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राजस्थान भाजपा: वसुंधरा राजे या गजेंद्र सिंह शेखावत? कौन होगा CM फेस

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राजस्थान भाजपा नेतृत्व के संकट के जूझ रही है। विधानसभा चुनाव 2023 के अंत में होने हैं। ऐसे संकेत है कि पार्टी बिना सीएम फेस के चुनाव में उतरेगी। वजह यह है कि नेतृत्व का संकट है। मुश्किलों को हल भी नहीं दिख रहा है। बीजीपे प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का कहना है कि चुनाव में पीएम मोदी का चेहरा जनता के सामने होगा। पार्टी के चुनाव चिन्ह कमल के निशान और पीएम मोदी के चेहरे पर ही विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा। सीएम फेस को लेकर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और वरिष्ठ नेता ओम माथुर प्रमुख के बीच खींचतान जगजाहिर है। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी विधानसभा चुनाव 2023 बिना सीएम फेस के ही लड़ेगी। बता दें, राजस्थान में लंबे समय से वसुंधर राजे को सीएम फेस घोषित करने की मांग उठती रही है। वसुंधरा समर्थक नेताओं का कहना है कि वसुंधरा राजे की समाज के सभी वर्गों में पकड़ है, इसलिए उन्हें सीएम फेस घोषित किया जाए। हालांकि, प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह और प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का कहना है कि  सीएम कौन होगा, इसका निर्णय संसदीय बोर्ड तय करेगा। 

ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति 16 और 17 जनवरी को दिल्ली में होने वाली बैठक में राजस्थान पर चर्चा हो सकती है। सूत्रों की माने तो राजस्थान में प्रदेश नेताओं में चल रही सियासी खींचतान शिकायतें लगातार पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पास पहुंची रही है। पार्टी आलाकमान गुटबाजी से नाराज भी बताया जा रहा है। पिछले साल पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राजस्थान बीजेपी के नेताओं को गुटबाजी से दूर रहने की नसीहत भी दी थी, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ है। हाल ही में उपचुनाव और जन आक्रोश यात्रा में जिस तरह से गुटबाजी खुलकर सामने आई , उसके बाद पार्टी शीर्ष नेतृत्व काफी नाराज बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बैठक में प्रदेश के नेताओं को कड़ा संदेश दिया जा सकता है। क्योंकि पहले ही बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदेश के नेताओं को कड़ा संदेश देते हुए कहा था कि 2023 में होने वाले चुनाव में सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चेहरा होंगे। प्रदेश के किसी भी नेता के चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ा जाएगा। दरअसल पिछली कार्यसमिति की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृह मंत्री ने एक जुटता के साथ काम करने की निर्देश देने के बावजूद भी लगातार उपचुनाव और जन आक्रोश यात्रा में गुटबाजी खुलकर सामने आई है। यहीं वजह है कि बीजेपी विधानसभा उपचुनाव में हारी है। 

राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया का कार्यकाल दिसंबर में पूरा हो चुका है। माना यही जा रहा है कि पूनिया पद पर बने रहेंगे। चर्चा यह भी है कि गुटबाजी दूर करने के लिए पार्टी आलाकमान पूनिया की जगह किसी अन्य नेता को पार्टी की कमान सौंपने पर बैठक में मंथन कर सकता है। बता दें, वसुंधरा राजे कैंप पूनिया का कार्यकाल बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। सरदारशहर उपचुनाव और जन आक्रोश यात्रा में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पूरी तरीके से दूर रही हैं।  ऐसा माना जा रहा है कि वसुंधरा राज्य में की दूरी की वजह से सरदारशहर उपचुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। वही वसुंधरा की गैरमौजूदगी के चलते जनाक्रोश की यात्रा में ही भीड़ नहीं जुट पाई है। जयपुर में कुर्सियां खाली रह गई। प्रदेश बीजेपी में लीडरशिप को लेकर चल रही खींचतान के बीच प्रदेश के कार्यकर्ता और नेता भी बंटे हुए है। दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय कार्य समिति में राजस्थान से बीजेपी प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह, सहप्रभारी विजया राहटकर और प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, ओमप्रकाश माथुर छत्तीसगढ़ प्रभारी और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे राष्ट्रीय मंत्री अलका गुर्जर, केंद्रीय मंत्री शेखावत, केंद्रीय मंत्री मेघवाल शामिल हो सकते हैं।

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