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‘बकवास’, नहीं थम रहा रामचरितमानस को लेकर विवाद, RJD नेता के बाद सपा MLC ने की प्रतिबंध लगाने की मांग

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 बिहार के शिक्षामंत्री चंद्रशेखर का रामचरितमानस पर आपत्तिजनक बयान के बाद अब समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान को लेकर विवाद छिड़ गया है. सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, ‘रामचरितमानस में खुलकर दलितों और महिलाओं के बारें में अपमानजनक बातें लिखी हुई है. करोड़ों लोग इसे नहीं पढ़ते हैं. यह ग्रंथ बकवास है इसलिए सरकार को इसपर प्रतिबंध लगाना चाहिए.’

स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान के बाद दूसरे पार्टियों ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधना शुरू कर दिया. कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद ने ट्वीट किया, ‘प्रतिबंध इस तरह की “घटिया” और बेहूदी “बयानबाज़ी” करने वाले मूर्धन्य नेताओं पर लगना चाहिए, जो रोज़ हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं का “अपमान” करने को ही अपनी बहादुरी समझते हैं.’

वहीं सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरुण राजभर ने ट्वीट कर कहा, ‘सपा के MLC स्वामी प्रसाद मौर्य जी “श्रीरामचरितमानस” को प्रतिबंधित की बात कर रहे है, बेटी भाजपा से सांसद है क्या बेटी भी सहमत है? याद है सपा के ही एक नेता ने श्रीराम जी को काल्पनिक बताया था तो श्री अखिलेश यादव जी पार्टी से निष्कासित कर दिये थे,क्या अब इनको भी बाहर का रास्ता दिखाएंगे.’

बेटी बीजेपी सांसद

सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य बदायूं से बीजेपी सांसद हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य पिछले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में ही थे लेकिन चुनाव से पहले उन्होंने सपा का दामन थाम लिया. सपा की ओर से उन्होंने विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था लेकिन वे चुनाव हार गए. बाद में सपा ने उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया. 

अब स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी से यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या एक बीजेपी सांसद होने के कारण वो अपने पिता के बयान से इत्तेफाक रखती हैं.

सनातन का अपमान, सपा का काम 

उत्तरप्रदेश के भाजपा प्रमुख भूपेंद्र सिंह चौधरी ने इसको लेकर समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘तुष्टिकरण की राजनीति के लिए सनातन संस्कृति का अपमान अब सपा का रिवाज बन गया है. “विनाश काले विपरीत बुद्धि” की कथा को चरितार्थ कर रहे स्वामी प्रसाद मौर्य को अपने पूरे होश में श्री रामचरितमानस को पढ़ना चाहिए और करोड़ों रामभक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाने के लिए माफी मांगनी चाहिए.’

उन्होंने आगे कहा, ‘समाजवादी पार्टी का इतिहास हमेशा से सनातन संस्कृति का अपमान करना रहा है, चाहे वो कांवड़ यात्रा पर रहा हो, धार्मिक स्थानों पर हमले का मामला रहा हो या प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या में निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलवाने का मामला रहा हो. समाजवादी पार्टी हमेशा से देश विरोधी और समाज विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रही है. इनका चरित्र प्रदेश की जनता अब जान चुकी है और समझ चुकी है. ओछी राजनीति और ओछी बयानबाजी ही इनके पास बची है.’

कहां से शुरू हुआ मामला

रामचरितमानस को लेकर विवाद बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के एक बयान के बाद शुरू हुआ. उन्होंने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था, ‘एक युग में मनुस्मृति, दूसरे युग में रामचरितमानस, तीसरे युग में गुरु गोलवलकर का बंच ऑफ थॉट्स, ये सभी देश और समाज को नफ़रत में बांटते हैं. इसने 85 प्रतिशत आबादी को पिछड़े रखने की दिशा में काम किया है. इसे मनुस्मृति की तरह जलाया जाना चाहिए, क्योंकि यह समाज में जाति विभाजन को बढ़ावा देता है.’

शिक्षा मंत्री के बयान के बाद दूसरी पार्टियों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया. हालांकि बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपने पार्टी के नेता से साथ खड़े नजरे आए. तेजस्वी ने कहा कि लोकतंत्र में सबको बोलने का अधिकार है.

बाद में चंद्रशेखर ने दोबारा ट्वीट कर कहा, ‘मेरे बयान के बाद से ठेकेदारों के पेट में मरोड़ आ रही है. अरे वे परेशान होंगे ही. उन्होंने तो मंदिरों से ख़ूब माल छापे है. सवाल दलितों-वंचितों का है जिन्हें तुम मंदिर में घुसने से रोकते हो! एक कहावत भी है न-लोहे का स्वाद लोहार से मत पूछो, उस घोड़े से पूछो जिसके मुँह में लगाम है.’



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