मारवाड़ के दो धुरंधरों के बीच पंजाब में रोमांचक मुकाबला

विधानसभा चुनाव के लिए गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भाजपा तो हरीश चौधरी ने संभाली कांग्रेस की बागडोर

पंजाब की धरा पर मारवाड़ के दो धुरंधरों के बीच रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत भाजपा से तो प्रदेश के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी कांग्रेस की तरफ से पंजाब विधानसभा चुनाव की बागडोर संभालेंगे। दोनों ने अपना राजनीतिक जीवन जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव से एक-दूसरे के सामने चुनाव लड़ शुरू किया। पहली बाजी हरीश चौधरी के नाम रही थी। अब देखने वाली बात होगी कि पंजाब में कौन बाजी मार पाएगा।
राजनीति में अपेक्षाकृत युवा माने जाने वाले हरीश व शेखावत अनुभव के मामले में कमोबेश एक समान ही है। हरीश वर्ष 2009 में बाड़मेर-जैसलमेर से सांसद रह चुके है। हालांकि वर्ष 2014 की मोदी लहर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। गत विधानसभा चुनाव में वे अपने पैतृक गांव बायतु से विधायक चुने गए। राहुल गांधी से नजदीकी के कारण कई वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर उन्हें मंत्री बनाया गया। दूसरी तरफ शेखावत ने वर्ष 2014 में पहला लोकसभा चुनाव लड़ा और सांसद बने। प्रधानमंत्री मोदी ने इस युवा नेता पर भरोसा जताया और कृषि राज्य मंत्री बना दिया। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उनका ओहदा बढ़ गया और वे नवगठित जलशक्ति मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री बना दिए गए। छात्र राजनीति में एक दूसरे के विरोधी रहे हरीश और शेखावत ने राजनीति में तेजी से आगे कदम बढ़ाए। अब दोनों किसी पहचान के मोहताज नहीं रहे।


पंजाब के विशेषज्ञ माने जाते है चौधरी
हरीश सात साल से पंजाब में पार्टी के सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभालते रहे है। ऐसे में उन्हें पंजाब की न केवल पूरी जानकारी है बल्कि वे वहां के छोटे-बड़े अधिकांश नेताओं से व्यक्तिगत तौर पर अच्छी तरह से वाकिफ है। गत विधानसभा चुनाव में मिले अनुभव का लाभ भी हरीश को मिलेगा। ऐसे में हरीश को अपेक्षाकृत कम मेहनत करनी पड़ेगी। वहीं राहुल गांधी का करीबी होने का लाभ उन्हें मिलेगा। वे अपनी बात को सीधे ऊपर तक पहुंचा सकते है। सोफ्ट स्पोकन हरीश विषम हालात को संभालने में माहिर माने जाते है। वे खुद कम बोलते हुए सामने वालों की बात को पूरी तस्सली के साथ सुनते है। ऐसे में लोग उनके कायल हो जाते है।


बंगाल की मेहनत का मिला लाभ

शेखावत के लिए पंजाब एकदम नया प्रदेश है। पार्टी ने पश्चिमी बंगाल विधानसभा चुनाव में शेखावत का बेहतरीन उपयोग लिया। शेखावत ने पश्चिमी बंगाल के विधानसभा चुनाव में जमकर अपनी भागीदारी निभाई। यह दीगर बात है कि वहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन पश्चिमी बंगाल में शेखावत की बेहतरीन क्षमताओं ने उन्हें पार्टी नेतृत्व की नजर में चढ़ा दिया। इसका लाभ उन्हें अब मिल रहा है। ऐसे में पार्टी ने अब उन्हें पंजाब का प्रभारी बना दिया। शेखावत की सबसे बड़ी खासियत यही है कि वे बेहद सहजता के साथ माहौल के अनुरूप स्वयं को ढाल लेते है। हमेशा संयमित रहते है। साथ ही गले लगा लोगों से मिलने का उनका तरीका सीधे लोगों के दिल में उतर जाता है।


पहली बाजी रही थी हरीश के नाम
वर्ष 1992 के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष पद के चुनाव में हरीश व शेखावत आमने-सामने थे। हरीश चुनाव जीत गए। हालांकि शेखावत भी पीछे नहीं रहे और अगले वर्ष वे भी छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव जीत गए। लेकिन दोनों के बीच मुकाबले का पहला चरण हरीश के नाम रहा था। अब दोनों नेता एक बार फिर पंजाब में आमने-सामने होंगे। समय ही बताएगा कि मारवाड़ के इन दो नेताओं में कौन अपने आप को इक्कीस साबित कर पाता है।

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