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सरकारी स्कूल का आकर्षण ऐसा कि प्राइवेट स्कूलों वाले भी चकरा रहे हैं…यही हकीकत है आसोप की

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– बुलेट ट्रेन जैसा स्वरूप देने में भामाशाहों के साथ स्टाफ का भी रहा भरपूर सहयोग, बच्चे भी हो रहे रोमांचित

भोपालगढ़ से निर्मल मेहता की खास रिपोर्ट…

नारद भोपालगढ़। वो दिन लद गए, जब सरकारी स्कूल का नाम सुनते ही अच्छे परिवार के लोग मुंह फेर लेते थे, लेकिन अब जोधपुर जिले के आसोप की सरकारी स्कूल क्षेत्र की ही नहीं आसपास के कई गांवों की प्राइवेट स्कूलों को भी मात दे रही है। यहां के बच्चे कहने को भले ही सरकारी स्कूल के स्टूडेंट्स कहलाते हैं, लेकिन प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी ये स्कूल पसंद आ रहा है, क्योंकि यह स्कुल बुलेट ट्रेन जैसी नजर आती है। भामाशाहों के सहयोग से स्कूल को ऐसी पेंटिंग से निखारा गया है, कि हर कोई देखकर विस्मित सा नजर आता है।

आसोप कस्बे की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय को ये अनुठा स्वरूप प्रदान मिला प्रधानाचार्य रूपाराम शर्मा की पहल से। शर्मा की एक अपील पर क्षेत्र के अनेकों भामाशाह इस स्कूल के स्वरूप को निखारने के लिए तत्पर हो गए और फिर शुरू हुआ इस स्कूल को बुलेट ट्रेन का स्वरूप देने का प्रयास। जीर्ण प्राय: बिल्डिंग की मरम्मत का काम हो या पुराने दरवाजे, खिड़कियों की जगह पर मजबूत लोहे से बदलने का। स्कूल के स्टाफ मदनलाल देवड़ा, मंछाराम धौलिया, वाजिद अली, कंवरीलाल गोदारा, वंदना कुमार, सुशीला विश्नोई सहित अन्य ने एक टीम के रूप में कस्बे के आमजन से इस विकास कार्य के लिए सहयोग की अपील की, तो किसी ने भी इन्हें निराश नहीं किया।

सोशल मीडिया पर ग्रुप बना, तो बढ़-चढ़कर मिला सहयोग

स्कूल विकास के लिए ओमप्रकाश मेहरा की अगुवाई में सोशल मीडिया पर भी ग्रुप बनाय गया। इसमें महेंद्रसिंह बांता, श्यामसिंह, दिनेश कुमार जांगिड़, लाखाराम मेघवाल, रमेश कुमार संखवाया, महेन्द्र कुमार पुनड, राजुराम चंवेल आदि ने भामाशाहों से फोन पर संपर्क साधना शुरू किया। चंद दिनों में ही 3,31,800 रुपए की राशि एकत्र हो गई। सबसे पहले इस राशि से लोहे के दरवाजे व खिड़कियां बनवा दिए। इसके बाद सामान्य मरम्मत का काम पूरा कराया गया। स्कूल टीम के प्रयासों का देखते हुए वार्ड संख्या 10 की प्रेमदेवी प्रजापत पत्नी मंगलाराम ने एक दरवाजा अपनी तरफ से लगाया, तो सीताराम पुत्र मोहनराम लुहार नाडसर ने एक दरवाजा व खिड़की भेंट कर दी। इसके बाद नए स्वरूप का काम यानि पेंटिंग का कार्य शुरू किया पेंटर विनोद मेघवाल नाडसर की टीम ने। रूपाराम शर्मा के मागदर्शन में मंछाराम धौलिया व महेंद्र सिंह बांता ने तो गर्मी की छुटिटयों का त्याग कर अपना समय स्कूल को संवारने के इस कार्य का सुपरविजन करने में बिता दिया।

स्कूल बुलेट ट्रेन तो एनसीसी रूम हवाई जहाज बना

भामाशाहों व स्कूल स्टाफ के सहयोग से बिल्डिंग का नया रूप देखने को मिल रहा है। स्कूल बिल्डिंग जहां बुलेट ट्रेन से लग रही है, तो वहीं यहां के एनसीसी कैडेट्स के लिए बने कमरे को हवाई जहाज का डिजाइन दिया गया है। नए स्वरूप को जहां हर तरफ तारीफ हा रही है, वहीं यहां पढ़ने पहुंचने वाले बच्चे भी रोमांचित नजर आ रहे हैं।

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