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भाजपा-कांग्रेस के दावेदार, दाव पेंच से पशोपेश में, इधर, मोदी-शाह तो उधर, गहलोत डाल रहे असमंजस में

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– भाजपा की पहली सूची से बड़े-बड़े दावेदारों की चिंता बढ़ी

– गहलोत ने राजनीतिक नियुक्तियों कर साधे एक तीर से कई निशाने

कमल वैष्णव. जोधपुर।

राजस्थान विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के साथ ही भाजपा (BJP) ने अपनी पहली सूची भी जारी कर दी। इस सूची ने कई दिग्गज नेताओं का भ्रम तोड़ दिया। वे नेता तो अब तक सदमे में हों, लेकिन शेष बची सीटों के दावेदार उनसे कई गुना ज्यादा टेंशन में आ गए हैं। मोदी-शाह (Modi – Shah) की जोड़ी तो चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए ही जानी जाती है, तो अब दावेदारों की नींद उड़नी भी स्वाभाविक है।

इसी तरह की स्थिति उत्पन्न कर दी है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने। टिकट दावेदारों की उलझन बढ़ी आचार संहिता लगने से पहले धड़ाधड़ हुई राजनीतिक नियुक्तियों से। इस फैसले ने हर किसी को चौंका दिया। इस सूची में एक चौंकाने वाला नाम मारवाड़ से है, जहां पिछले विस चुनाव में कांग्रेस (Congress) के टिकट पर चुनाव लड़ चुके प्रो. अयूब खान इस बार भी सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे थे।

सूरसागर: प्रमुख दावेदार के समर्थक ही नहीं, विरोधी भी हो रहे खुश

जोधपुर के तकरीबन हर कांग्रेसी नेता-कार्यकर्ता को यही अनुमान था कि इस बार भी सूरसागर विधानसभा क्षेत्र से प्रो. अयूब खान को ही टिकट मिलेगी, लेकिन इन्हें आरपीएससी में सदस्य नियुक्त करने का आदेश सामने आ गया। इस नियुक्ति से अयूब खान के समर्थक तो खुश हुए ही, साथ ही साथ विरोधियों ने भी चैन की सांस इसलिए ली, कि अब टिकट के लिए उनकी राह के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी मैदान से स्वत: ही हट गए हैं। अब सूरसागर का टिकट किसकी झोली में आएगा, दर्जनों दावेदारों में इसी की हौड़ लगी हुई है और वे हर स्तर पर जयपुर से दिल्ली तक अपनी जुगत बिठाने में लगे हुए हैं।

सूरसागर से भाजपा के दावेदार अब भी उलझन में

गहलोत का चौंकाने वाला फैसला तो आचार संहिता लगने वाले दिन सामने आया, वहीं भाजपा की ओर से कई दिनों पहले एक चौंकाने वाला फैसला आया था, जिसमें सूरसागर से दावेदारी की चर्चा में रहे भाजपा नेता नारायण पंचारिया को चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी थी। वहीं, सूरसागर विधानसभा क्षेत्र से सर्वाधिक दावेदारी हुई। वहीं, मौजूदा विधायक सूर्यकांता व्यास स्वघोषित उम्मीदवारी कर चुकी हैं। इसके साथ ही व्यास द्वारा सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तारीफों के पुल बांधकर अपनी ही पार्टी को अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी भी दे दी थी। पिछले चुनाव में भी व्यास को बहुत कम मार्जिन से जीत मिली थी। संभव है कि पार्टी इसे अनुशासनहीनता मान ले और टिकट किसी नए दावेदार की झोली में चला जाए। क्योंकि, व्यास के अलावा, प्रबल दावेदारों में हेमंत घोष, राजेंद्र पालीवाल, कमलेश पुरोहित, विकास शर्मा, पूर्व महापौर घनश्याम ओझा, पूर्व जिलाध्यक्ष देवेंद्र जोशी, गिरधारी वैष्णव, जगत नारायण जोशी, सहित कई अन्य कतार में हैं। इन सभी की उलझन बढ़ी है भाजपा की पहली सूची से। जिसमें कई चौंकाने वाले नाम सामने आए। अलग-अलग गुटों में बंटी प्रदेश भाजपा की इसमें कहीं सीधी दखल हो, ऐसा नजर नहीं आया। हालांकि, राजेंद्र राठौड़ के कई चहेतों को टिकट मिले हैं, जिससे अब बाकी दावेदार भी उसी खेमे में सेंध लगाने की जुगत में जुट चुके हैं। हालांकि, भाजपा के अंदरखाने चर्चाएं एक ऐसे नाम की भी है, जिन्होंने दावेदारी भले ही नहीं की हो, लेकिन वे संघ व भाजपा के नजदीकी माने जाते हैं।

संघ की नाराजगी पड़ सकती है भारी!

राजस्थान भाजपा के ज्यादातर दिग्गज नेताओं की पिछले कई महीनों से संघ पदाधिकारियों से नहीं बन रही है, ये जगजाहिर है। भाजपा की पहली सूची में कई संघ के नजदीकी माने जा रहे नेताओं को टिकट नहीं मिला। इससे हर तरफ यही चर्चा है कि संघ की नाराजगी कहीं भाजपा को भारी न पड़ जाए। हालांकि, भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने गत दिनों प्रदेश के सभी नेताओं की पंचायती को खत्म करके अपने तीन प्रतिनिधियों को ये जिम्मेदारी सौंपी थी कि सिर्फ वे ही संघ पदाधिकारियों से कर मुद्दे पर बात करेंगे।

#BJP-Congress contenders are in a tussle, on one side, Modi-Shah on the other side, Gehlot is in a dilemma.

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