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राजस्थान में श्रमण संस्कृति बोर्ड का गठन जैन समाज के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि: उम्मेदराज जैन

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– केंद्र ने वर्ष 2014 में अल्पसंख्यक का दर्जा दे संवैधानिक सुरक्षा दी, अब राज्य में श्रमण संस्कृति बोर्ड से मिलेगी और मजबूती

नारद जोधपुर। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा जैन समाज के कल्याण एवं उत्थान के लिए श्रमण संस्कृति बोर्ड गठन के आदेश जारी होने पर समस्त राजस्थान के सकल जैन समाज में हर्ष की लहर है। जैन समाज लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था और इसे पूर्ण कर सरकार ने समाज की भावनाओं का सम्मान किया है।

ऑल इंडिया जैन माइनॉरिटी फेडरेशन जोधपुर शाखा के अध्यक्ष उम्मेदराज जैन ने इस पहल के मुख्यमंत्री गहलोत का आभार जताते हुए कहा कि जैन समुदाय के मंदिर, पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण एवं नव निर्माण, जैन समुदाय के लोक साहित्य एवं ग्रंथों के प्रकाशन, प्रचार-प्रसार इनके प्राचीन साहित्यों के संकलन, शोध एवं संरक्षण तथा जैन धर्म श्रमण परम्पराओं के सरक्षण के सम्बन्ध में सुझाव देने हेतु राज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड का गठन किया है। जैन ने बताया कि वैसे तो केंद्र सरकार ने दिनांक 27 जनवरी 2014 को जैन समुदाय को जब अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान किया तब से ही प्रमुख संवैधानिक सुरक्षा अधिकार प्राप्त हो गए थे, जिसके अंतर्गत जैन धर्म, धार्मिक स्थलों, मंदिरों, उपासना स्थलों, तीर्थ स्थलों के अस्तित्व की रक्षा-सुरक्षा के साथ समुचित विकास के साथ सुरक्षा के व्यापक प्रबंध शासन द्वारा किये जाने का प्रावधान है। अब राजस्थान में इस बोर्ड के गठन से उपरोक्त संवैधानिक सुरक्षा अधिकारों की सुरक्षा के साथ जैन धर्म की प्राचीन संस्कृति,परम्पराओं, धर्मयत्नों, पौराणिक व पुरातन धरोहरों, दुर्लभ धर्म शास्त्रों, साहित्यों, साधु-साध्वी-श्रावक-श्राविका (चतुर्विघ् संघ) की रक्षा व सुरक्षा सम्भव हो सकेगी साथ ही जैन धर्म की नैतिक शिक्षा, शोध, साहित्य प्रकाशन व प्रभु महावीर के सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार में भी बोर्ड की अहम भूमिका सिद्ध होगी।

बोर्ड में एक-एक अध्यक्ष व उपाध्यक्ष, तीन सदस्य होंगे

राजस्थान राज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष व तीन सदस्य के रूप में कुल 5 गैर सरकारी सदस्यों का मनोनयन राजस्थान राज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड के नियमों के अन्तर्गत किया जायेगा। इनमें सरकारी सदस्य के रूप में शासन सचिव, गृह विभाग अथवा उनका प्रतिनिधि (संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी), शासन सचिव स्कूल शिक्षा विभाग (प्रारम्भिक / माध्यमिक) एवं संस्कृत शिक्षा विभाग अथवा उनका प्रतिनिधि (संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी), आयुक्त/ निदेशक, कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरात्तव विभाग उनका प्रतिनिधि,आयुक्त / निदेशक, देवस्थान विभाग अथवा उनका प्रतिनिधि, आयुक्त / निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग अथवा उनका प्रतिनिधि, आयुक्त / निदेशक, अहिंसा एवं शांति विभाग अथवा उनका प्रतिनिधि, आयुक्त / निर्देशक अल्पसंख्यक मामलात विभाग अथवा उनका प्रतिनिधि, उप निदेशक स्तर का विभागीय अधिकारी (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग) सम्मिलित होंगे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, राजस्थान सरकार, राजस्थान राज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड के लिये प्रशासनिक विभाग होगा। राजस्थान राज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण राजस्थान राज्य होगा तथा इस बोर्ड के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए राज्य सरकार को कार्य योजना एवं सुझाव प्रस्तावित करेगा।

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