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गौचर औरण का संरक्षण नहीं किया तो बिगड़ जाएगा प्रकृति का संतुलन : पूर्वमंत्री भाटी

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  • गौचर औरण संरक्षक संघ, राजस्थान की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक और संभाग स्तरीय बैठक संपन्न, 23 जिलों के प्रतिनिधि हुए शामिल

नारद. जोधपुर। प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्राचीन काल से गौवंश के लिए संरक्षित गौचर भूमि का संरक्षण करने के उद्देश्य से हाल ही में गठित राजस्थान गौचर ओरण संघ राजस्थान प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक और संभाग स्तरीय सम्मेलन जोधपुर – जैसलमेर मार्ग पर कैरू फांटा स्थित सिवांची गेट गौशाला परिसर में आयोजित हुई। इसमें प्रदेश के 23 जिलों से कई प्रतिनिधियों ने शिरकत कर गौचर संरक्षण के मुद्दे पर मंथन किया।

राजस्थान गौचर ओरण संघ के प्रदेश महामंत्री प्रकाश व्यास ने बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा पूरे राजस्थान की औरण भूमियों को डीम्ड फॉरेस्ट घोषित करने और इससे जनमानस पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा करने हेतु गौचर औरण संरक्षण संघ राजस्थान की संभाग स्तरीय बैठक का आयोजन सिंवांची गेट गौशाला के नंदीशाला प्रांगण, केरू फांटा के पास आयोजित किया गया । दीप प्रज्वलन और अतिथियों के स्वागत सत्कार के बाद कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी और क्षेत्र के विभिन मठों के संतों के सानिध्य में शुरू हुई संत श्री लालपुरी जी महाराज, संत श्री स्वरूपानंद जी महाराज , संत श्री प्रेमाराम जी महाराज, संत श्री मुलपुरी जी महाराज के सानिध्य में कार्यक्रम शुरूआत हुई कार्यक्रम की अध्यक्षता गणेश भंडारी, अध्यक्ष सिंवांची गेट गौशाला ने की, निर्मल बरडिया विशिष्ट अतिथि थे। अपने स्वागत उद्बोधन में नटवर थानवी ने गौचर, औरण की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि किस प्रकार समाज के लोग ही इन भूमियों पर अतिक्रमण कर रहे है । संघ के महामंत्री प्रकाश व्यास ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान में जिस तरह से गोचर औरण का दुरुपयोग कर रहे हैं, सरकारें इस जमीन का आवंटन कर रही है, वह बहुत ही गलत है। वरिष्ठ अधिवक्ता मोतीसिंह राजपुरोहित और मानवेंद्र सिंह भादरिया ने विभिन्न कानूनी पहलुओं की जानकारी दी। गौचर औरण को किन किन प्रावधानों के अंतर्गत बचाया जा सकता है, उसकी जानकारी भी दी । महामंत्री सुरजमांलसिंह नीमराना और कार्यकारी अध्यक्ष निर्मल बरडिया ने संगठन के बारे में, संगठन के उद्देश्यों के बारे में, अब तक किए गए कार्यक्रमों की जानकारी दी।

अपने उद्बोधन में देवीसिंह भाटी ने लोगों को संगठन को मजबूत करने की राय दी, गौचर औरण को कैसे मुक्त किया जा सकता है, विभिन्न स्तरों पर क्या कारवाई आवश्यक है, जन चेतना कैसे जागृत हो सकती है, राजनैतिक और प्रशासनिक स्तर पर क्या कठिनाइयां आ सकती है, पर जोर दिया। हर गांव के जागरूक लोगों को गौचर औरण मुक्ति में आगे आने का आह्वान किया । श्री भाटी ने सिंवांची गेट गौशाला की भव्य नंदीशाला के निर्माण में अपना योगदान देने वाले पूर्व मुख्य अभियंता मोहनलाल जैन का साफा पहनाकर सम्मान किया और गौशाला अध्यक्ष गणेश भंडारी का भी बहुमान किया।

कार्यक्रम में जुगतसिंह करनोत, आईवीर सिंह पातावत, लोकमित्र, हरनारायण सोनी, ललित जैन, हेमंत सिंघवी, वासुदेव देपावत आदि वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में नंदीशाला सचिव प्रदीप खिंवसरा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच संचालन श्याम चौबीसा ने किया। सम्मेलन में बजरंग जोशी, नरपत सिंह, हनवंत सिंह, हीराराम गोदारा, भागीरथ पुरोहित, खेमराज यादव सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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