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पायलट का ये दांव चल गया तो बढ़ेगी गहलोत की मुश्किल, जानें 3 बड़े कारण

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राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट पांच जिलों में किसान सम्मेलन करने के बाद अगली रणनीति पर काम कर रहे है। पायलट समर्थक एक बार फिर जिलों का दौरा करने की योजना बना रहे हैं। इस बार पायलट का दौरा गुर्जर बाहुल्य इलाकों होने की संभावना है। पायलट युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं। गुर्जर वोट बैंक पर अच्छी पकड़ रखते हैं। कांग्रेस आलाकमान उनकी छवि का इस्तेमाल कर चुनावों में फायदा लेता रहा है। लेकिन इस बार हालत बदले हुए है। सीएम नहीं बनाए जाने से पायलट समर्थक नाराज है। नाराज पायलट समर्थक इस बार कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते है। वर्ष 2018 में बीजेपी को सत्ता से बाहर करने में गुर्जरों का अहम रोल रहा था। बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में 9 गुर्जरों को टिकट दिया था लेकिन उसका एक भी प्रत्याशी जीत दर्ज करने में सफल नहीं रहा। वहीं कांग्रेस ने 12 गुर्जर प्रत्याशियों को टिकट दिए जिनमें से 7 जीतने में सफल रहे थे।

कांग्रेस ने 2018 के चुनाव में सचिन पायलट संभावित चेहरे के तौर पर पेश किया था। चुनाव  में कांग्रेस को सफलता मिली। गुर्जर बाहुल इलाकों में कांग्रेस को बंपर जीत मिली थी। लेकिन कांग्रेस ने पायलट को सीएम नहीं बनाकर अशोक गहलोत को बना दिया। इससे गुर्जर नाराज बताए जा रहे हैं। पायलट ने प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर पांच साल तक काम किया था। गुर्जर समाज में उनका बड़ा प्रभाव है। यही कारण है कि कांग्रेस में सबसे अधिक गुर्जर विधायक जीते हैं। वहीं भाजपा में एक की भी जीत नहीं हो पाई है। पिछले चुनाव में गुर्जर आरक्षण को लेकर बीजेपी के प्रति नाराजगी थी। लेकिन इस बार बीजेपी ने गुर्जरों को साधने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान के भीलवाड़ा में 28 जनवरी को एक कार्यक्रम में शामिल होने आएंगे। प्रधानमंत्री मोदी गुर्जर समुदाय के लोगों के पवित्र स्थान भगवान देवनारायण के प्राकट्य स्थल भीलवाड़ा जिले के मालासेरी डूंगरी में कार्यक्रम में भाग लेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चार साल तक बीजेपी प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर पैदा नहीं कर पाई। लेकिन पेपर लीक मामले को लेकर युवा कांग्रेस नाराज है। प्रदेश में एक दर्जन से अधिक पेपर लीक हुए है। बीजेपी ने गहलोत सरकार के खिलाफ जन आक्रोश रैली का आयोजन किया है। लेकिन पार्टी के बड़े नेताओं की गुटबाजी और खींचतान की वजह से जमीनी स्तर पर सत्ता विरोधी लहर पैदा नहीं हो पाई है। सीएम गहलोत का दांवा है कि प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर नहीं है। पुरानी पेंशन योजना बहाली औऱ फ्री मेडिकल सुविधाओं के सहारे सरकार सत्ता में वापसी करेगी। हालांकि, जानकार मानते हैं कि राजस्थान विधान सभा चुनाव में मंत्रियों के जिलों में इस बार एंटी इनकम्बेंसी दिखेगी। बीजेपी इस समय गांव-गांव में वोटर तक पहुंचने की रणनीति पर भी काम कर रही है। 

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