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लगातार तीसरे दिन की ताबड़तोड़ बरसात में खेतों व लाटों में तैरने लगी तहस-नहस फसलें

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– किसानों के लिए गरीबी में आटा गीला कर गई अनचाही बारिश

– अन्नाज मिला न चारा, धरतीपुत्रों में गौवंश की उदरपूर्ति की चिंता व्याप्त।

पुखराज माली धुंधाड़ा।

नारद लूणी। जोधपुर जिले के लूणी विधानसभा क्षेत्र में डेढ़ माह बाद गुरूवार को आरंभ हुआ बरसात का दौर शनिवार को तीसरे दिन भी झमाझम रूप में जारी रहा। लगातार तीन दिनों तक हुई ताबड़तोड़ मूसलाधार बरसात के कारण किसानों को संभलने का भी मौका नहीं मिला तथा पहले जहां बारिश के अभाव में फसलें नष्ट होने की चिंता खाए जा रही थी, जिसके चलते बिन बारिश के ही फसलें सूख गई। इन सूखी हुई फसलों व चारा को समेटने की तैयारी में लगे किसानों के लिए यह बारिश कहर साबित हुई। हालात ऐसे बन गए कि जो फसलें खेतों में अथवा लाटों में काट कर रखी गई थी वे फसलें पानी के साथ तैरकर बह गई। इस कारण किसान वर्ग के हाथ इसबार अन्नाज तो दूर गौवंश के लिए चारा भी नसीब नहीं हुआ।

उल्लेखनीय हैं इस वर्ष मानसून पूर्व के समय आए बिपर जॉय तुफान के समय ही अच्छी बारिश हो गई थी। बुवाई के लायक बारिश होने से उत्साहित किसान वर्ग ने इसबार जमकर बुवाई की तथा शेष रहे किसानों ने बाद की बारिश के समय बुवाई की। अच्छी बारिश होने एवं अच्छे जमाने की आस में किसानों ने अपने असिंचित खेतों के साथ सिंचित खेतों में भी खरीफ की जमकर बुवाई की। निदाण आने तक तो सब कुछ सही था, लेकिन बाद में आवश्यकतानुसार बारिश नहीं होने से किसान वर्ग मे चिंता व्याप्त हो गई।

डेढ़ माह से मेह के इंतजार में आंखें पत्थरा सी गई थी:

प्रगतिशील किसान अजय चौधरी ने बताया कि किसान वर्ग द्वारा आगत एवं पास्त की फसलों की बुवाई करने के बाद निदाण आने तक तो इन फसलों में बढ़वार भी आशानुसार होने से किसान वर्ग उत्साहित नजर आ रहे थे। लेकिन निदाण कर फसलों से खरपतवार को हटाया गया एवं फिर मेह होने का इंतजार करने लगे। इस प्रकार से पिछले डेढ़ माह से किसान वर्ग आसमां की और देखते रहे, जिससे आंखें ही पत्थरा सी गई, लेकिन बारिश नहीं हुई। मेह के इंतजार में खेतों में खड़ी फसलें मुरझा गई एवं उनमें दानें भी नहीं बने इसके बावजूद भी किसान इनसे मिलने वाले चारे को गौवंश के लिए समेटने लगे। तथा इन दिनों चारे की आस में इन फसलों की कटाई युद्ध स्तर पर की जा रही थी। इस कारण इन दिनों कई खेतों में यह फसलें लाटों में रखी गई थी या कहीं पर खेतों में ही थी।

तीन दिन में तहस-नहस हो गई सारी उम्मीदें:

गुरूवार सुबह शुरू हुई बरसात गुरूवार को कभी तेज तो कभी बौछारों के रूप में जारी रही। इसी प्रकार शुक्रवार को तो सुबह लगातार दो घंटें, दिन में कई बार रूक-रूककर तथा रात में लगातार एक घंटा तक मूसलाधार एवं पूरी रातभर रूक-रूककर बरसात का क्रम बना रहा। शनिवार को तो दोपहर बाद फिर से झमाझम बारिश का दौर शुरू हुआ जो एक घंटा तक जारी रहा तथा रात में भी आठ बजे से देर रात तक बरसात होती रही। इस बरसात से मौसम तो सुहावना बन गया, लेकिन किसान वर्ग के लिए यह बरसात मुसिबत ही साबित हुई। खेतों में काटकर रखी गई एवं लाटों में रखी गई फसलें जलमग्न होकर बारिश के पानी में तैरकर बह गई।

गौवंश के लिए चारे की चिंता:

किसान वर्ग द्वारा अपने पशुधन के लिए इन फसलों से ही निकलने वाले चारे को ही पशुधन के लिए सालभर काम में लिया जाता हैं। अतिरिक्त चारा होने पर उस चारे को कराई के रूप में भविष्य के लिए सहेज कर रखते हैं। लेकिन पिछले कई सालों से खरीफ एवं रबी की फसलों की उपज अच्छी नहीं होने के कारण चारा की पैदावार भी नगण्य ही रही। इस कारण पशुपालकों के लिए पशुधन को खिलाने के लिए चारे की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा हैं।

हजारों किसान रहे फसल बीमा से वंचित:

इस साल किसानों द्वारा खरीफ की जमकर बुवाई की गई तथा वे अपनी फसलों का बीमा भी कराने के लिए कई बार ई-मित्र सेवा केंद्रों पर गए लेकिन पोर्टल नहीं चलने के कारण हजारों किसान अपनी फसलों का बीमा नहीं करवा सके।

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