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फसलें हो रही चौपट, न क्रॉप कटिंग, न गिरदावरी, किसान गिरदावरी एप में कई तकनीकी खामियां, कोई हेल्पलाइन भी नहीं

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– पटवारी पेनडाउन हड़ताल पर, सरकार के पास नहीं कोई विकल्प

– आमजन का पेट भरने वाले किसान इन दिनों खून के आंसू रो रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं हैं।

पुखराज माली. धुंधाड़ा।

नारद लूणी। पटवारी पेनडाउन हड़ताल पर हैं और प्रशासन मूक दर्शक बना देख रहा हैं। इस वर्ष जून माह में अच्छी बारिश के चलते क्षेत्र में मूंग, ग्वार, ज्वार, बाजरा व तिलहन की बम्पर बुवाई हुई। फसल पकने के समय बारिश की कमी से अधिकत्तर फसलें झुलसकर चौपट हो गई। मूंग की फसल में पौधा तो बना, लेकिन उसमें फली व मूंग के दानें नहीं बन पाए, ऐसे में फसलों की कटाई व थ्रेसिंग करवाने की भी मजबूरी के चलते किसान को दोहरी मार झेलनी पड़ रही हैं। फसल की जगह केवल अधपक्का चारा ही प्राप्त हो रहा हैं। दूसरी ओर जिन किसानों ने फसल बीमा करवा रखा हैं, उनके पास गिरदावरी रिपोर्ट नहीं हैं। फसल गिरदावरी के लिए पिछले छह माह से ऑनलाइन गिरदावरी साइट बंद पड़ी हैं। हालांकि राज्य सरकार ने किसान गिरदावरी एप के माध्यम से किसानों को स्वयं गिरदावरी करने का विकल्प तो दिया हैं, लेकिन इस एप में तकनीकी खामियों व किसानों के पास तकनीकी ज्ञान के अभाव में गिरदावरी नहीं हो रही। ऐसे में सवाल यह उठता हैं कि किसानों को फसल बीमा का लाभ कैसे मिलेगा?

जानकारी के अभाव में परेशान किसान:

पटवारियों की पेनडाउन हड़ताल के कारण क्षेत्र में नियमानुसार गिरदावरी नहीं हो पाई हैं। हालांकि सरकार द्वारा किसानों को स्वयं गिरदावरी करने का विकल्प दिया गया हैं लेकिन एप में तकनीकी समस्या व गिरदावरी में कई प्रकार की पेचीदगी हैं। गिरदावरी कई स्तरों में हो रही हैं उसके लिए जिओ टेगिंग, फोटो अपलोड सहित जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता हैं जो कि आम किसान के लिए संभव नहीं हैं।

फसल काटे या नहीं, अधरझूल में किसान वर्ग:

वैसे भी आगत की फसलों की कटाई का समय निलता जा रहा हैं। इस स्थिती में किसान वर्ग अपनी फसलों को बिना गिरदावरी के काटे या नहीं, अभी अधरझूल की स्थिती में हैं। 80 से 90 फिसदी तक खराब हुई फसलों को अगर काट भी ली गई तो गिरदावरी कैसे कराएंगे और अगर फसलों को नहीं काटा गया तो बिना दानों के पशुधन के लिए जो चारा मिल रहा वह भी बिगड़े मौसम की भेंट चढ़ जाएगा। इसी प्रकार पास्त की फसलें तो वैसे भी नहीं पनपी हैं तथा उनमें तो सौ फिसदी ही खराबा हैं।

न क्रॉप कटिंग हुई और न ही गिरदावरी:

नियमानुसार पटवारी खेत के निश्चित भाग पांच गुणा पांच मीटर क्षेत्र में फसल कटाई प्रयोग करतें है। कटाई के बाद उस फसल की थ्रेसिंग की जाती हैं और फसल प्राप्त की जाती हैं। उसी के आधार पर फसल उत्पादन का अनुमान लगाया जाता हैं और बीमा क्लेम किया जाता हैं। इस बार पटवारी व भू-निरीक्षक हड़ताल पर होने की वजह से फसल कटाई प्रयोग हुआ ही नहीं तो आखिर किस आधार पर फसल उत्पादन का आंकलन किया जाएगा और फसल का बीमा क्लेम दिया जाएगा इसका जवाब किसी के पास नहीं हैं।

एप में आ रहे एरर, किसान कैसे करें गिरदावरी:

सरकार ने एप तो लांच कर दिया पर इसमें तकनीकी खामियों की वजह से पूरी प्रक्रिया करने के बाद सबमिट करने के दौरान एरर आ रहा हैं। इससे गिरदावरी नहीं हो रही हैं। प्रशिक्षण व प्रचार-प्रसार के अभाव में किसान इस एप का उपयोग ही नहीं कर पा रहा हैं। कई किसानों के पास तो स्मार्टफोन भी नहीं हैं, तो वह फसल की गिरदावरी कैसे करेंगे। ऐसे में किसान के पास गिरदावरी प्राप्त करने का कोई विकल्प भी नहीं हैं।

फसल का बीमा क्लेम मिला तो श्रेय पीएम को मिलेगा, इसलिए सरकार न तो गिरदावरी चाहती हैं और न ही पटवार संघ की जायज मांगें मान रही हैं: पटेल

वर्ष 2014 में जब से केंद्र में मोदी सरकार बनी हैं तब से मोदी सरकार ने देशभर में जनकल्याण के फैसलें भी लिए हैं। इसी में से एक हैं प्रधानमंत्री फसल बीमा। इस योजना का नाम ही प्रधानमंत्री फसल बीमा होने से फसल खराबे के कारण जो भी बीमा की क्लेम की राशि किसान वर्ग को मिलती हैं तो उसका सीधा श्रेय प्रधानमंत्री को जाता हैं। प्रदेश में कांग्रेस सरकार नहीं चाहती कि किसान वर्ग को अपनी फसल के खराबे का कोई क्लेम मिले। इसलिए गहलोत सरकार ने पटवारियों की जायज मांगों को मानने की और कोई ध्यान नहीं दिया हैं। जब तक सरकार व पटवार संघ के मध्य कोई बात पर सहमति बनेगी तब तक गिरदावरी की समय सीमा भी निकल जाएगी एवं किसान वर्ग दौहरी मार से आर्थिक बोझ तले दब जाएगा। वैसे भी 80 से 90 फिसदी तक खरीफ की फसलों में खराबा हो गया हैं। जिसमें से भी सर्वर नहीं चलने के कारण दस फिसदी भी किसान अपनी फसलों का बीमा नहीं करवा सके। प्रदेश सरकार तो तत्काल पटवार संघ की जायज मांगों पर विचार कर उनकी पेनडाउन हड़ताल को समाप्त कराना चाहिए एवं समय रहते गिरदावरी एवं क्रॉप कटिंग सहित अन्य प्रक्रियाएं पूरी करवाकर फसल बीमा कराने वालों के साथ फसल का बीमा कराने से जो किसान एवं बंटाईदार वचिंत रहे हैं, उन्हें भी पूरा मुहावजा दिलाना चाहिए। सरकार ने इस और कोई ध्यान नहीं दिया तो वे भी किसानों के हितों के लिए किसान वर्ग द्वारा जो आंदोलन एवं धरना प्रदर्शन किया जाएगा वे भी उनकी मांगों के समर्थन में हर समय उनके साथ रहेंगे।

  • जोगाराम पटेल, पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव।

सरकार मुआवजे की करे घोषणा: चौधरी

पश्चिमी राजस्थान के अमुमन गांव अकाल के साये में हैं। अधिकतर फसलें चौपट हो गई है, ऐसे में किसानों की मांग है कि सरकार कम से कम 90 फीसदी फसल खराबा मानकर मुआवजे की घोषणा करें, ताकि किसान की कमर टूटने से बच जाए। अधिकत्तर खेतों में मूंग व ग्वार की फसल चौपट हो गई हैं। खेती में मुनाफे की जगह घाटा हुआ हैं। किसानों की सुनने वाला कोई नहीं हैं। मजदूरी व लागत के मुकाबले आधी से भी कम आय हुई हैं। क्रॉप कटिंग के लिए कोई कर्मचारी खेत में नहीं आया, इसमें किसान वर्ग का क्या दोष हैं, लेकिन इसका खामियाजा किसान वर्ग को भुगतना पड़ रहा हैं। सरकार को जल्द से जल्द मुआवजे की घोषणा करनी चाहिए।
अजय चौधरी, प्रगतिशील किसान।

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