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पायलट कह रहे राजस्थान में सरकार रिपीट होगी, पर पेपर लीक का जिक क्यों  

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राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट का कहना है कि राहुल गांधी और प्रियंका की तरह वह भी प्रदेश में सरकार रिपीट करने के  लिए काम कर रहे हैं। लेकिन इसके उलट पायलट अपनी हर सभा और प्रेस वार्ता में पेपर लीक का मुद्दा जोर शोर से उठा रहे हैं। पेपर लीक मुद्दा उठाने पर गहलोत कैंप के नेता नाराज है। गहलोत कैंप के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं छापने की शर्ता पर कहा कि पायलट बीजेपी की भाषा बोल रहे हैं। पायलट खुद नहीं चाहते हैं कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बने। पायलट चाहते है कि कांग्रेस की वापसी हो तो फिर पुरानी पेंशन स्कीम  बहाली समेत सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का जिक्र क्यों नहीं करते हैं?  पायलट सरकार की खामिया गिनाने के लिए किसान सम्मेलन कर रहे हैं। माना जा रहा है कि पायलट की बयानबाजी के बाद एक बार फिर गहलोत और पायलट कैंप के बीच खींचतान बढ़ सकती है।

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बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने पायलट के भाषण के वीडियो को ट्वीट कर लिखा, ‘हम बोलेगा तो बोलोगे के बोलता है, पर जरा अपनों की भी तो सुनो।’  सचिन पायलट के पेपर लीक दलालों की बजाय सरगनाओं को पकड़ने की मांग का सीएम गहलोत ने जवाब भी दिया है। सीएम गहलोत ने कहा कि पेपर लीक मामले में जो कार्रवाई की है, वे सभी सरगना ही है। जिसके पास कोई अधिकारी या नेता के शामिल होने के सबूत है तो वह नाम बता दें, हम कार्रवाई करेंगे। बता दें सीएम गहलोत ने कहा कि पेपर लीक मामले में नेता और अधिकारी की कोई भूमिका नहीं है। पायलट ने एक बार फिर पेपर लीक मामले में नेता या अधिकारी के लिप्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क देते हुए सरकार से सवाल किया कि बिना किसी की लिप्तता के प्रश्न पत्र तिजोरी से बाहर कैसे पहुंचा? पायलट ने कहा कि प्रदेश में पेपर लीक हो रहे हैं और कहा जा रहा है कि कोई अधिकारी या कोई नेता इसमें लिप्त नहीं था। उन्होंने कहा कि एग्जाम की कॉपी तिजोरी में बंद होती है, वो कॉपी तिजोरी में बंद होकर बाहर बच्चों तक पहुंच गई। यह तो जादूगरी हो गई। ऐसा संभव नहीं है, कोई न कोई तो जिम्मेदार होगा।

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राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पेपर लीक के मुद्दे पर बीजेपी का सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन थम सा गया है। लेकिन पायलट जिस तरह से पेपर लीक के मुद्दे उठा रहे हैं। यह सुसाइड करने जैसा है। पायलट बीजेपी को हमला करने के लिए उकसा रहे हैं। पायलट सरकार की उपलब्धियों के बजाय खामिया जनता को बता रहे हैं। जिस तरह से पायलट पेपर लीक का मुद्दा उठा रहे हैं, उससे सरकार की परेशानी बढ़ सकती है। गहलोत-पायलट कैंप में एक बार फिर से बयानबाजी का दौरा शुरू हो सकता है। चुनाव से पहले दोनों खेमों की बयानबाजी पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। राजनीतिक विशलेषकों का कहना है कि गहलोत सरकार ने पुरानी पेंशन स्कीम बहाली का नया प्रयोग किया है, जिसे कई राज्यों ने अपनाया भी है, लेकिन पायलट ओपीएस और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजानाओं का जिक्र करने से बच रहे है। पेपर लीक के मुद्दे को हवा दे रहे हैं।

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