पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा का निधन, कैंसर रोग से पीडि़त थे

पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा का रविवार सुबह निधन हो गया। उन्होंने जोधपुर स्थित अपने निवास पर रविवार सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर आखिरी सांस ली। शाम को उनके पार्थिव शव का अंतिम संस्कार पैतृक गांव चाडी में उनके पिता पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय परसराम मदेरणा की समाधि के पास किया गया। इससे पहले जोधपुर स्थित उनके निवास स्थान पर आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत सहित कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
वे लंबे समय से कैंसर से पीडि़त थे। उनका जोधपुर एम्स में इलाज चल रहा था। एक साल पहले मदेरणा को हाईकोर्ट ने इलाज कराने के लिए पैरोल दी थी। मदेरणा को फोर्थ स्टेज का कैंसर था।मदेरणा के निधन की सूचना मिलने के साथ ही भोपालगढ़ व ओसियां के अलावा समूचे जोधपुर जिले सहित मारवाड़ में उनके समर्थकों में शोक की लहर सी दौड़ गई। गांव-गांव से कार्यकर्ता जोधपुर स्थित उनके निवास पर पहुंचे और यहां से उनके पैतृक गांव गए।

बता दे कि मदेरणा पूर्व में गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे थे। इसके बाद राजस्थान के बहुचर्चित भंवरी देवी अपहरण एवं मर्डर केस में गिरफ्तार किए गए थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। मदेरणा इस केस के बाद 2011 से ही जेल में थे। भंवरी मामले में 9 साल तक जेल में रहे। महिपाल मदेरणा का जन्म दिग्गज कांग्रेसी नेता एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय परसराम मदेरणा के घर 5 मार्च 1952 को जोधपुर जिले के लक्ष्मण नगर चाडी गांव में हुआ था। बड़े भाई अशोक का पूर्व में निधन हो चुका है। उनकी पत्नी लीला मदेरणा जोधपुर की जिला प्रमुख हैं। दो पुत्रियां दिव्या मदेरणा और रूपल मदेरणा हैं।
दिव्या मदेरणा वर्तमान में इस परिवार की तीसरी पीढ़ी के रूप में राजनीति संभालते हुए जोधपुर जिले की ओसियां विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। महिपाल मदेरणा करीब 18 साल से अधिक समय तक जोधपुर के जिला प्रमुख रहे। 2003 से 2008 तक भोपालगढ़ विधानसभा क्षेत्र एवं 2008 से 2013 तक ओसियां से विधायक रहे। वे तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार में जलदाय विभाग के कैबिनेट मंत्री भी रहे। इस दौरान भंवरी प्रकरण सामने आने के बाद उन्हें जेल जाना पड़ा था। वे पिछले काफी समय से मुंह के कैंसर से जूझ रहे थे और बाद में उन्हें कोरोना भी हो गया था। कोरोना से वे काफी ठीक भी हो गए थे, लेकिन कैंसर व कोरोना का असर उन पर अभी तक बना हुआ था।

गहलोत के मुखर विरोधी रहे राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखने वाले महिपाल मदेरणा की छवि हमेशा दबंग नेता के रूप में रही। पढऩे में विशेष रूचि और सारे नियम-कानूनों के जानकार होने के कारण अधिकारी उनसे हमेशा खौफ खाते रहे। कांग्रेस की राजनीति में महिपाल हमेशा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सबसे मुखर विरोधी रहे। कई मंच पर खुलकर गहलोत का विरोध किया। महिपाल जब प्रदेश की राजनीति में तेजी से अपने पांव जमा रहे थे, लेकिन एक गलती ने न सिर्फ उनका राजनीतिक करियर तबाह कर दिया, बल्कि उनकी छवि भी बुरी तरह से धूमिल हुई। उन पर एएनएम भंवरी देवी के अपहरण व हत्या का आरोप लगा, फिर वे इससे कभी उबर नहीं पाए। इस केस में 10 साल सलाखों के पीछे रहे। इसी दौरान उनको कैंसर हुआ था। राजस्थान की राजनीति में सबसे दबंग नेता रहे परसराम मदेरणा का यह गुण महिपाल को विरासत में मिला। कभी भी उन्होंने दबकर या किसी के पीठ पीछे की राजनीति नहीं की। जब भी बोले, खुलकर बोले। किसी की बात बुरी लगी तो मुंह पर बोलने से भी कभी परहेज नहीं किया। इस कारण राजनीति में उनके कई विरोधी भी हो गए, लेकिन जमीन से जुड़े महिपाल ने कभी अपनी इस आदत को छोड़ा नहीं। महिपाल की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि वे बेहद पढ़ाकू रहे। हमेशा देर रात तक कोई न कोई किताब उनके हाथ में रहती। यहीं कारण रहा कि सरकारी नियम उन्हें हमेशा कंठस्थ रहते थे। इसके चलते कोई भी अधिकारी उन्हें कभी नियमों की आड़ लेकर उलझा नहीं पाया। वे अधिकारियों को सारे नियमों की हाथों हाथ जानकारी देकर साफ कहते थे कि इस नियम या कानून के तहत आपको ये काम करना पड़ेगा। ऐसे में अधिकारी उनके सामने जाने से भी कतराते रहते थे।
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