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संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए किया बछ-बारस व्रत, विधिवत किया गाै पूजन

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नारद लूणी। बछ बारस का पर्व श्रद्धा से मनाया गया। इस पर्व के मौके पर महिलाओं ने गाय और बछड़े का पूजन किया। अपनी संतान और परिवार में सुख समृद्धि की कामना की। गोशालाओं और मंदिरों में इस दिन महिलाओं की भीड़ रही है। जिन घरों में गाय हैं वहां पर भी आज महिलाएं पूजा अर्चना कर रही हैं। पर्व के मौके पर व्रत धारी महिलाएं थाली को विशेष रूप से सजाकर लाई। जिसमें अक्षत, कुमकुम, चंदन, अबीर, गुलाल, मेहंदी आदि पूजन सामग्री आदि शामिल रही। महिलाओं ने गाय और बछड़े का माला पहनकर पवित्र जल अर्पित किया। बाद में गुलाल अबीर कुमकुम आदि पूजन सामग्रियों से पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि और अपने पुत्र के दीर्घायु की कामना भी की। व्रत धारी महिलाओं ने पूजन कर बछड़े की आरती भी उतारी। अपने पुत्र की भांति बछड़े का पल्लू से हवा कर दुलार भी किया। पूजन के बाद महिलाओं ने व्रत की पौराणिक कथा सुनी।

इस पर्व के दिन महिलाएं चाकू से कटी हुई वस्तुओं और गाय के दूध से बने उत्पादों का प्रयोग नहीं करती हैं। इसके स्थान पर बाजारा या मक्का से बनी खाद्य वस्तुओं को काम में लिया जाता है। पूजा करने आई महिलओं ने बताया कि आज गाय और बछड़े की पूजा कर उन्होंने सुख समृद्धि और अपने पुत्र के लंबी आयु की कामना की। घर में आज के दिन मक्का और जवार से बने आटे की रोटी और अन्य चीज काम में लेते हैं। गेहूं का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। व्रती महिला महिलाओं ने बताया कि आज के दिन महिलाएं अपनी संतान के लिए विधि विधान से पूजा अर्चना कर संतान की लंबी आयु की कामना करती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूजा अर्चना करने से संतान की आयु लंबी होती है। यही वजह है की माताएं आज यहां पहुंची है। महिलाएं व्रत रखती है और कहानी सुनकर व्रत खोलती है। इधर पर्व के मौके पर घरों में आज विशेष तौर पर बाजरे की रोटी और अंकुरित अनाज की सब्जी बनाई गई। इस दिन गाय के दूध की जगह भैंस या बकरी के दूध का प्रयोग किया गया।

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