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राइका बाग पुलिये का नामकरण आसूराम राइका के नाम से करे सरकार: देवासी समाज

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– रियासतकाल से चले आ रहे राइका बाग क्षेत्र का विस्तृत है इतिहास

नारद जोधपुर। शहर के पावटा से सर्किट हाउस इलाकों को आपस में जोड़ने वाले राइकाबाग पुलिया का नामकरण देवासी समाज के रत्न आसूराम राइका के नाम से करने की मांग करते हुए शुक्रवार को राइका (देवासी) समाज विकास समिति की ओर से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित किया गया।

विकास समिति के सोशल मीडिया प्रभारी रामचंद्र भोपालगढ़ ने बताया कि शुक्रवार को समाज के प्रोफेसर (डॉ.) ओमप्रकाश, जगदीश खारा बेरा, एडवोकेट रमेश, समिति अध्यक्ष स्वरूपाराम जाजीवाल सहित अन्य प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें बताया गया कि रोडवेज बस स्टैंड के निकट से लेकर सर्किट हाउस तक के बीच के पूरे इलाके को रियासतकाल की 7वीं सदी राजपूत काल के बाद से अब तक राइका बाग के नाम से जाना जाता है। इसी क्षेत्र के राइकाबाग पुलिया को देवासी समाज रत्न आसूराम राइका के नाम की पहचान दी जानी चाहिए। इसके लिए देवासी समाज पिछले कई वर्षों से नामकरण को लेकर लगातार मांग करता आ रहा है। उक्त पुलिये का नामकरण अन्य समाज द्वारा अपने नाम से करवाना चाहता है, जिस पर पूर्व में देवासी समाज द्वारा कलेक्टर तथा डीआरएम रेलवे को ज्ञापन भी दिया जा चुका है, लेकिन प्रशासन द्वारा किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की गई। अत: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से एक बार पुन: समाज की ओर से यही निवेदन है कि इस पुलिये का नाम देवासी समाज के रत्न आसूराम देवासी के नाम पर किया जाए। प्रतिनिधिमंडल में भगाराम सैलरी, ओगड़राम, मुकेश, रूघनाथ सालावास सहित कई अन्य समाजबंधु शामिल थे।

विक्रम संवत् 740 के समय से आसूराम के कारण ही बनी पहचान

विकास समिति पदाधिकारियों के अनुसार विक्रम संवत 740 (मंडोर के पड़िहार वंश) के समय से ही इस इलाके की पहचान राइका बाग के रूप में आसूराम राइका के कारण ही हुई थी। वर्तमान में राइका बाग बस स्टैंड व राइका बाग पुलिया के आसपास राइका समाज निवास करता था। इसी कारण संपूर्ण इलाके को इसी नाम से जाना व पहचाना जाता रहा है। यहां पर स्थापित बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन को भी राइका बाग के नाम से ही बनाया गया। तब से आसूराम राइका की याद में इस स्टेशन का नाम राइका बाग पैलेस रखा गया।

सामाजिक व सांस्कृतिक योगदान भी अतुलनीय

राइका समाज का राइका बाग का पुराना सामाजिक व सांस्कृतिक योगदान भी अतुलनीय रहा है। इसी योगदान व पूर्व के ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर प्रशासन ने भी आसूराम राइका की मूर्ति स्थापित करने की अनुमति प्रदान की तथा इसी अनुमति से उस समाज रत्न की मूर्ति आज दिन तक स्थापित है

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