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क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों की दावेदारी मुख्य चुनाव आयुक्त के बयान के बाद खतरे में

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क्या…बाड़मेर में दिखेगा इसका असर

पिछले विधानसभा चुनाव में 199 में से 46 विधायक ऐसे चुनकर आए हैं थे, जो आपराधिक पृष्ठभूमि वाले थे। जबकि 2013 में यह आंकड़ा 35 ही था। इस तरह जीतने वाले नए विधायकों में 28 ऐसे थे जिन पर संगीन केस दर्ज हैं। जबकि वर्ष 2013 में ऐसे विधायकों की संख्या 20 ही थी। यानि, तमाम प्रयासों के बावजूद आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को राजनीति में आने से रोकना मुश्किल हो रहा है।

प्रदेश की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के लिए भी अब ऐसे उम्मीदवारों को टिकट देना आसान नहीं
जोधपुर। प्रदेश में आगामी दिनों में होने वाले विधानसभा चुनाव में दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के उन दावेदारों की मुश्किलें बढ़नी तय है, जिनका आपराधिक बैकग्राउंड है। कुछ ऐसे ही संकेत दिए हैं मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने। कुछ समय पहले राजस्थान के दौरे पर आए मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया था कि विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों ने आपराधिक पृष्टभूमि वाले नेता को उम्मीदवार बनाया, तो उन्हें समाचार पत्रों में यह बताना होगा कि उसने ऐसे नेता को टिकट क्यों दिया? क्या उस विधानसभा में उनके अलावा कोई प्रत्याशी नहीं था। इसके लिए उन्हें समाचार पत्रों में स्पष्टीकरण देना होगा। इतना ही नहीं, खुद उस उम्मीदवार को भी तीन बार समाचार पत्रों में अपनी जानकारी देनी होगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के इस बयान के बाद प्रदेश के कई कांग्रेस या भाजपा उम्मीदवारों को झटका लग सकता है। भाजपा के अंदरखाने चर्चा बाड़मेर के एक दावेदार की भी हो रही है। बताया जा रहा है कि जहां भाजपा के जिलाध्यक्ष स्वरूपसिंह भी विधानसभा चुनाव के टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन इनके खिलाफ दर्ज हुए मुकदमों की फेहरिस्त में कई संगीन धाराओं वाले मामले भी थे।
हालांकि बताया जा रहा है कि ये सभी बंद हो गए हैं लेकिन चुनाव आयोग के निर्देशों और प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ राजनीतिक वातावरण के मंसूब के सामने यहां दिक्कत आ सकती है। बताया जाता है कि भाजपा जिलाध्यक्ष सिंह के खिलाफ बाड़मेर में न्यायिक अभिरक्षा में रहते हुए जेल से फरार होने जैसे संगीन केस दर्ज होने के बाद कोर्ट में चालान भी पेश हुआ था। इस प्रकरण में कोर्ट ने वर्ष 2007 में अपने फैसले में धारा 224 के तहत दोषी करार दिया गया था। इतना ही नहीं, इससे पहले सिंह के खिलाफ जानलेवा हमले का मामला भी दर्ज हुआ था और उसी में गिरफ्तारी भी हुई थी। बाड़मेर भाजपा जिलाध्यक्ष स्वरूपसिंह का यह मामला एक उदाहरण मात्र है। प्रदेश में लगभग सभी राजनीतिक दलों में ऐसे कई नेता और दावेदार हैं, जिनके खिलाफ एक या इससे कई ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज हो रखे हैं। ऐसे में भाजपा हो या कांग्रेस या कोई अन्य राजनीतिक दल, ऐसे उम्मीदवारों को टिकट देने से पहले आपराधिक पृष्ठभूमि को तो खंगालना ही पड़ेगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।

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