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अकाल की दस्तक: 8 लाख हेक्टेयर में 80 प्रतिशत सावणु फसलें झुलसी

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– तकरीबन 4 लाख हैक्टेयर में खड़ी सिंचित फसलें भी मुरझाई

– पटवारी हड़ताल पर, कृषि विभाग के कार्मिक नि:शुल्क मोबाइल वितरण में व्यस्त, भुगत रहे किसान

– फसल कटाई प्रयोग खटाई में, अकाल की मार झेल रहे किसानों पर फसल नुकसान के आंकलन का संकट

– ऐसे ही हालात रहे, तो फसलों को नुकसान के बावजूद फसल बीमा व आपदा अनुदान से होना पड़ सकता है वंचित

नारद तिंवरी। जिले में अगस्त का महीना सूखा निकला, तो अकाल की आहट ने दस्तक दे दी है। फसलों के नुकसान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बारानी जमीन पर बोई गई 8 लाख हेक्टेयर में खड़ी सावणु फसलों में से तकरीबन 80 फीसदी फसलें झुलस कर चौपट हो चुकी है। वहीं नलकूपों से खेती करने वाले किसानों को भी फसल खराबे से नुकसान उठाना पड़ा रहा है। जिले मे इस बार मई, जून व 20 जुलाई तक समय समय पर बारिश हो जाने से सावणु फसल बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार व तिल की अच्छी बढ़वार हुई थी, लेकिन 20 जुलाई के बाद अच्छी बारिश नहीं होने और तेज हवा चलने से ये सभी फसलें झुलस गई है। अब किसानों के हाथ चारा जरूर लगेगा। जिले के असिंचित क्षेत्र के किसान अकाल की दस्तक से बेहद त्रस्त है। सरकारी मदद की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को हर समय यही भय सता रहा है कि अकाल की चपेट मे आने के बाद वर्ष भर अपना व अपने परिवार का पेट कैसे पालेंगे।

सिंचित खेती में भी खराबा…

जिले में 4 लाख हेक्टेयर में सिंचित खेती मूंगफली व कपास की फसलें खड़ी है।जुलाई माह तक ये फसलें लहलहा रही थी और किसानों को उम्मीद थी कि इस बार बम्पर पैदावार आएगी लेकिन अचानक मानसून के रूठ जाने और बिजली संकट के चलते ये फसलें भी मुरझा गई है और इन फसलों की पैदावार भी 25 प्रतिशत घट जाएगी।

इधर फसल कटाई प्रयोग अटकने की आशंका से किसानों की आफत ओर बढ़ सकती है। ऐसे में नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए किसान फसल बीमा क्लेम और बुवाई खर्च हेतु आपदा अनुदान से आस लगाए हुए है लेकिन अब तक फसल कटाई प्रयोग शुरू नही होने व पटवारियों की हड़ताल व कार्मिकों के मोबाइल वितरण में लगे होने के कारण फसल कटाई प्रयोगों को लेकर किसान आशंकित है। मौसम की मार से किसान अधपकी जली हुई फसलों को समेटने में लगे है वही अगेती बुवाई के कारण कम अवधि की फसलें पक गई है जिसकी किसान कटाई करने में जुटे हुए है। फसल कटाई प्रयोग समय पर शुरू नही होने से नुकसान व पैदावार का सही आंकलन नही हो पाएगा जिससे किसानों फसल बीमा क्लेम व आपदा अनुदान से वंचित होना पड़ेगा।

फसल कटाई प्रयोग से ही पैदावार का आंकलन, इन्हीं आंकड़ों से फसल खरीद व आयात निर्यात के निर्णय

फसलों की पैदावार का आंकलन फसल कटाई प्रयोग से ही किया जाता है। इन्ही फसल कटाई प्रयोगों के परिणाम से फसलों की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता, प्रदेश में कुल उत्पादन व आंकलन होता है। इन्ही आंकड़ों के आधार पर फसलों में पोषण प्रबंधन, बीज सुधार, फसल खरीद योजना बनाने, फसलों के आयात व निर्यात की अनुमति व शुल्क निर्धारण के निर्णय लिए जाते है।

फसल बीमा में इसलिए महत्वपूर्ण फसल कटाई प्रयोग

प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू है। जिसमें सभी ऋणी किसानों का जिन्होंने फसल बीमे से बाहर होने का विकल्प नही चुना है उन सभी किसानों का स्वत ही फसल बीमा किया गया है। ऐसे में अधिकतर ऋणी किसानों का फसल बीमा है वही  लाखों अऋणी किसानों ने भी फसल बीमा लिया है। इन किसानों को फसलों में नुकसान का बीमा क्लेम निर्धारण हेतु फसल कटाई प्रयोग बहुत ही महत्वपूर्ण कड़ी है। योजना में फसल कटाई प्रयोग के अनुसार आए परिणामों के आधार पर गत 7 वर्षो के ओसत पैदावार को गारंटी उपज माना जाता है। वर्तमान सीजन की फसल में फसल कटाई प्रयोग करके पैदावार की  गणना कर उसे गारंटी उपज में से घटाने पर पैदावार में कमी का आंकलन किया जाता है। अगर गारंटी उपज से पैदावार कम है तो बीमा क्लेम दिया जाता है। इसके लिए पटवार मंडल पर अधिसूचित फसलों के प्रति फसल 4 फसल कटाई प्रयोग होते है। वही तहसील क्षेत्र पर अधिसूचित फसल के 6 फसल कटाई प्रयोग होते है। इसी फसल कटाई प्रयोगों से फसल नुकसान का आंकलन होता है।

ये प्रक्रिया फसल कटाई प्रयोग की

फसल कटाई प्रयोग हेतु राजस्व विभाग द्वारा रेंडम प्रणाली से प्रत्येक पटवार मंडल हेतु प्रत्येक फसल के लिए खसरा नंबर आवंटित किए जाते है। उक्त खसरो में आंकलित की जाने वाली फसल की बुवाई नही होने पर दूसरे व तीसरे विकल्प के भी खसरे भी साथ ही में आवंटित होते है। आवंटित खसरों में जिला स्तर पर कृषि विभाग या राजस्व विभाग को फसल कटाई प्रयोग हेतु तहसील या ब्लॉक आवंटित किए जाते है। फसल।कटाई प्रयोग के दौरान निर्धारित खसरे में 5 गुणा 5 मीटर के क्षेत्र में फसल को काट कर सुखा कर फसल को निकाला जाता है। फिर उसका वजन कर प्रति हैक्टेयर उत्पादकता का अनुमान किया जाता है। एक ही फसल के पटवार मंडल स्तर पर 4 प्रयोग कर उन चारों प्रयोगों के ओसत को उस पटवार मंडल की उपज माना जाता है। फसल कटाई प्रयोग के दौरान राजस्व या कृषि विभाग के कार्मिक, आवंटित खसरे के किसान, फसल बीमा कम्पनी के प्रतिनिधि को।मौजूदगी में उक्त प्रक्रिया की जाती है। जिसका प्रपत्र तैयार कर किसान के हस्ताक्षर लिए जाते है।

किसान संकट में, समय रहते सरकार उठाए कदम : सिंवर

किसानों को बरसात नही होने व सिंचाई हेतु बिजली आपूर्ति नही मिलने और नहरों में समय पर पानी नहीं दे पाने से फसलों में बहुत नुकसान हुआ है। बुवाई खर्च निकालने पर भी संकट मंडरा रहा है। ऐसे में किसान फसल बीमा क्लेम और आपदा अनुदान से राहत की उम्मीद लगाए हुए है लेकिन फसल कटाई प्रयोग शुरू नही होने से किसान आशंकित है। इससे शासन की कृषि के प्रति गंभीरता पर भी सवाल खड़े हो रहे है। कृषि से संबंधित सभी योजनाओं का निर्धारण इन्ही फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त फसल पैदावार के आंकड़ों के आधार पर ही होता है। ऐसे में शासन इसमें गंभीरता बरतते हुए समय पर पारदर्शिता के साथ फसल कटाई प्रयोग करवाएं।

– तुलछाराम सिंवर, प्रदेश मंत्री, भारतीय किसान संघ

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