कोयला संकट का असर जोधपुर पर भी ,ग्रामीण क्षेत्र में 3 से 4 घंटे तक होगी विद्युत कटौती


देश में कोयले की कमी का असर अब जोधपुर में भी नजर आएगा। कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित होने जा रहा है। ऐसे में जोधपुर डिस्कॉम ने शुक्रवार से घोषित रूप से बिजली कटौती करने का निर्णय किया है। अघोषित रूप से बिजली में कटौती का क्रम कई दिन से चल रहा था। जोधपुर डिस्कॉम के ग्रामीण क्षेत्र में 3 से 4 घंटे तक की संभावित विद्युत कटौती रहेगी। समस्त नगर पालिका क्षेत्र, जिला मुख्यालय छोड़कर में दिन के समय 1 घंटे की संभावित विद्युत कटौती रहेगी।
कहा जा रहा है कि मानसून की विदाई हो रही है जिससे गर्मी बढ़ गई है और बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। राजस्थान में अगस्त में भी कोयले की कमी से बिजली का संकट खड़ा हो गया था और ऊर्जा मंत्री को दिल्ली तक दौड़ लगानी पड़ी थी। अब फिर से वही हालात बनते नजर आ रहे हैं। बिजली कम्पनियों के आला अधिकारियों ने लोगों की समस्या को दूर करने की बजाय फोन तक उठाना बंद कर दिया है। उधर उपभोक्ता हैं कि बिजली के लिए दफ्तर चक्कर लगाकर थक चुके हैं। राजस्थान को एक अक्टूबर से कोयला तय मात्रा से कम दिया जा रहा है और ऐसे में बिजली कम्पनियां गुपचुप में बिजली कटौती करती रहीं। अधिकारियों ने अब जाकर खुलासा किया है कि कोयला मंत्रालय के सब.ग्रुप ने 7 कोयले की रेक प्रतिदिन देने का निर्णय लिया था, लेकिन राजस्थान को 1 से 5 अक्टूबर के बीच कोयले की केवल 4 रेक प्रतिदिन ही मिल पाई है। बताया जा रहा है कि कोयले की कमी पूरे देश में होने वाली है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजस्थान को आगे भी कोयले की कम रेक ही मिलेंगी। यदि ऐसा होता है तो राजस्थान के ग्रामीणों को ना जाने कितनी रातें अंधेरे में रहना पड़ सकता है।
बिजली वितरण कम्पनियों का कहना है कि कोल इंडिया से कोयले की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से राजस्थान के थर्मल प्लांटों में विद्युत उत्पादन प्रभावित हो रहा है। दूसरा कारण गर्मी को बताया जा रहा है। राजस्थान से मानसून की हो रही विदाई एवं लगाातार गर्मी बढऩे के कारण बिजली की मांग में 3 हजार 500 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई हैं। बिजली की मांग 9 हजार मेगावाट के लगभग चल रही थी वह अब 12 हजार 500 मेगावाट तक पहुंच गई है। राजस्थान में 2000 लाख यूनिट प्रतिदिन चल रही विद्युत खपत भी बढ़कर 2400 लाख यूनिट प्रतिदिन हो गई हैं। कोल इंडिया से कोयले की कम आपूर्ति की वजह से राजस्थान के थर्मल प्लांटों में विद्युत उत्पादन कम हो रहा हैं। विद्युत की मांग व खपत में लगातार हो रही बढ़ोतरी व कोल इंडिया से कायले की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने की वजह से राजस्थान के थर्मल प्लांटों में विद्युत उत्पादन प्रभावित हो रहा है। जिसके चलते ग्रिड की सुरक्षा बनाए रखने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों व मुनिसिपल क्षेत्रों में रोस्टर से लोड शेडिंग करनी पड़ रही है।
कोल इंडिया राजस्थान को कोयले की जरूरत के मुताबिक पूरी सप्लाई अब भी नहीं दे पा रहा है। भारत सरकार से हुई वार्ता और वादे के मुताबिक कोल इंडिया को रोजाना 7 रैक कोयला भेजना था, लेकिन 4 रैक कोयला ही राजस्थान को भेजा जा रहा है। इससे कोयले की कमी हो रही है। इसका सीधा असर बिजली बनाने वाले पावर प्लांट पर पड़ रहा है। उन्हें बंद करना पड़ रहा है। कोयले की कमी और अन्य कारणों से करीब 10 यूनिट बंद पड़ी है। बिजली खपत भी 20 करोड़ यूनिट रोजाना से बढ़कर 24 करोड़ यूनिट हो गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिजली संकट बढ़ सकता है।

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