37.4 C
Jodhpur

बीजेपी के करीब जा रहे हैं सचिन पायलट? रैलियों के दौरान नरम तेवर से मिल रहे संकेत

spot_img

Published:

पायलट ने अपनी रैलियों के समय को अच्छी तरह से काम किया है। वह 23 जनवरी से शुरू होने वाले राज्य के बजट सत्र के लिए एजेंडा सेट करना चाहते हैं। पहली दो रैलियों के दौरान अशोक गहलोत का चिंतन शिविर था।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ जारी वर्चस्व की लड़ाई के बीच कांग्रेस नेता सचिन पायलट अपने वफादार मंत्रियों और विधायकों के साथ रैलियां करना शुरू कर दिया है। उनके इस कदम ने राजस्थानी के सियासी गलियारों की सरगर्मी बढ़ा दी है। उनके इस कदम को अगले विधानसभा चुनाव से पहले खुद को मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार बनाने की दिशा में एक कोशिश की तरह देखा जा रहा है। हालांकि, उनके तेवर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। रैलियों को दौरान वह बीजेपी से अधिक अपनी ही सरकार को घेरते नजर आते हैं।

कांग्रेस आलाकमान की ओर से अभी तक इस बात पर कुछ भी नहीं कहा गया है कि क्या उसने पायलट को रैलियों की इजाजत दी है या नहीं। आलाकमान की चुप्पी ने राजस्थान के सियासी गलियारों को चर्चा करने और कयास लगाने का मौका दे दिया है। आपको बता दें कि कांग्रेस को इसी वर्चस्व की लड़ाई के कारण पंजाब में अपनी सरकार गवानी पड़ गई थी। पंजाब में कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी जैसे कमजोर नेता को अमरिंदर सिंह की जगह मुख्यमंत्री बनाया था। पंजाब प्रकरण से सीख लेते हुए आलाकमान शायद अशोक गहलोत के साथ ही चलने का फैसला किया है। सचिन पायलट को अब अपने आधार वोट को बढ़ाने की आवश्यक्ता दिखने लगी है।

सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि अशोक गहलोत रिटायर अधिकारियों को उनके पदों पर फिर से नियुक्त कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत उन अधिकारियों का उपकार कर रहे हैं जिन्होंने उन्हें बचाए रखने में मदद की है।

[bsa_pro_ad_space id=2]
spot_img
spot_img

सम्बंधित समाचार

Ad

spot_img

ताजा समाचार

spot_img
error: Content is protected !!