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जैसलमेर में आसान नहीं होगी मानवेन्द्र की राह, अपनों से निपटना अहम चुनौती

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जोधपुर। राज्य विधानसभा चुनाव (Election) की अनौपचारिक रूप से रणभेरी बज चुकी है। थार के रेगिस्तान (Desert) के बीच पाकिस्तान सीमा से सटे जैसलमेर (Jaisalmer) में इस बार बेहद रोमांचक मुकाबला देखने को मिल सकता है। भाजपा के संस्थापक सदस्य और कद्दावर नेता रहे जसवंतसिंह (Jaswant Singh) जसोल के पुत्र मानवेन्द्र सिंह (Manvendra Singh) जैसलमेर से कांग्रेस (Congress) की तरफ से दावेदारी जता रहे है, लेकिन उनके लिए यहां से चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। अपनी पार्टी के लोगों से निपटना उनके लिए सबसे अहम चुनौती होगी।

करीब दो लाख मतदाताओं वाले जैसलमेर विधानसभा चुनाव का नतीजा बहुत कुछ पोकरण से जुड़ा रहता है। गत चुनाव में अनुसूचित जाति-जनजाति और अल्पसंख्यक मतदाओं के गठजोड़ के दम पर कांग्रेस ने दोनों सीट पर जीत हासिल की थी। इस बार आपसी तनातनी में यह गठजोड़ कमजोर हो चुका है। भाजपा(BJP) इस कमजोरी का फायदा उठाने की फिराक में है।

आसान नहीं होगा रूपाराम का टिकट काटना

सामान्य वर्ग की इस सीट पर वर्तमान में अनुसूचित जाति के रूपाराम धनदे विधायक है। इस रिटायर्ड चीफ इंजीनियर की सोशल इंजीनियरिंग क्षेत्र में बेहद मजबूत मानी जाती है। क्षेत्र में पूरी तरह से सक्रिय रूपाराम का टिकट काटना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। रूपाराम ने राजपूत बाहुल्य मानी जाने वाली इस सीट पर कांग्रेस को अहम जीत दिलाई थी। गत चुनाव के बाद क्षेत्र में उनका कद अपेक्षाकृत मजबूत हुआ।

निर्दलीय ताल ठोक सकते है रूपाराम

यदि कांग्रेस ने मानवेन्द्र को मैदान में उतारा तो इस बात की पूरी संभावना है कि रूपाराम निर्दलीय चुनाव लड़ सकते है। उनके निर्दलीय मैदान में उतरते ही सारे समीकरण गड़बड़ा सकते है। हालांकि रूपाराम ने अभी तक अपने पत्ते खोले नहीं है। वे इंतजार करने की रणनीति अपना रहे है। समय आने पर वे फैसला करेंगे। रूपाराम के निर्दलीय मैदान में उतरने से अनुसूचित जाति व जनजाति का वोट बैंक कांग्रेस से खिसक सकता है। लेकिन गाजी के परिवार के साथ बढ़ी राजनीतिक टसल के कारण उन्हें मुस्लिम वोट लेने में दिक्कत होगी।

मानवेन्द्र को सपोर्ट कर रहा है गाजी परिवार

मुस्लिमों के धर्म गुरु रहे गाजी फकीर के परिवार की रूपाराम के साथ राजनीतिक अनबन जगजाहिर है। पोकरण विधायक सालेह मोहम्मद स्वयं रूपाराम का टिकट कटवाने के पक्ष में है। ऐसे में गाजी परिवार खुलकर मानवेन्द्र को सपोर्ट कर रहा है। ऐसे में मानवेन्द्र के समक्ष सभी को साथ लेकर चलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

जसवंत के नाम पर

इस क्षेत्र के मुस्लिम व राजपूत मतदाताओं पर जसवंत सिंह की मजबूत पकड़ उनके व्यक्तिगत रिश्तों के कारण थी। यहीं कारण रहा कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय मैदान में उतरे जसवंत को जैसलमेर से अच्छा समर्थन मिला। मानवेन्द्र अपने पिता के नाम पर सहानुभूति बटोरने की फिराक में है, लेकिन उनके लिए राह इतनी आसान नहीं होगी। मानवेन्द्र के स्वयं के क्षेत्र में इन लोगों से रिश्ते जसवंत के समान आत्मीय नहीं है।

राजपूत मत भी होंगे विभक्त

इस बात की पूरी संभावना है कि भाजपा इस सीट से छोटूसिंह या किसी अन्य राजपूत प्रत्याशी को टिकट देगी। ऐसी स्थिति में राजपूत मतदाताओं में विभाजन होगा। बड़े और छोटे में बंटे राजपूत मतदाता अपने धड़े के प्रत्याशी का साथ देंगे। ऐसे में मानवेन्द्र को राजपूतों का पूरा समर्थन मिलने के आसार कम ही है।

जैसलमेर से अब तक विधायक

1952 : हड़वंत सिंह निर्दलीय
1957: हुकम सिंह निर्दलीय
1962 : हुकम सिंह कांग्रेस
1967 : बाल सिंह सोढा स्वतंत्र पार्टी
1972 : भोपाल सिंह कांग्रेस
1977 : किशन सिंह भाटी जनता पार्टी
1980 : चंद्रवीर सिंह भाजपा
1985 : मुल्तान राम बारूपाल निर्दलीय
1990 : डॉ जितेंद्र सिंह जनता दल
1993 : गुलाब सिंह रावत बीजेपी
1998 : गोरधन कल्ला कांग्रेस
2003 : सांग सिंह भाटी भाजपा
2008 : छोटू सिंह भाटी भाजपा
2013 : छोटू सिंह भाटी बीजेपी
2018 : रूपाराम धनदे कांग्रेस

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