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#RGHS में उठी लाखों की दवा में मेडिकल स्टोर के खिलाफ FIR, बिना किसी की मिलीभगत के संभव नहीं

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जोधपुर में कैंसर के इलाज के नाम पर सरकारी योजना में लाखों का तीसरा घोटाला

एम्स व मेडीपल्स अस्पताल के नाम की पर्चियों पर उठी है दवाएं

डॉ. विनय व्यास के नाम की पर्चियां, उन्होंने इसे फर्जी बताया

नारद जोधपुर। सरकारी योजना में कैंसर के इलाज के नाम पर लाखों के घोटाले का तीसरा मामला सामने आया है। इस बार आरजीएचएस में कैंसर नहीं होने के बाद भी डॉक्टर की पर्चियों पर दवाओं के बिल उठने को लेकर मुकदमा दर्ज हुआ है। जालोरी गेट स्थित झंवर मेडिकल स्टोर को मुख्य आरोपी बनाया गया है। सरकारी स्तर पर हुई जांच में एम्स व मेडीपल्स अस्पताल के डॉक्टर्स की पर्ची पर दवाएं देना बताया गया है। हालांकि दोनों अस्पताल के डॉक्टर्स ने इन पर्चियों को फर्जी करार दिया है। हालांकि इस जांच में भी कई सवाल हैं, जिनके जवाब शायद पुलिस ढूंढेगी। चर्चा यह भी है कि इस स्टोर के किसी डॉक्टर से घनिष्ठ संबंध है और उनकी पर्चियों पर दवा यही से उठती है।

आरजीएचएस के संयुक्त परियोजना निदेशक डॉ. अभिषेक सिंह फिलक ने बासनी थाने में दर्ज करवाई रिपोर्ट में बताया कि सूचना के आधार पर ज्ञात हुआ कि आरजीएचएस कार्ड 130620210243394 की लाभार्थी श्रीमती मोहन कंवर द्वारा लगातार मेडीप्लस अस्पताल जोधपुर से ईलाज लेकर स्तन कैंसर बीमारी की महंगी दवाईयां काफी समय से एक ही मेडीकल स्टोर झंवर मेडीकल जालोरी गेट जोधपुर से ली जा रही है। इस मामले को संज्ञान में लेकर एमडी इण्डिया टीम के राज्य प्रमुख डॉ. प्रशांत क्षेत्रिय को इस सम्बंध जांच के लिए कहा गया। मरीज मोहन कंवर के स्तन कैंसर की कोई बीमारी है या नहीं, इस बारे में जांच की गई तो पता चला कि वें 87 वर्ष की है और चलने फिरने में असमर्थ है। मोहन कंवर के पोते अजीतसिंह ने जांच टीम को बताया कि मोहन कंवर काे 06 महीने पहले मथुरादास माथुर अस्पताल व महात्मा गांधी अस्पताल जोधपुर लेकर गए थे। वहां डॉक्टर ने प्राईवेट पार्ट में गांठ व मानसिक बीमारी बताई, इसके अलावा कोई बीमारी नहीं थी। कभी कभी आरजीएचएस से दवाईयां ले रहे थे। मेडीकल पर मेरे पापा जाते थे। उमेश परीहार मेडीकल शॉप पर कार्य करता है। वह पापा से सम्पर्क करके बोलता था आपको दवाईयां लेना होता मुझे हर महीनें बिल चढ़ाना पड़ता है। इसलिए जब कभी कॉल करो तो ओटीपी बता देना। पापा उमेश परीहार को ओटीपी बता देते थे और वह दादीजी के कार्ड से दवाईयां उठा देता था। इसके अलावा हमनें दादाजी को कही पर भी किसी अस्पताल में नहीं दिखाया।

सवाल : क्या सच में मरीज मेडीपल्स कभी गया नहीं

जब यह मामला सामने आया तो टीम ने अस्पताल जाकर जांच की। अस्पताल प्रशासन द्वारा प्रथम रिपोर्ट में मरीज मोहन कंवर काे अस्पताल में आना बताया गया। द्वितिय रिपोर्ट में बताया गया कि मरीज मोहन कंवर आई थी परन्तु जो भी सील व डॉक्टर का ईलाज लिखा हुआ है वह फर्जी है। मरीज के साथ अटेंडर ने गलत सूचना दी एवं दवाई झंबर मेडीकल एजेंसीज से ली, जिसका मेडीप्लस हॉस्पीटल से कोई सम्बंध नहीं है। अस्पताल के डॉ. विनय व्यास जिसके नाम से लाभार्थी की पर्चियां है, ने इमेल द्वारा सूचित किया कि यह ईलाज उनसे नहीं लिया गया है एवं पूर्णतया फर्जी है, हस्ताक्षर भी फर्जी किए गए है, उनकी सील या तो झंवर मेडीकल एजेंसी द्वारा बनाई गई है या मरीज मोहन कंवर द्वारा बनाई गई है, उनको इसके बारे में कोई सूचना नही है। मेडीप्लस अस्पताल ने इस बारे में थाना बासनी क्षेत्र में रिपोर्ट दर्ज करवाई जिसमें श्रीमती मोहन कंवर के अलावा 05 अन्य लाभार्थीयों एवं झंवर मेडीकल एजेंसीज को इंगित किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अस्पताल सही कह रहा है या मरीज के परिजन। उनके मुताबिक वे कभी मेडीपल्स गए ही नहीं तो डॉ. व्यास की पर्ची कहां से आई।

एम्स के डॉक्टर्स ने भी कहा, पर्चियां उनकी नहीं

जब फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगी तो जांच टीम ने झंवर मेडीकल से दवाई प्राप्त करने वाले अन्य लाभार्थीयों के डाटा की गहनता से जांच की गई तो झंवर मेडीकल से दवाईयां प्राप्त करने की एम्स अस्पताल जोधपुर की 35 पर्चीयां संदिग्ध प्रतीत हुई। इस पर टीम द्वारा एम्स अस्पताल जोधपुर जाकर जांच की तो एम्स अस्पताल जोधपुर में पर्चियों पर ईलाज लिखने वाले डॉक्टर आंकाक्षा गर्ग, डॉ. गोपालकृष्ण बोहरा, डॉ. महेन्द्रसिंह एवं डॉ. प्रमोद कुमार नें पर्चियां देखकर उन्हें फर्जी व कूटरचित ईलाज बताकर हस्ताक्षर उनके होने से इनकार किया। एम्स के अन्य डॉक्टर नवीन की कुछ पर्चीयां भी संदिग्ध थी जो विदेश में होनें से पर्चीयों की तस्दीक नही हो पाई।

हेड कांस्टेबल के बेटे को मिलता था 40 फीसदी हिस्सा

आरजीएचएस में दवा के नाम पर फर्जी बिल पेश कर पैसे उठाने के मामले में एक गंभीर पहलु भी सामने आया है। पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक आरपीटीसी में कार्यरत हेड कांस्टेबल बक्तावर सिंह को दो साल पहले ब्रेन हेमरेज होने के कारण दवाएं लेनी पड़ रही है। उनके पुत्र रविंद्र सिंह के हवाले से जांच टीम ने कहा है कि वह पिता के लिए झंवर मेडिकल से दवा लेता था। दवा के साथ वह अन्य सामान व रूपए भी लेता था। उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। मेडिकल स्टोर पर कार्यरत तुषार ने इस तरह के लेनदेन के लिए सम्पर्क करवाया था। उसे 40 प्रतिशत मिलता था तो 60 प्रतिशत झंवर मेडीकल वाला लेता था। वहीं, एमडीएमएच में कार्यरत बंशीधर के आरजीएचएस कार्ड की जांच की तो उसके नाम पर भी काफी बिल उठे थे। बंशीधर ने जांच टीम को बयान दिया कि वह कैंसर का मरीज है और एम्स में इलाज चल रहा है। उसका एसएसओ आईडी व पासवर्ड झंवर मेडिकल वाले के पास है, उसने ही पर्चियां बनाकर दवा के बिल उठा लिए है।

कैंसर के नाम पर फर्जीवाड़े का पहला मामला : सवा साल में 7 हजार मरीजों के नाम से 13 करोड़ रुपए के कथित फर्जी क्लेम उठाए

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में शहर के पारा कैंसर सेंटर की ओर से कथित रूप से फर्जीवाड़ा कर क्लेम उठाए जाने की शिकायत की जांच हुई थी। करीब चार साल पहले स्वास्थ्य अधिकारियों ने क्लिनिक पर छापा मारा। आरोप था कि सवा साल में 6 से 7 हजार मरीजों के नाम पर क्लेम के 13 करोड़ रुपए उठाए गए। शिकायत यह भी थी कि मरीजों को कैंसर की दवा दी ही नहीं गई और भुगतान उठा लिया गया। जिसमें कीमोथैरेपी व अन्य दवाइयां शामिल हैं। शिकायत के अनुसार, क्लिनिक में बिना स्टॉक दवाइयां होते हुए कुछ चिकित्सकों के साथ मिलीभगत कर कूटरचित विक्रय बिल बनाकर मरीजों के साथ धोखाधड़ी की गई है। क्लिनिक से जुड़े मेडिकल स्टोर ने फर्जी बिल काटे हैं। मरीजों तक दवाइयां भी नहीं पहुंची। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन बताया गया है।

कैंसर के नाम पर फर्जीवाड़े का दूसरा मामला : जो दवा खरीदी नहीं, बेच कर पैसे उठाए

पाल रोड स्थित श्रीराम अस्पताल के दो डायरेक्टर व एक डॉक्टर के खिलाफ एक परिवादी ने देवनगर थाने में कैंसर दवा में फर्जीवाड़े को लेकर इसी साल एफआईआर दर्ज कराई थी। सरदारपुरा निवासी नंदलाल व्यास ने आरोप लगाया कि अस्पताल के डायरेक्टर डॉ सुनील चांडक, उनकी पत्नी रेखा चांडक व कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर राजेश शर्मा अपने निजी अस्पताल में राज्य सरकार की भामाशाह योजना के तहत कैंसर मरीजों के लिए दवाइयों के फर्जी बिल से करोड़ों रुपये उठा रहे है। उन्होंने बताया कि अस्पताल स्थित मेडिकल स्टोर से कैंसर की जिन दवाइयों का बिल देकर क्लेम उठाया गया, उस मेडिकल स्टोर ने उन दवाइयों की खरीद ही नहीं की थी। लिहाजा कई मरीजों के इलाज के नाम पर फर्जी बिल बनाकर राज्य सरकार की योजना से करोड़ों रुपये का गबन किया गया है।

FIR raised against medical store for medicines worth lakhs in RGHS

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