46.1 C
Jodhpur

महात्मा गांधी के आदर्शों और जीवन मूल्यों को जीवन में आत्मसात करें: मुख्यमंत्री गहलोत

spot_img

Published:

– जेएनवीयू गांधी अध्ययन केंद्र के तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का समापन

नारद जोधपुर। जय नारायण व्यास विवि के गांधी अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित ‘समकालीन विश्व में शांति एवं अहिंसा के गांधीवादी मार्ग’ विषयक अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का समापन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मुख्य आतिथ्य में गुरुवार को संपन्न हुआ। इसे ऑनलाइन संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि गांधीजी के आदर्शों और जीवन मूल्यों को हर विद्यार्थी और युवा अपने जीवन में आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि देश-विदेश में हिंसा के माहौल को देखते हुए शांति स्थापना के प्रयास बहुत जरूरी है। गांधीजी के सत्य और अहिंसा का कोई विकल्प नहीं है। राजस्थान सरकार का प्रयास है कि राजस्थान को देश में प्रथम बनाने के प्रयास किया जायेगा। साथ ही कहा कि विश्वविद्यालय में संचालित सभी अध्ययन केन्द्रों को राज्य सरकार अपने स्तर पर अनुदान देगी। गहलोत ने सभी से महात्मा गांधी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ पढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जयपुर में गांधी म्यूजियम की स्थापना की जा रही है। समाज को नई दिशा देने के लिए राज्य में महात्मा गांधी स्टेट ऑफ सोशल साइंस केन्द्र की स्थापना की गई है।

गांधी अध्ययन केन्द्र के निदेशक व कांफ्रेस के आयोजन सचिव डॉ. हेमसिंह गहलोत ने बताया कि समापन समारोह के मुख्य वक्ता राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बी. एम. शर्मा ने महात्मा गांधी की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। प्रो. शर्मा ने अपने उद्बोधन में गांधी जी के ऐतिहासिक परिप्रे़़क्ष्य को चित्रित करते हुए महात्मा गांधी द्वारा स्थापित आश्रमों पर विस्तृत चर्चा की। साथ ही उन्होंने कहा कि गांधीजी के अहिंसा, सत्याग्र्रह तथा टालस्टॉय के गांधीजी के जीवन पर प्रभाव का उल्लेख किया।

इसी तरह, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलपति प्रो. राजीव जैन ने इक्कीसवीं सदी को गांधी की सदी बताया। साथ ही कहा कि गांधी के विचार सार्वभौमिक है। सत्य व अहिंसा प्रगति के मार्ग है। आने वाले समय में गांधी अध्ययन केन्द्र और अधिक सार्थक होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जेएनवीयू के कुलपति प्र्रो के.एल. श्रीवास्तव ने कहा कि आज गांधीजी के सिद्धांत अहिंसा, सत्य, समानता, भाईचारे को जीवन में उतारने की आवश्यकता है।

कांफ्रेस के आयोजन सचिव डॉ. हेमसिंह गहलोत ने तीन दिवस कार्यक्रम का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया में तीन दिन में कुल 8 समानान्तर सत्र हुए। जिनमें 52 पत्रवाचकों ने पत्रवाचन किया।

कार्यक्रम को इन विशेषज्ञों ने भी किया संबोधित

संगोष्ठी में यूपीएससी के पूर्व सदस्य प्रो. पुरूषोत्तम अग्रवाल, गांधी शान्ति प्रतिष्ठान नई दिल्ली के कुमार प्रशांत राजीव गांधी स्टडी सर्कल के प्रो. सतीश राय, राज्य मंत्री राजेन्द्र सोलंकी, जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के प्रो. नावेद जमाल, उसमानिया विश्वविद्यालय के प्रो. वाई पार्थसारथी, जेएनयू नई दिल्ली के प्रो. गोविन्द कुमार इनकिया, प्रो. भानु कपिल तथा विदेश से मिकवाइज विश्वविद्यालय पोलेंड की प्रो. ग्रेस्याना स्ट्रेनेड, गांधी इन्फोर्मेशन सेंटर बर्लिन जर्मनी के डॉ. क्रिस्टन बरटोल्फ ऑनलाईन उद्बोधन दिया। वहीं, चैक रिपब्लिक गणराज्य की प्रो. याना तोमिशकोवा आदि विद्वान ने गांधीजी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। कांफ्रेस निदेशक प्रो. के.एल. रैगर ने सभी धन्यवाद ज्ञापित किया तथा इस कांफ्रेस के समन्वयक, डॉ. हरिराम परिहार, सह समन्वयक, डॉ. दिनेश गहलोत ने सभी प्रतिभागीयों को प्रमाण पत्र वितरण कर आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम संचालन डॉ. ललित कुमार पंवार व डॉ. राजश्री राणावत ने किया।

तीसरे दिन के 5वें तकनीकी सत्र में भी विषय विशेषज्ञ रहे मौजूद

तीसरे दिन पांचवे तकनीकी सत्र महात्मा गांधी और वैश्वीकरण के मुख्य वक्ता मौलाना आजाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. अफरोज आलम ने वैश्विक संस्कृति अहिंसा और सत्य जैसे मुल्यों पर प्रकाश डाला। विश्व जिस तरह से बदल रहा है इस दौर में गांधी दर्शन चिंतन, गांधीजी की समानता,, अहिंसा, शांन्ति सदभावना जैसे मुल्यों पर बात की। चैक रिपब्लिक गणराज्य की प्रो. याना तोमिशकोवा ने कहा की दुनिया में जिस तरह से हिंसा बढती जा रही है। उसमें गांधी जी का अहिंसा रूपी संदेश विश्व में सहारा जाता है और याद किया जाता हैं, कर्नल बलदेव जी मानव ने गांधी दर्शन और गांधदीवाद में अपने विचार रखे। तथा डॉ. अर्जुन सिंह सांखला ने गांधीजी के सत्य एवं नैतिकता और अहिंसा तथा सत्याग्रह पर अपनी बात रखी। इस सत्र में मनोज कुमार राघव, हेमलता चौधरी, जनक शेखावत, ममता शर्मा, वृंन्दा सिंह डॉ, ललित कुमार, सीमा चारण, डॉ. हेमू चौधरी, डॉ. बीएल देवडा ने पत्र वाचन किया। 

इनकी भी रही मौजूदगी

कार्यक्रम में सिंडीकेट सदस्य प्रो. के.आर. पटेल, प्रो. संगीता लूकंड, प्रो. शिशुपाल सिंह भादु, प्रो. मीना बरडिया, प्रो. प्रवीण गहलोत, कला संकाय अधिष्ठाता प्रो. कल्पना पुरोहित, प्रो. एस.के. मीना, प्रो. एल.एन. बुनकर प्रो. सुशिला सक्तावत, प्रो. मदन मोहन, डॉ. शिव बरबड, डॉ. प्रवीण चन्द, विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थियों तथा प्रतिभागियों ने भाग लिया।

[bsa_pro_ad_space id=2]
spot_img
spot_img

सम्बंधित समाचार

Ad

spot_img

ताजा समाचार

spot_img
error: Content is protected !!