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जोधपुर में किसानों का महापड़ाव: कभी बिजली कटौती तो कभी लो-वोल्टेज जला रही मोटरें, बारिश के अभाव में खड़ी फसलों पर आफत

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– बारिश नहीं होने और बिजली की अपर्याप्त आपूर्ति से किसानों पर दोहरी मार, प्रबंधन की अनदेखी ने बढ़ाया आक्रोश

नारद तिंवरी/जोधपुर। जिले के किसान एक बार फिर संकट में है क्योंकि एक तरफ तो बारिश नहीं हो रही है और दूसरी तरफ डिस्कॉम की लापरवाही उन पर भारी पड़ रही है। खुद पर आए संकट से तंग आकर इन्होंने शुक्रवार देर शाम से आंदोलन का रुख अख्तियार किया और जोधपुर न्यू पॉवर हाउस रोड पर स्थित डिस्कॉम कार्यालय के बाहर महापड़ाव शुरू कर दिया। जानकारों के अनुसार बारिश के अभाव में किसान अपने खेतों में खड़ी फसलों को बचाने के लिए ट्यूबवेल नहीं चला पा रहे हैं, क्योंकि ज्यादातर इलाकों में घोषित से कई गुना ज्यादा अघोषित कटौती तो चल ही रही है, साथ ही साथ कभी कभार बिजली आती भी है, तो इतने कम वोल्टेज होते हैं, कि इस पर सप्लाई ऑन करते ही मोटरें जल जाती है। यदि, ट्यूबवेल ऑन नहीं करे, तो खड़ी फसलें सूखकर पूरी तरह नष्ट होने का डर। यानि, किसानों के लिए हर तरफ आफत ही आफत है।

प्रशासन को पूर्व में भी कर चुके आगाह, अनदेखी ने बढ़ाया आक्रोश

किसानों से जुड़े विभिन्न समस्याओं को लेकर भारतीय किसान संघ ने पूर्व में भी कई बार प्रशासन और डिस्कॉम प्रबंधन को ज्ञापन देकर समस्याओं का समाधान करने की गुहार की थी, लेकिन प्रशासन की ओर से लगातार किसानों की अनदेखी होती रही। इसी वजह से किसानों ने आंदोलन का रुख अपनाया और शुक्रवार देर शाम डिस्कॉम कार्यालय के बाहर एकत्र होने लगे। इनमें नवगठित फलोदी जिले के किसानों के साथ-साथ बापिणी, देचू, तिंवरी, मतोड़ा सहित तमाम अन्य क्षेत्र से किसान यहां पहुंच गए।

बिजली आपूर्ति के कुछ तो मापदंड तय करे प्रबंधन: सिंवर

भारतीय किसान संघ के प्रदेश मंत्री तुलछाराम सिंवर ने बताया कि जिले में किसानों को 24 घंटे में महज कुछ घंटे ही बिजली मिल रही है, लेकिन वो भी पूरे वोल्टेज से नहीं मिलती। बिजली कब आएगी, इसका भी कोई समय निर्धारित नहीं है। जब मर्जी होती है, बिजली सप्लाई बंद कर दी जाती है। जबकि, खेतों में सिंचाई नहीं होने से खड़ी फसलें, जिनमें कपास और मूंगफली जलने लग चुकी है। यही हालात रहे, तो किसान भारी संकट में आ जाएगा।

देर रात तक चलता रसोड़ा  

आक्रोशित किसान लंबे संघर्ष की तैयारियों के साथ ही जोधपुर पहुंचे। यहां रात को धरना स्थल पर ही खाना बनाने का काम शुरू हुआ, जो किसानों ने आपसी सहयोग से मिलजुलकर तैयार किया और देर रात तक यह रसोड़ा चलता रहा। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती है, तब तक वे यहीं धरने पर बैठे रहेंगे।

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