ञों की सलाह

कृषि अनुसंधान केंद्र के पूर्व निदेशक आरपी जांगिड़ ने सलाह दी है कि किसान मौसम की बदलती परिस्थितियों के अनुसार फसलों में समुचित पोषण व रोग किट प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे। इस मौसम परिस्थितियों के अनुसार जहां हल्की बरसात होकर रह गई वहा कपास की फसल में सोल्यूबल NPK या पोटेशियम क्लोराइड का छिड़काव करना चाहिए। वही जहा ज्यादा बरसात हुई है वहा मुंगफली में पीलिया का प्रभाव देखने को मिल सकता है वहा चिलेटेड फेरेस सल्फेट का 0.5 प्रतिशत का छिड़काव करना चाहिए।

इस बार अच्छी पैदावार होगी

भारतीय किसान संघ के प्रदेश मंत्री तुलछाराम सिंवर का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ तथा बिपरजोय चक्रवात से मानसून पूर्व की अच्छी बरसात से खरीफ फसलों की अगैती व समय पर बुवाई हो गई थी। फसलों की बढ़वार ठीक है। सिंचित क्षेत्र में भी कपास, मुंगफली, अरंडी की फसलें अच्छी है। जिस प्रकार मानसून ने साथ दिया उम्मीद है राज भी विद्युत आपूर्ति में साथ देगा और सभी फसलों की अच्छी पैदावार होगी। अच्छी बरसात होने से जमीन की गर्मी निकलने से समय पर गाजर की बुवाई भी होने की उम्मीद है।

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