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वसुंधरा-किरोड़ी की सियासी जुगलबंदी, निशाने पर कौन? गहलोत या पूनिया

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राजस्थान में चुनाव से पहले पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और बीजेपी सांसद किरोड़ी लाल मीना सियासी जुगलबंदी के अल-अलग सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। बता दें,राजस्थान में पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच के मामले में बीजेपी सांसद किरोड़ी लाल मीना को वसुंधरा राजे का साथ मिला था। राजे ने ट्वीट कर कहा- किरोड़ी लाल अकेले नहीं है। हम सब उनके साथ है। किरोड़ी लाल वसुंधरा राजे के धुर विरोधी माने जाते हैं। किरोड़ी लाल का समर्थन करने के अलग-अलग सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। जबकि सतीश पूनिया ने किरोड़ी लाल को झटका दे दिया। पूनिया ने किरोड़ी लाल के धरने से दूरी बना ली। किरोड़ी समर्थकों का तो यह भी कहना है कि पीएम मोदी की 12 फरवरी को होने वाली जनसभा के लिए स्थार परिवर्तन पूनिया और जसकौर मीना के कहने पर किया गया है। हालांकि, पूरे सियासी घटनाक्रम पर सतीश पूनिया चुप्पी साधे हुए है। 

बता दें गहलोत सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे BJP सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने आंदोलन स्थगित कर दिया था। किरोड़ी ने अपनी ही पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा- पूनिया मुझसे मिलने आए थे। कहा था कि युवा मोर्चा प्रदेशभर में विरोध-प्रदर्शन करेगा। एक भी जगह आंदोलन नहीं हुआ।उन्होंने कहा- जिस मुद्दे पर सतीश पूनिया के नेतृत्व में BJP को खड़ा होना था। मुझे दुख है, उस मजबूती से पूनिया और बीजेपी खड़ी नहीं हुई। पूनिया के पास राजस्थान बीजेपी की जिम्मेदारी है। वह पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष है। इस मामले पर बिल्कुल भी आक्रामक नजर नहीं आए। इस मामले पर मैंने आला नेताओं से भी बात की है। आरोपों काे लेकर पूनिया कुछ नहीं बोले। सरकार के खिलाफ किरोड़ी ने मोर्चा खोल रखा था। जो पिछले 12 दिनों से जयपुर के आगरा रोड पर धरना दे रहे थे। शनिवार को मीणा अपने समर्थकों के साथ जयपुर के शहीद स्मारक के लिए रवाना हुए थे।

राजस्थान में 2023 के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। सतीश पूनिया और गजेंद्र सिंह शेखावत को वसुंधरा राजे का धुर विरोधी माना जाता है। वसुंधरा राजे ने पेपर लीक के मामले में खुलकर किरोड़ी लाल का साथ दिया है। जबकि सतीश पूनिया ने किरोड़ी के धरने से दूरी बना ली थी। किरोड़ी लाल के समर्थकों का आरोप है कि सतीश पूनिया किरोड़ी के बढ़ते प्रभाव से डरे हुए है। इसलिए पेपर लीक के मामले में किरोड़ी का साथ नहीं दिया। वसुंधरा राजे ने किरोड़ी लाल का साथ दिया। जबकि दोनों की राजनीतिक अदावत जगजाहिर रही है। जानकारों का कहना है कि पीएम मोदी की 12 फरवरी को दौसा में होने वाली जनसभा में ईआरसीपी की मांग तेजी से उठ सकती है। बता दें, सीएम फेस को लेकर राजस्थान भाजपा में सियासी खींचतान जारी है। सतीश पूनिया सीएम फेस का विरोध करते रहे हैं। पूनिया का कहना है कि पीएम मोदी के चेहरे पर ही विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा। 

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