27.1 C
Jodhpur

#CBI: जबलपुर में करोड़ों का घोटाल कर जोधपुर आए सैन्य इंजीनियर के घर सीबीआई का छापा

पीएमओ पहुंची थी शिकायत, मिलिट्री ने करवाई थी जांच, फिर सीबीआई में दर्ज हुई पांच एफआईआर बिना काम हुए 18 फर्म के माध्यम से उठाए गए 16.24 करोड़ रुपए

spot_img

Published:

नारद जोधपुर। जबलपुर सैन्य इंजीनियरिंग सेवा MES से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों ने मध्यप्रदेश MP की 18 फर्मों के साथ मिलकर 16.24 करोड़ रुपए का घोटाला किया है। करोड़ों रुपए की इस हेराफेरी की शिकायत सीबीआई CBI के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी पहुंची थी। पीएमओ PMO से शिकायत मिलने के बाद मिलिट्री ने अपने स्तर पर मामले की जांच की तो घोटाला साबित हो गया। तब मामला सीबीआई में दर्ज करवाया गया। जबलपुर में तैनात तत्कालीन गैरीसन इंजीनियर बी.एम. वर्मा भी इसमें शामिल थे, जो अब जोधपुर में तैनात है। इनके बनाड़ रोड स्थित Militry मिलिट्री क्वार्टर पर पहुंच कर सीबीआई टीम ने कई तरह के दस्तावेज बरामद किए है।

सीबीआई में दर्ज एफआईआर के मुताबिक पूर्व गैरीसन इंजीनियर (जीई) वर्मा ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2022-23 तक रक्षा कार्यालयों, आवासीय परिसरों आदि में विभिन्न सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और संबंधित कार्यों के लिए निजी फर्मों को ठेके दिए। पहली एफआईआर में 14 फर्म के नाम है। इन्होंने बाजार में प्रचलित दरों से भी काफी कम दरों में कार्य करने की सहमति दी थी, जिसमें काम होना संभव ही नहीं था। इस घोटाले को अंजाम देने के लिए पहले काम तय किए गए, फिर निविदा, फिर कार्यादेश। काम दिखाने के लिए माप पुस्तिकाओं में फर्जी एंट्रियां की गई। सुपरवाइज करने वाले अधिकारियों ने भी कार्यों का सत्यापन किए बिना सीधे बिल पास कर दिए। इसको लेकर दर्ज हुई पांच एफआईआर में शामिल अधिकारियों व फर्म की जांच करने के लिए सीबीआई ने शुक्रवार को जबलपुर, जोधपुर, प्रयागराज और शिलांग में 12 स्थानों पर तलाशी ली है।

इन पर है भ्रष्टाचार का आरोप

पहली एफआईआर के 17 आरोपियों में पूर्व गैरीसन इंजीनियर (जीई) बीएम वर्मा, जीई धीरज कुमार, पूर्व सहायक जीई (एजीई) राजीव भारत, एजीई केएन विश्वकर्मा, जूनियर इंजीनियर रत्नेश कुमार त्रिपाठी, मुकेश तिवारी और मनोज कुमार शामिल हैं। एफआईआर में बिना काम पैसा उठाने वाली कंपनियाें शिवालिक इंजीनियरिंग वर्क्स, स्काईलाइन एनकॉन, रस्तोगी बिल्डर्स, आरके ट्रांसफॉर्मर्स, डायमंड इलेक्ट्रिकल, एके बिल्डर्स, मंगलम ट्रेडर्स, गौतम इलेक्ट्रिक वर्क्स और मेसर्स जितेंद्र सिंह के नाम हैं।

दूसरी एफआईआर के आरोपी अधिकारियों में से छह को उसी कार्यप्रणाली का पालन करके गुडलक एंटरप्राइजेज को कथित रूप से फायदा देने के लिए नामित किया गया है। कंपनी को कथित तौर पर ₹3.52 करोड़ का भुगतान किया गया था।

तीसरा मामला श्री कृष्णा ट्रेडर्स से संबंधित है, जिसे ₹4.57 करोड़ का भुगतान किया गया था, जबकि चौथा मामला एसके ट्रेडर्स से ₹2.03 करोड़ के “अवैध” भुगतान से संबंधित है। पांचवीं एफआईआर सोनल कंस्ट्रक्शन और अन्य के खिलाफ है और इसमें सरकारी खजाने को ₹2.17 करोड़ का कथित नुकसान शामिल है।

[bsa_pro_ad_space id=2]
spot_img
spot_img

सम्बंधित समाचार

Ad

spot_img

ताजा समाचार

spot_img
error: Content is protected !!