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शिक्षक सम्मेलन में शिक्षक-शिक्षार्थी संबंधों पर चर्चा

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– भोपालगढ़ में शिक्षक संघ शेखावत का जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन का हुआ आयोजन

भोपालगढ़। राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) जिला शाखा जोधपुर का दो दिवसीय जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन शनिवार को संघ की भोपालगढ़ उपशाखा के तत्वावधान में शहर के राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय त्रिवेणी में संपन्न हुआ। शैक्षिक सम्मलेन में जिले भर के सैकड़ों शिक्षकों के साथ ही कई संतजन, शिक्षाविद, शिक्षा अधिकारी एवं विचारकों ने भाग लेकर अपने-विचार व्यक्त किए और जिले भर से आए शिक्षकों ने शिक्षक-शिक्षार्थी के संबंधों पर विस्तार से चर्चा की गई।

सम्मेलन संयोजक गोरधनराम जाखड़ ने बताया कि दो दिवसीय जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन का समापन समारोह में क्षेत्र के रतकुड़िया भाकर स्थित लोकसंत सद्गुरु भोलारामजी महाराज की देवरीधाम के पीठाधीश महंत रमैयादास साहेब ने उपस्थित शिक्षकों को संबोधित करते हुए शिक्षक के पद को परम गुरु के समान बताया तथा निर्गुण पदों के माध्यम से गुरु पद की महिमा एवं एक व्यक्ति के जीवन में गुरु के महत्व को बताया। वहीं सम्मेलन के मुख्य अतिथि महाराज गंगासिंह विश्वविद्यालय बीकानेर के पूर्व कुलपति डॉ. गंगाराम जाखड़ ने संगठन संचालन की बात करते हुए कहा कि किसी भी संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए सबसे पहली आवश्यकता संगठन से जुड़े लोगों की सकारात्मकता है। क्योंकि संगठन से जिन लोगों को अपेक्षा होती है, उनके प्रति विश्वास बनाए रखना एवं निरंतर जवलन्त समस्याओं पर विचार-विमर्श कर सरकार तक अपनी मांगे उठाना भी किसी संगठन को निरंतर चलाने के लिए अतिआवश्यक होता हैं। शिक्षक संघ शेखावत शिक्षकों की वाजिब मांगों के निस्तारण के लिए निरंतर सरकार के समक्ष ज्ञापन प्रस्तुत करता रहता हैं। प्रोफेसर जाखड़ ने नई शिक्षा नीति से आगामी वर्षों में सार्वजनिक शिक्षा को होने वाले व्यापक नुकसान के बारे में भी जानकारी दी।

इस अवसर पर संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष भंवर काला ने शिक्षक सम्मलेन में शिक्षक-शिक्षार्थी संबंधों पर बोलते हुए पिछले एक वर्ष में शिक्षकों की ज्वलंत समस्याओं पर प्रदेश एवं जिला स्तर से किए जा रहे आंदोलन एवं धरना-प्रदर्शनों पर विस्तृत जानकारी देते हुए आगामी महत्वपूर्ण मुद्दों यथा ओपीएस के लिए पीएफआरडी कानून को रद्द करने के लिए आंदोलन करने, शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए स्थाई स्थानांतरण नीति बनाने, गैर शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों की स्थाई मुक्ति करने, विभिन्न संवर्गों की रुकी हुई पदोन्नति शीघ्र करने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत रूप से उपस्थित शिक्षक समुदाय को अवगत कराया। वहीं संघ के संभाग संयोजक त्रिलोकराम नायल ने भी गैर शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त करने के विषय पर कहा कि शिक्षक संघ शेखावत की सरकार व मुख्यमंत्री यह मांग है, कि शिक्षक को शिक्षक बनाकर ही रखा जाए और उनसे विद्यार्थियों को पढ़ाने के अतिरिक्त किसी भी प्रकार के अनावश्यक ऑनलाइन एवं सभी प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्यों से स्थाई रूप से मुक्त रखा जाए। इन गैर शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों के व्यावसायिक उन्नयन पर तो नकारात्मक प्रभाव पड़ता ही है, साथ ही विद्यार्थियों के भविष्य पर भी अंधकार के बादल छा जाते हैं। आगामी नई सरकार के गठन के पश्चात राजस्थान के सम्पूर्ण शिक्षकों के सहयोग से प्रदेश स्तर पर गैर शैक्षणिक कार्यों के बहिष्कार के लिए व्यापक स्तर पर एवं प्रदेश स्तरीय मजबूत आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी भूराराम चौधरी, भोपालगढ़ तहसीलदार शिक्षाविद रामेश्वरराम छाबा, क्षेत्रीय सीबीईओ अलपुराम टाक, शिक्षक संघ शेखावत के जिलाध्यक्ष जगदीश डांगी, जिलामंत्री ऋतुराज पारीक व कार्यक्रम संयोजक गोरधनराम जाखड़ ने भी संबोधित किया और अपने विचार रखे।

इस अवसर पर संघ के भोपालगढ़ उपशाखा अध्यक्ष रामप्रसाद पारासरिया, मांगीलाल मेघवाल, हनुमानराम भादू, विनोद सारण, कमलेश हुड्डा, भंवरलाल सिरोही, रिड़मलराम, हुकमाराम कूकणा, माणकराम विश्नोई, जयरूपराम सारण, रामकिशोर सोऊ, चौथाराम तांडी, श्यामलाल ओसु, आरपी नरेंद्र नायल, अंजना शर्मा, विमला सिंघल, विनोद गुलाटी, रूपाराम गोदारा व घनश्याम गुगड़वाल सहित जिले भर से आए सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे।

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