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कभी मारवाड़ में थी 23 हुकूमत, अब तीन जिलों में बंटा जोधपुर

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नारद जोधपुर। मारवाड़ की राजधानी रहे जोधपुर का विभाजन कर तीन जिलों का गठन किया गया है। कभी मारवाड़ में प्रशासनिक व्यवस्था के लिए जिलों के समान 23 हुकूमत थी। इन हुकूमतों में वर्तमान कलेक्टरों के समान हाकिम सारी प्रशासनिक व न्यायिक व्यवस्था देखते थे। वर्ष 1949 में जोधपुर जिले का गठन सिर्फ चार तहसील को मिलाकर किया गया था।

जोधपुर जिले का नाम वर्ष 1459 में राव जोधा की ओर से बसाए गए जोधपुर शहर पर मिला। मारवाड़ की स्थापना के समय से लेकर राजस्थान के गठन तक जोधपुर इसकी राजधानी रहा। जोधपुर की सीमा पांच अन्य जिलों जैसलमेर, बाड़मेर, पाली, नागौर व बीकानेर से सटी है।

23 हुकूमत में बंटा था मारवाड़

वर्ष 1949 में राजस्थान का गठन होने से पूर्व जोधपुर मारवाड़ रियासत का हिस्सा था। यहां की प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी मारवाड़ के शासकों की ओर से बनाई गई थी। अब जिले की प्रशासनिक व्यवस्था कलेक्टर देखते है। रियासत काल में मारवाड़ को प्रशासनिक व्यवस्था के तहत 23 हिस्सों में बांटा हुआ था। जिन्हें हुकूमत कहा जाता था। इन 23 हुकूमत में प्रशासनिक व न्यायिक व्यवस्था की जिम्मेदारी हाकिम के पास थी। कुछ जागीरदारों को उनके स्टेटस के अनुसार न्यायिक व प्रशासनिक अधिकार प्रदान किए गए थे। हाकिम और जागीरदारों के किसी फैसले के खिलाफ महकमा ए खास में अपील की जा सकती थी। वर्ष 1912 में चीफ कोर्ट की स्थापना के साथ हाकिम व जागीरदारों से न्यायिक अधिकार वापस ले लिए गए। इसका मुख्य मकसद प्रशासनिक व्यवस्था का सुचारू संचालन था। वर्ष 1924 में महकमा ए खास का विलय चीफ कोर्ट में कर दिया गया। वर्ष 1938 में एक सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड जोधपुर में तथा हुकूमतों में जिला एडवाइजरी बोर्ड बनाए गए। वर्ष 1942 में इन दोनों को भंग कर दिया गया और प्रतिनिधि सलाहकार सभा का गठन किया गया।

सिर्फ चार तहसील को मिलाकर बना था जोधपुर

वर्ष 1949 में राजस्थान के गठन के समय चार तहसीलों फलोदी, बिलाड़ा, शेरगढ़ व जोधपुर को मिलाकर जोधपुर जिले का गठन किया गया। वर्ष 1951 के बाद ओसियां के रूप में एक नई तहसील बनी। जोधपुर तहसील के 118 गांव फलोदी के 18 गांव को मिलाकर ओसियां तहसील का गठन हुआ था। इस दौरान कुछ गांवों का पड़ोसी जिलों से आदान प्रदान भी हुआ। अब जोधपुर में विभाजन से पहले18 तहसील है।

कभी पोकरण था फलोदी का हिस्सा

जैसलमेर में शामिल बाप तहसील के 33 गांव को फलोदी तहसील में शामिल किया गया। इसके साथ फलोदी तहसील से जुड़े 47 गांव व पोकरण कस्बे को जैसलमेर जिले में शामिल किया गया। वहीं जोधपुर में शामिल शेरगढ़ तहसील के 17 गांव को जैसलमेर जिले में शामिल किया गया। इस अदला बदली में जोधपुर तहसील के क्षेत्र से 53 गांव निकल गए। इनमें से 10 शेरगढ़ में व 43 को बिलाड़ा तहसील में शामिल किया गया। शेरगढ़ के कोलू व कुशलावा को फलोदी में शामिल किया गया।

फलोदी की प्रशासनिक व्यवस्था पहले से थी अलग

चार तहसील से मिलकर बने जोधपुर की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए जोधपुर व फलोदी दो सब डिवीजन बनाए गए। ओसियां तहसील की गठन होने के बाद इसे फलोदी से ही जोड़ा गया था। इससे जाहिर है कि फलोदी कोजिला बनाने की योजना उस समय से थी। लेकिन इसको जिला बनने में कई दशक लग गए।

तब थे 19 पुलिस थाने

जोधपुर के गठन के समय यहां पर कुल 19 पुलिस थाने और 36 चौकी थी। जोधपुर शहर, जोधपुर ग्रामीण व फलोदी के रूप में तीन सर्किल थे। फलोदी सर्किल में सात पुलिस थाने व पांच चौकी थी। जोधपुर ग्रामीण में भी सात पुलिस थाना व दस चौकी थी। जोधपुर शहर में पांच पुलिस थाने 21 चौकी थी। अब सिर्फ जोधपुर कमिश्नरेट में ही 25 पुलिस थाने व 40 चौकियां है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में बीस पुलिस थाने है।

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