नवरात्रा प्रारंभ , घर-घर हुई घट स्थापना

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता……..

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः…..

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके…….

शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते……!!!

मंदिरों में लगे माता के जैकारे, सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित नहीं हुई मां दुर्गा की प्रतिमाएं, मेहरानगढ़ स्थित मां चामुंडा के मंदिर के पट भी रहे बंद


जोधपुर। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधनाए भक्तिए उपासना व आत्मशुद्धि साधना का पर्व शारदीय नवरात्रा गुरुवार को घरों व मंदिरों में घट स्थापना के साथ आरंभ हुआ। शारदीय नवरात्रा पर अभिजीत काल में घर.घर घट स्थापना की गई। कोरोना गाडइलाइन के कारण सार्वजनिक स्थलों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित करने पर रोक रही जिस कारण घरों में ही मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की गई। वहीं मेहरानगढ़ दुर्ग स्थित मां चामुंडा मंदिर के पट भी बंद रहे जिस कारण श्रद्धालु देवी मां के दर्शन नहीं कर पाए। हालांकि मंदिर में पुजारियों ने घट स्थापना के साथ देवी मां की पूजा अर्चना की। वहीं शहर में अन्य सभी देवी मंदिरों में भीड़ रही। इन मंदिरों को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। यहां पूरे नवरात्रा कोरोना गाइडलाइन के तहत विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रहेगी।
घरों से लेकर मंदिरों में घट स्थापना के साथ आज शारदीय नवरात्रा शुरू हो गए। पहले दिन मां भगवती के स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की गई। कोरोना के चलते मेहरानगढ़ स्थित चामुंडा मां के मंदिर में आमभक्तों की एंट्री बंद रखी गई है। यहां आज पूरा मंदिर परिसर सूना सूना नजर आया। केवल पुजारी व मंदिर से जुड़े लोगों ने ही घट स्थापना कर पूजा अर्चना की। सुबह कई श्रद्धालु मेहरानगढ़ स्थित मां चामुंडा मंदिर के दर्शनों के लिए वहां पहुंचे लेकिन रास्ते में तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें वापस घर भेज दिया। मंदिर में भक्तों के प्रवेश की संभावना के चलते पुलिस और किला प्रशासन ने पहले से ही बैरिकेट लगाकर वहां पर प्रतिबंध कर दिया। पुलिस कर्मियों ने उन्हें बताया कि कोरोना के कारण मंदिर बंद है। इस कारण देवी भक्त निराश होकर घर लौट गए। इसके साथ ही गली.मौहल्लों में भी माताजी की प्रतिमाएं स्थापित नहीं की गई है। इस बार रात को खेले जाने वाले डांडिया और गरबा नृत्य पर भी रोक रहेगी।
बैंड की धुनों से की आरती
रातानाड़ा पुलिस लाइन में आज सुबह पुलिस के जवानों ने बैंड की धुनों से की आरती की। इन जवानों ने कोरोना वायरस से बचाने के लिए मां चामुंडा मंदिर के समक्ष बैंड की सुमधुर धुनों से ना केवल आरती के जरिए अपनी भावनाएं प्रकट की बल्कि मां शेरावाली से संबंधित कई भजन सुमधुर धुनों के माध्यम से पेश किए।
बाजारों में लौटी रौनक
कोरोना की दूसरी लहर के बाद से ही ग्राहकों की कमी झेल रहे बाजारों में आज से रौनक शुरू हो गई है। देश में त्योहारी मौसम भी शुरू हो गया है। आमतौर पर देश में अक्टूबरए नवंबरए दिसंबर और जनवरी के चार महीने त्योहारी सीजन माने जाते हैं। इन दिनों कई बड़े त्यौहार आते हैं जिनके लिए लोग भारी मात्रा में खरीदारी करते हैं। इसलिए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनियां अपने उत्पादों पर डिस्काउंट ऑफर करती है। चाहे प्रॉपर्टी सेक्टर हो या ऑटो मोबाइल सेक्टर या फिर इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट सभी क्षेत्रों में कंपनियां नई.नई स्कीम और छूट का ऐलान करती है। नवंबर में दिवाली.गोवद्र्धन पूजा की धूम रहेगी।
मातामह श्राद्ध मनाया
नवरात्र स्थापना के साथ अधिकांश घरों में प्रतिपदा को मातामह श्राद्ध किया गया। मातामह नाना मातामही नानी का श्राद्ध आश्विन शुक्ल प्रतिप्रदा नवरात्रि के दिन करते हैं। संतान ना होने की स्थिति में मातामह श्राद्ध के दिन नातिन ;दोहिताद्ध तर्पण व पिण्डदान करता है। अक्सर मातामह श्राद्ध पितृ पक्ष की समाप्ति के अगले दिन होता है और इस बार यह आज गुरुवार को था। परंपरा है कि लोग अपनी संतान नहीं होने पर दत्तक गोद लेते थे ताकि मृत्यु के बाद वो पिंडदान कर सके। दिवगंत परिजन के घर में लड़का ना हो तो पुत्री की संतान यानी नाती ;दोहिताद्ध भी पिंडदान कर सकता है। मान्यतानुसार लड़की के घर का खाना नहीं खा सकते इसलिए मातामह श्राद्ध के दिन नाती तर्पण कर सकता है। दरअसल पितृपक्ष में मातामह श्राद्ध एक ऐसा श्राद्ध है जो विवाहित पुत्री की ओर से अपने पिता व एक नाती की ओर से अपने नाना.नानी को तर्पण के रूप में किया जाता है। इस श्राद्ध को सुख शांति का प्रतीक माना जाता है।
आठ दिन के होंगे नवरात्रा
इस बार नवरात्रा आठ दिन के होंगे। आठ दिवसीय नवरात्र का आरंभ गुरुवार से हुआ है और समापन भी गुरुवार 14 अक्टूबर को होगा। इस साल नवरात्र में आठ दिन की पूजा और नौवें दिन विसर्जन का योग बना है क्योंकि चतुर्थी तिथि का क्षय हो रहा है। महाष्टमी 13 अक्टूबर को और महानवमी 14 अक्टूबर को मनाई जाएगी और दशहरा 15 अक्टूबर का रहेगा। करीब 9 साल बाद शारदीय नवरात्र 8 दिन के ही होंगे। इससे पहले शारदीय नवरात्र साल 2012 में आठ दिन के आए थे। अब 8 साल बाद 2029 में आठ दिन के शारदीय नवरात्र रहेंगे। हालांकि शारदीय नवरात्र में साल 2018 में भी द्वितीया तिथि का क्षय हुआ था लेकिन दो छठ होने से इस साल पूरे 9 दिन के नवरात्र हुए थे। अब इस बार शारदीय नवरात्र में चतुर्थी तिथि का क्षय हो रहा है।

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