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पहली बार गहलोत को अपने घर में करना पड़ सकता है कार्यकर्ताओं के बगावती तेवरों का सामना

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नारद जोधपुर। मुख्यमंत्री (CM) अशोक गहलोत (Ashok Gahlot) के लिए आगामी चुनाव में सूरसागर (Soorsagar) विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशी (candidate) का चयन (selection) करना आसान नहीं होगा। इस सीट पर कांग्रेस (congress) लगातार चार चुनाव हार चुकी है। चारों चुनाव में प्रत्याशी चयन गहलोत का रहा। कार्यकर्ताओं (workers) ने हर बार गहलोत के प्रत्याशी को सिर झुका स्वीकार किया, लेकिन अब हालात बदल रहे है। इस सीट के प्रत्याशी को लेकर घमासान मचा हुआ है। गहलोत को पहली बार अपने घर में ही कार्यकर्ताओं के बगावती तेवर का सामना करना पड़ सकता है। कई वरिष्ठ कार्यकर्ता ताल ठोक मैदान में उतरने की तैयारी में है। वे इस मसले पर गहलोत से भी आरपार के मूड में है।

सूरसागर में पार्टी लगातार हार रही है। वर्ष 2008 में यह सीट सामान्य होने के बाद से भी पार्टी तीन चुनाव हार चुकी है। गहलोत ने हर बार यहां से अल्पसंख्यक समुदाय का प्रत्याशी बदल-बदल कर उतारा। मतदाताओं का ध्रुवीकरण कर भाजपा हर बार आसानी से सीट निकाल ले जाती है।

इस बार टिकट के कुछ दावेदार चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी में है। चाहे गहलोत उन्हें टिकट दे या नहीं। उनका कहना है कि बहुत हुआ अब। बरसों से हम लोग गहलोत के निर्णय को बगैर कोई सवाल उठाए स्वीकार करते आए है। लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। पार्टी लगातार हार रही है। इस हार का प्रभाव अन्य सीटों पर भी पड़ रहा है। पार्टी हित में अब हमें ताल ठोकनी ही पड़ेगी।

गहलोत परोस देते हैं जीत की थाली

जोधपुर में कांग्रेस संगठन में बरसों से सक्रिय और गहलोत के करीबी माने जाने वाले एक नेता ने आरोप लगाया कि गहलोत हर बार अल्पसंख्यक समुदाय का प्रत्याशी उतार सूर्यकांता व्यास को जीत की थाली परोस देते है। उनका आरोप है कि कांग्रेस राजस्थान की 200 सीटों पर 201 प्रत्याशी मैदान में उतारती है। यह अतिरिक्त प्रत्याशी सूर्यकांता व्यास है।

अपनी रणनीति में बदलाव करे गहलोत

महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके गहलोत के करीबी एक अन्य नेता का कहना है कि तीन बार हमने अल्पसंख्यक समुदाय का प्रत्याशी उतार कोशिश कर ली। अब समय आ गया है कि गहलोत अपनी रणनीति में बदलाव करे। यहां से किसी अन्य समाज का प्रत्याशी उतार कोशिश की जाए। उनका कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय को भी समझ में आ चुका है कि यहां से सीट निकालना बेहद मुश्किल है। उन्होंने साफ कहा कि वे इस बार न केवल गहलोत के फैसले का विरोध करेंगे बल्कि आवश्यक हुआ तो चुनाव मैदान में उतरेंगे। चाहे निर्दलीय ही सही।

संतुष्ट करना था अल्पसंख्यकों को

एक अन्य वरिष्ठ नेता का कहना है कि जब अल्पसंख्यक समुदाय का प्रत्याशी नहीं जीत पा रहा है तो फिर गहलोत को चाहिये था कि इस समुदाय के किसी व्यक्ति को किसी बोर्ड या संस्थान में सम्मानजनक पद देकर संतुष्ट किया जाता। ताकि कांग्रेस का वोट बैंक समझा जाने वाला यह समुदाय अपने आप को उपेक्षित महसूस नहीं करता। ऐसी स्थिति में समुदाय के वोट भी टूटने का खतरा नहीं रहता।

सूरसागर का गणित

सूरसागर जोधपुर शहर का बाहरी छोर है। शहर के फैलाव के साथ आबाद हुए इस क्षेत्र में किसी एक जाति विशेष का वर्चस्व नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र से आकर बड़ी संख्या में लोग इसी क्षेत्र में आबाद हुए। वहीं परिवार बढ़ने के कारण भीतरी शहर के परिवारों का भी यही क्षेत्र नया रहवास बना। एससी एसटी के अलावा माली, ब्राह्मण, सिंधी, मुस्लिम, वैश्य वर्ग, जाट व राजपूत समाज के मतदाताओं की संख्या अधिक है।

ब्राह्मणों व ओबीसी का दावा

इस सीट पर सबसे जोरदार दावा ब्राह्मण समाज व ओबीसी के नेता कर रहे है। समाज के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने हमें कभी तव्वजों ही नहीं दी। सिर्फ 1951 के चुनाव में द्वारका प्रसाद जोधपुर शहर से जीते थे। जिन्हें कांग्रेस ने समर्थन दिया था। इसके बाद कांग्रेस ने कभी अवसर ही प्रदान नहीं किया। यहां तक की प्रदेश के मुख्यमंत्री बने जयनारायण व्यास तक को किशनगढ़ से चुनाव लड़ना पड़ा था। सूरसागर में करीब 40 से 45 हजार ब्राह्मण मतदाता है। इसके बाद ओबीसी वर्ग का दावा भी मजबूत है। ओबीसी से जुड़े नेताओं का कहना है कि उनके वोट सबसे अधिक है। ऐसे में ओबीसी से जुड़े किसी भी व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया जाए।

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