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गलती हो जाए तो प्रायश्चित जरूर करें: गोविंद गोपाल शास्त्री

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– भोपालगढ़ कस्बे में श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन

नारद भोपालगढ़। कस्बे के बिजलीघर के पास संत श्रीराम महाराज के देवलोक गमन होने पर साध्वी रामाबाई के सानिध्य में 7 दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को प्रवचन देते हुए गोविंद गोपाल शास्त्री ने अलग-अलग प्रसंग पर जानकारी दी। खेता बाई ने बताया कि कथा व्यास पर विराजित गोविंद गोपाल शास्त्री ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है।

शास्त्री ने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। भागवत कथा में प्रवचन देते हुए शास्त्री ने कहा कि द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षयपात्र की प्राप्ति किया। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। इसके बदले प्रकृति ने मानव का रक्षण किया। भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है वह हर किसी में बसता है।

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