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जोधपुर के नकली दवा सप्लायर लोकेश खंडेलवाल के खिलाफ पुणे में FIR दर्ज

- अंतरराज्यीय रैकेट का हुआ भंडाफोड़ - पनवेल में बनी, बिहार व जोधपुर में बिल बने, अहमदाबाद व पुणे में बेची

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जोधपुर। इंटास कंपनी के नकली इंजेक्शन बनाने और उसे बाजार में बेचने के एक मामले में जोधपुर के दवा विक्रेता का नाम सामने आया है। पुणे व अहमदाबाद में पकड़ी गई इस नकली इंजेक्शन की सप्लाई चैन में जोधपुर के लोकेश खंडेलवाल को भी आरोपी बनाया गया है। फिलहाल पुणे पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
दरअसल, पुणे के ड्रग इंस्पेक्टर ने एकांश ट्रेडर्स, वाकड, पुणे के यहां ग्लोबुसेल-10 नकली दवा मिलने पर कार्रवाई की गई। इसका उपयोग आपातकालीन स्थिति में प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए किया जाता है। उसने इसे सागर मेडिसिन अहमदाबाद से खरीदा था। इस दवा के सैंपल लेकर जांच में भेजे गए। नोएडा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल से दवा की जांच करवाई गई। इस बीच इंटास कंपनी ने भी अपनी जांच की आैर बताया कि जब्त की गई दवा उनकी कंपनी से बनी ही नहीं है और यह नकली है। दवा के नकली साबित होेते ही गुजरात राज्य औषधि निरीक्षक ने सागर मेडिसिन के मालिक कंदार पुजारा से पूछताछ की तो उन्होंने पुणे में यह दवा बेचने के साथ स्वीकार किया कि उसने जोधपुर के रिलायबल केमिस्ट से खरीद थी। दवा की खरीद बकायदा बिल से हुई थी। आरोपियों की पहचान भूमकर चौक के मेडिकल दुकान के मालिक सतीश रमेश चौहान, अहमदाबाद में सागर मेडिसिन के मालिक श्रीकंदर पुजारा, राजस्थान के जोधपुर के लोकेश सुकनिया खंडेलवाल, बिहार में पॉपुलर मेडिसिन के पार्टनर आदित्य कृष्ण, कामोठे के कामथ ड्रग एजेंसीज के रूप में हुई है। जिनके खिलाफ पुलिस जांच कर रही है।

बिल जोधपुर में कटा, दवा मुंबई से अहमदाबाद पहुंची

पूछताछ के दौरान अहमदाबाद के केमिस्ट ने जानकारी दी कि दवा रसीद संख्या 167900054780 के माध्यम से रिलायबल केमिस्ट, दुकान नं. 203 द्वितीय तल, गांधी टावर, जालोरी गेट जोधपुर ने तिरुपति कूरियर कामोठे मुंबई से उसे मिली थी। खंडेलवाल का नाम सामने आने पर राजस्थान के ड्रग्स कंट्रोल विभाग को मेल कर इस बारे में जानकारी मांगी गई। इस पर औषधि नियंत्रक अधिकारी आशीष दत्त लोकेश खंडेलवाल से पूछताछ की। लोकेश का कहना था कि उसने यह दवा बिहार से खरीदी थी। जांच के दौरान पता चला कि इस दवा का स्टॉक हकीकत में जोधपुर आया ही नहीं और यह पनवेल से अहमदाबाद भेजी गई थी।

बिहार में हुई फर्जी खरीद, ड्रग लाइसेंस भी फर्जी

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, बिहार तक पहुंच गई। राज्य औषधि नियंत्रक पटना ने पॉपुलर मेडिसिन स्पेशलिस्ट, मुजफ्फरपुर के मालिक आदित्य कृष्ण से पूछताछ की तो उसने इसे कामथ ड्रग एजेंसी साई साल्वी पनवेल से खरीदना बताया। ड्रग इंस्पेक्टर रायगढ़ ने इसके बारे में जांच की तो पता चला ऐसी कोई संस्था अस्तित्व में ही नहीं है और पॉपुलर मेडिसिन स्पेशलिस्ट के खरीद बिल फर्जी हैं। कामथ ड्रग एजेंसी के बिक्री बिल पर लाइसेंस संख्या MH-RAI-417178, MH-RAL-417179 अंकित है, जो कि वास्तव में किसी दूसरे फर्म को आवंटित थे, जिसे रद्द कर दिया गया था।हालांकि लोकेश खंडेलवाल का कहना है कि उन्होंने बिल से ही माल बेचा है, उनकी तरफ से कोई गलत काम नहीं किया गया है।

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