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लूणी विधानसभा: आजादी के बाद पहली बार विश्नोई समाज का तिलिस्म भेदकर विधायक बने, सदन के सितारे भी रहे जोगाराम पटेल

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आजादी से आज तक लूणी विधानसभा चुनाव एक नजर में।

– जोगाराम पटेल की पूर्व मंत्री रामसिंह विश्नोई परिवार की तीन पीढिय़ों से पांच बार लौहा लेते हुए दो बार जीत व दो बार हुई हार।

– सूत्रों की माने तो पांचवीं बार भी विश्नोई परिवार व पटेल के बीच मुकाबले की संभावना लगभग तय, महज घोषणा बाकी।

पुखराज माली धुंधाड़ा।

नारद लूणी।

आजादी से आज तक कई मायनों में चर्चा में रही लूणी विधानसभा क्षेत्र के चुनावी दंगल पर साल 1993 से ही राजनीतिक समीक्षकों की पैनी नजर रही। यहां पर साल 1957 से लेकर साल 2018 तक मात्र दो चेहरे गेर विश्नोई बतौर विधायक जीत दर्ज कर सके। जिसमें पहलीबार साल 1962 में निर्दलीय स्वरूपसिंह व साल 2005 में हुए उपचुनाव व साल 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के जोगाराम पटेल ने विश्नोई साम्राज्य का तिलिस्म तोड़ा। 

आजादी के बाद साल 1957 से लेकर 2018 तक में पंद्रह बार हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से दो बार पूनमचंद विश्नोई, सात बार रामसिंह विश्नोई, एक बार भाजपा से जसवंतसिंह विश्नोई, एक बार मलखानसिंह विश्नोई व एक बार महेंद्रसिंह विश्नोई सहित बारह बार विश्नोई समाज के प्रत्याशी ने भाजपा अथवा कांग्रेस से जीत दर्ज की। जिसमें से अकेले रामसिंह विश्नोई के परिवार ने नौ बार जीत दर्ज की। वहीं गेर विश्नोई में पहलीबार 1962 में निर्दलीय स्वरूपसिंह व साल 2005 में हुए उपचुनाव व साल 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के जोगाराम पटेल ने विश्नोई साम्राज्य का तिलिस्म तोड़कर जीत दर्ज करने के साथ ही वे रामसिंह विश्नोई के बाद राज्यमंत्री का दर्जा पाने के साथ ही संसदीय सचिव बने तथा विधानसभा में कई जवलंत एवं जनहित के मुद्दों को सदन में उठाकर सदन के सितारें भी बने।

* परिसीमन के बाद घटे विश्नोई मतदाता: 

वैसे तो आजादी के बाद से ही चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर कई बार परिसीमन किया। लेकिन साल 2000 के बाद हुए परिसीमन के बाद लूणी विधानसभा क्षेत्र के कई विश्नोई बाहुल गांवों के अलग होने के कारण सर्वाधिक विश्नोई मतदाताओं वाली लूणी विधानसभा क्षेत्र से हजारों की संख्या में विश्नोई मतदाता कम हो गए। 

* तीसरे मोर्चे के कारण बने-बिगड़े समीकरण में उलझी भाजपा-कांग्रेस:

लूणी विधानसभा क्षेत्र में अब तक हुए विधानसभा चुनावों पर एक नजर डाले तो ऐसा कोई चुनाव नहीं गया जिसमें अधिक मतदाताओं वाले राजपुत समाज से या जाट समाज से निर्दलीय अथवा किसी पार्टी के टीकट पर चुनाव नहीं लड़ा हो। इसी के कारण दोनों ही पार्टियों के समीकरण अंतिम समय तक बनते बिगड़ते रहे। 

* चौपालों पर चर्चाओं का बाजार गर्म: 

हालांकि साल 2023 के लिए होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता लग चुकी हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना हैं इसबार भी कांग्रेस जहां फिर से रामसिंह विश्नोई परिवार पर दांव आजमा सकती हैं तो, वहीं भाजपा के पास में सर्वाधिक मतदाताओं वाले पटेल समाज के धड़े से आने वाले मंझे हुए भाजपा के दिग्गज नेता जोगाराम पटेल के अलावा कोई विकल्प ही नहीं हैं।

* बड़े-धड़े एक ना हो, इसलिए तीसरे मोर्चे को मौहरा बनाते रहे  

लूणी विधानसभा क्षेत्र से तीन दसकों से पत्रकारिता करने वाले वरिष्ट पत्रकार पुखराज माली धुंधाड़ा का यह कहना कि अतिशयेक्ति नहीं होगी कि निसंदेह रामसिंह विश्नोई ने लूणी में एक छत्रप के रूप में राजनीति करते हुए दबंग नेता की छवीं बनाई थी। जो उनके निधन तक भी बरकरार रही। लेकिन एक तो परिसीमन के कारण विश्नोई समाज के मतों का विभाजन होना भी विश्नोई प्रत्याशी के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा हैं। वहीं बड़े स्तर पर राजनीतिक की समझ रखने वाले यह समझते हैं कि कहीं अधिक मतों वाले समाजों के बड़े-धड़े एक ना हो जाए, इसलिए आजादी के बाद से आज तक लूणी में त्रि-कोणीय या चतुर्थ कोणीय मुकाबलें होते रहे हैं। इस कारण समीकरण अंतिम समय तक बनते-बिगड़ते रहे हैं। इसी का परिणाम यह रहा कि कभी कोई प्रत्याशी नगण्य मतों से हारा तो कोई प्रत्याशी हजारों के अंतर से जीत दर्ज कर विधानसभा में पहुंचा।

* एक नजर आजादी से आज तक के चुनाव परिणाम पर:

1957 में आईएनसी उम्मीदवार पूनमंचद विश्नोई (वोट 9649) ने आरआरपी के आयुवानसिंह को को (वोट 5589)  

1962 में आईएनडी उम्मीदवार स्वरूपसिंह (वोट 21564) ने आईएनसी ने पूनमचंद विश्नोई को (वोट 14189) हराया। 

1967 में आईएनसी के पीसी बिश्नोई (वोट 23894) ने एसडब्ल्यूए के एस सिंह को (वोट 12646) को हराया। 

1972 में आईएनसी के रामसिंह बिश्नोई (वोट 27278) ने आईएनडी के जोराराम को (वोट 16899) को हराया। 

1977 में आईएनसी के रामसिंह बिश्नोई (वोट 25702) ने जेएनपी के रामनारायण विश्नोई (वोट 19036) को हराया। 

1980 में आईएनसी (आई) के रामसिंह बिश्नोई (वोट 25474) ने जेएनपी (एससी) के रामनारायण विश्नोई को (वोट 17788) हराया। 

1985 में आईएनसी के रामसिंह बिश्नोई (वोट 41253) ने बीजेपी के अंबालाल (वोट 6627) को हराया। 

1990 में आईएनसी के रामसिंह बिश्नोई (वोट 39549) ने जेडी को बुधाराम (वोट 27455) को हराया। 

1993 में बीजेपी के जसवंतसिंह विश्नोई (वोट 37772) ने आईएनसी के रामसिंह विश्नोई को (वोट 33921) हराया। 

1998 में आईएनसी के रामसिंह विश्नोई (वोट 36063) ने बीजेपी के जसवंतसिंह विश्नोई (वोट 33754) को हराया।

2003 में आईएनसी के रामसिंह विश्नोई (वोट 37574) ने आरएसएनएम के जोगाराम पटेल (वोट 36218) को हराया। 

2005 उपचुनाव में बीजेपी के जोगाराम पटेल (वोट 52363) ने आईएनसी के मलखानसिंह को (वोट 48004) हराया। 

2008 में आईएनसी के मलखानसिंह (वोट 63316) ने बीजेपी के जोगाराम पटेल (वोट 47817) को हराया। 

2013 में बीजेपी के जोगाराम पटेल (वोट 96386) ने आईएनसी प्रत्याशी अमरीदेवी बिश्नोई (वोट 60446) को हराया। 

2018 में आईएनसी के महेंद्र विश्नोई ने (वोट 84979) ने बीजेपी के जोगाराम पटेल (वोट 75822) को हराया।

#Luni Assembly: For the first time after independence, Jogaram Patel broke the magic of Vishnoi community and became MLA and was also the star of the house.

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