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कांग्रेस: ओसियां, लूणी और शेरगढ़ बने मदेरणा, विश्नोई व राठौड़ परिवार की बपौती, नए नेताओं के लिए नहीं है कोई मौका

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नारद जोधपुर। राजस्थान (Rajasthan) में हर चुनाव में सत्ता बदलने की परिपाटी को तोड़ने के प्रयास में जुटी कांग्रेस (congress) इस बार दावा कर रही है कि बड़ी संख्या में नए युवा (young) नेताओं को मौका दिया जाएगा। मुख्यमंत्री (CM) अशोक गहलोत (Ashok Gahlot) के गृह जिले जोधपुर (Jodhpur) में पार्टी वंशवाद से पीछा नहीं छुड़ा पा रही है। लूणी, ओसियां व शेरगढ़ की तीन सीटों पर एक ही परिवार के लोगों ने कब्जा जमा रखा है। तीनों क्षेत्र में कांग्रेस कभी परिवार से बाहर के व्यक्ति को टिकट देने पर विचार ही नहीं करती। कांग्रेस में ये तीनों सीट मदेरणा (Maderna), राठौड़ (Rathore) व विश्नोई (Vishnoi) परिवार की बपौती मानी जाने लग गई है। इन क्षेत्रों में युवा नेताओं के लिए उम्मीद की किरण नजर नहीं आ रही है। शेष बची 7 सीटों में से एक पर गहलोत काबिज है। छह में से बिलाड़ा व भोपालगढ़ आरक्षित है। इन सीटों पर कांग्रेस को मजबूत जनाधार वाले स्थानीय नेता की कमी प्रत्येक चुनाव में अखरती है। सूरसागर, जोधपुर शहर, फलोदी व लोहावट में कांग्रेस हर बार नया चेहरा ही मैदान में उतारती रही है। ऐसे में जोधपुर में कांग्रेस के दावे की हवा निकलती नजर आ रही है।

गहलोत निभाते है तीनों परिवार का साथ

परसराम मदेरणा के पुत्र महिपाल और रामसिंह के पुत्र मलखान सिंह को भंवरी प्रकरण में जेल जाना पड़ा। उस समय गहलोत पर बहुत आरोप लगे कि वे दोनों परिवार की राजनीति पर विराम लगाने की तैयारी में है। इसी तरह माना जा रहा था कि खेतसिंह राठौड़ के निधन के बाद उनके परिवार के बाहर के किसी व्यक्ति पर कांग्रेस दाव खेलेगी। सारे कयास पर विराम लगाते हुए गहलोत ने तीनों परिवारों का हाथ मजबूती से थामे रखा। शेरगढ़ में उन्होंने खेतसिंह के परिवार के लोगों को ही आगे बढ़ाया। वहीं लूणी में गहलोत ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए हार स्पष्ट नजर आने के बावजूद रामसिंह की पत्नी तक को मैदान में उतार दिया। इसी तरह महिपाल के जेल जाने के बाद किसी नए चेहरे को मैदान में उतारने के बजाय उनकी पत्नी लीला को प्रत्याशी बनवाने में अहम भूमिका निभाई। गत चुनाव में मदेरणा परिवार की सहमति से ही दिव्या को मैदान में उतारा गया।

लूणी: रामसिंह परिवार की बपौती

जोधपुर शहर से सटे इस क्षेत्र पर कभी कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे रामसिंह विश्नोई का कब्जा रहा है। अभी यहां से उनकी तीसरी पीढ़ी के महेन्द्र विश्नोई विधायक है। लूणी में अब तक हुए पंद्रह चुनाव में से 11 बार कांग्रेस विजयी रही। इसमें से नौ बार रामसिंह विश्नोई परिवार का कब्जा रहा। सात बार वे स्वयं विधायक चुने गए तो एक बार उनके पुत्र मलखान सिंह विधायक रहे। एक बार यहां से रामसिंह विश्नोई स्वयं, एक बार उनकी पत्नी व एक बार उनके पुत्र मलखान सिंह यहां से चुनाव हार भी चुके है।

ओसियां: मदेरणा परिवार काबिज

ओसियां विधानसभा क्षेत्र पर कांग्रेस में मदेरणा परिवार ने कब्जा जमा रखा है। पहले दो चुनाव में परसराम मदेरणा विजयी रहे। इसकेबाद वे भोपालगढ़चलेगए और वहां से पांच बार विधायक चुने गए। एक बार उनके पुत्र महिपाल भी भोपालगढ़ से चुने गए। भोपालगढ़ सीट आरक्षित होने के बाद मदेरणा परिवार वापस ओसियां लौट आया। यहां से महिपाल एक बार विधायक रहे। इसके बाद उनकी पत्नी लीला को हार का सामना करना पड़ा। वहीं गत चुनाव में कांग्रेस ने महिपाल की बेटी दिव्या पर भरोसा जताया और वे विजयी रही।

शेरगढ़: राठौड़ परिवार हावी

शेरगढ़ विधानसभा क्षेत्र पर कांग्रेस कभी इस क्षेत्र में पार्टी मजबूत स्तम्भ रहे खेतसिंह परिवार से अलग नहीं होती। यहां से खेतसिंह राठौड़ आठ बार विधायक रहे। उनके निधन के बाद कांग्रेस ने खेतसिंह के भतीजे कल्याणसिंह के पुत्र उम्मेदसिंह को मैदान में उतारा। उम्मेदसिंह लगातार दो चुनाव होर गए। इसके बावजूद पार्टी ने परिवार का साथ नहीं छोड़ा। दो बार चुनाव हारने वालों को टिकट नहीं देने की नीति के चलते उम्मेदसिंह का टिकट मजबूरी में काटना पड़ा तो पार्टी ने उम्मेदसिंह की पत्नी मीना कंवर को मैदान में उतारा और वे विजयी रही।

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