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राजस्थान में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया से घबराहट किसे है ?

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राजस्थान में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की खामोशी से प्रदेश के बीजेपी नेता डरे हुए है।  बीजेपी के बड़े नेता खुलकर बोलने से बच रहे है। बीजेपी प्रदेश भर में जन आक्रोश रैली निकाल रही है, लेकिन वसुंधरा राजे दूरी बनाए हुए है। रैली में सबसे ज्यादा सक्रिय प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और प्रभारी अरुण सिंह गहलोत सरकार को निशाने पर ले रहे है। वसुंधरा राजे की खामोशी से बड़े नेता चिंतित है। हालांकि, वसुंधरा राजे की दूरी पर सतीश पूनिया और अरुण सिंह का कहना है कि पारिवारिक कारणों की वजह से ज्यादा सक्रिय नहीं है। गुटबाजी जैसी कोई बात नहीं है। बता दें, वसुंधरा राजे समर्थक लगातार सीएम चेहरा घोषित करने की मांग कर रहे हैं। सीएम फेस को लेकर पूनिया और अरुण सिंह का कहना है कि विधानसभा चुनाव पीएम मोदी के चेहरे पर ही लड़ा जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वसुंधरा राजे की नाराजगी की वजह सीएम फेस घोषित नहीं करना हो सकता है। विधानसभा चुनाव से पहले वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को साधने का तरीका खोज रही है। पार्टी का मानना है कि राज्य में पार्टी की एकजुटता को लेकर कार्यकर्ताओं में संशय और लोगों के बीच सवाल नहीं उठे। 

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव जीतने के लिए पार्टी नेतृ्त्व वसुंधरा राजे को नाराज नहीं करना चाहता है। पार्टी आलाकमान विकल्प भी तलाश रहा है। फिलहाल 3 विकल्पों पर पार्टी मंथन कर रही है। पार्टी वसुंधरा को प्रदेश अध्यक्ष बना कर चुनाव लड़े। उन्हें येदियुरप्पा की तरह पूर्व निर्धारित शर्तों के साथ सीएम प्रोजेक्ट कर दे। कैंपेन कमेटी का मुखिया बना कर पार्टी सामूहिक नेतृत्व में लड़े।  राजस्थान की राजनीति में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और सतीश पूनिया को वसुंधरा राजे का धुर विरोधी माना जाता है। वसुंधरा राजे अपनी अनदेखी से नाराज बताई जा रही है। खुद वसुंधरा राजे ने पिछले साल बीकानेर के नोखा, देशनोक और बीकानेर शहर में रैलियों को संबोधित करते हुए अपना दर्द भी बयां किया था। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा था- मेरा कोई भी काम सीधे-सीधे नहीं होता, संघर्ष करना पड़ता है। राजे के बयान से साफ जाहिर है कि वह अपनी अनदेखी से नाराज है। हालांकि, वसुंधरा राजे ने जयपुर में प्रेस वार्ता में साफ कर दिया था कि सीएम फेस को लेकर पार्टी का संसदीय बोर्ड जो निर्णय लेगा, वह सभी को मान्य होगा। 

राजस्थान में की राजनीति में पिछले करीब 25 साल से दो नेता ही छाए हुए है। बीजेपी में वसुंधरा राजे औऱ कांग्रेस में अशोक गहलोत। दोनों ही नेता सत्ता परिवर्तन होने पर सीएम बने है। सीएम गहलोत तीसरी बार राज्य के सीएम बने है। जबकि वसुंधरा दो बार सीएम रह चुकी हैं। प्रदेस में साल के अंत में चुनाव होने है। वसुंधरा समर्थकों का कहना है कि सिर्फ वसुंधरा राजे के नेतृत्व में सत्ता मिल सकती है। वसुंधरा राजे 36 कौम की नेता है। समाज के सभी वर्गों का समर्थन मिलता रहा है। वसुंधरा समर्थक माने जाने वाले बीजेपी नेता भवानी सिंह राजावत खुलकर वसुंधरा राजे को सीएम बनाने की मांग कर चुके है। वसुंधरा के विरोधी माने जाने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत परदे के पीछे वसुंधरा के नाम का विरोध करते रहे है। इसलिए शेखावत बार-बार कहते रहे हैं कि पीएम मोदी के चेहरे के आधार पर ही विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा। वसुंधरा समर्थक इसे अपने ऊपर कटाक्ष करना मानते है।

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