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सचिन पायलट ने वसुंधरा राजे को दे दिया दर्द? विरोधी धड़ा हुआ एक्टिव

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राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को सीएम फेस के लिए झटका लग सकता है। सचिन पायलट ने जो मुद्दा उठाया उससे भाजपा की सेकंड लाइन काफी खुश है। साथ ही मान रही है कि इन आरोपों के बाद शायद वसुंधरा राजे का तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा नहीं होगा। यदि भाजपा सत्ता में आती है तब शायद सेकंड लाइन में से ही किसी नेता को मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य मिले। पायलट के आरोप के बाद वसुंधर राजे का धुर विरोधी धड़ा एक्टिव हो गया है। वसुंधरा विरोधी गुट के नेता पहले से ही सीएम फेस घोषित करने का विरोध कर रहे थे, अब पायलट के आरोपों का सहारा लेकर हमले तेज कर सकते हैं। 

बता दें, बीते 4 साल से वसुंधरा राजे अपनी ही पार्टी में चुनौतियां का सामना कर रही है। हर बार लगता रहा कि वह उन चुनौतियों से पार पा लेगी, लेकिन इस बार सचिन पायलट ने जो आरोप लगाए गए हैं वे सीधे-सीधे भ्रष्टाचार और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ मिलीभगत होने से जुड़े हैं. ऐसे में पायलट के सवालों ने अपनी सरकार के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। ऐसे में जहां प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी और नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ को बनाए जाने के बाद राजस्थान में अब वसुंधरा राजे के हाथ चुनाव अभियान समिति की बागडोर देने की बात चल रही थी उसमें निश्चित तौर पर झटका लग सकता है। हालांकि बीजेपी आलाकमान अभी तक पीएम मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ने के संकेत देता रहा है। लेकिन वसुंधरा कैंप के नेता राजे को  ही सीएम फेस घोषित करने की मांग कर रहे हैं। बता दें राजस्थान की राजनीति में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन मेघवाल और पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया वसुंधरा राजे को सीएम फेस बनाने का विरोध करते रहे हैं। इन नेताओं का कहना है कि पीएम मोदी के चेहरे पर ही विधानसभा चुनाव लड़ा जाए। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वसुंधरा राजे से सचिन पायलट की नाराजगी वजह बगावत से जुड़ी है। दरअसल, पायलट ने वर्ष 2020 में बगावत की थी। पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ गुड़गांव के एक होटल में ठहरे हुए थे। पायलट कैंप को उम्मीद थी बीजेपी की मदद मिलेगी। लेकिन ऐसा कहा जाता है कि वसुंधरा राजे की नाराजगी की वजह से बीजेपी आलाकमान ने पायलट से दूरी बनाए रखना ही उचित समझा। गाहें-बगाहें पायलट कैंप के नेता गहलोत सरकार को गिराने से बचाने के लिए वसुंधरा राजे को जिम्मेदार मानते रहे हैं। पायलट कैंप तभी से खुंदक खाया हुआ है। पायलट ने एक दिन का अनशन पर गहलोत और वसुंधरा राजे के निशाने पर लिया है। दोनों ही नेता पायलट के धुर विरोधी माने जाते हैं।

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