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पागलपन की हद जरूरी, CM अशोक गहलोत ने खुद बताया कामयाब होने का फॉर्मूला

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भारतीय राजनीति में ‘जादूगर’ के नाम से मकबूलियत पाए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अक्सर अपने बयानों के चलते चर्चा में बने रहते हैं। इस साल के अंत तक राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने की उम्मीद जताई जा रही है। सूबे में कांग्रेस की सरकार है। राजस्थान कांग्रेस अंदरुनी कलह से परेशान है। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच का मनमुटाव जगजाहिर है। ऐसे में चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अशोक गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि कामयाब होने के लिए क्या करना होता है।

पागलपन जरूरी
राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा, ‘पागलपन की हद तक राजनीति नहीं करो, पागलपन की हद तक अपना काम-धंधा नहीं करो, पागलपन की हद तक आप व्यापार नहीं करो या पागलपन की हद तक आप पत्रकारिता नहीं करो तब तक आप कामयाब नहीं हो सकते। इसलिए उसके लिए पागल बनना पड़ता है।’

मेरी राजनीति गांधी की तरह
सीएम अशोक गहलोत ने कहा, ‘राजस्थान में सत्ता विरोधी लहर नहीं है। मेरी अंतरआत्मा कह रही है कि इस बार सरकार रिपीट होगी। मुझे उम्मीद है कि पार्टी में एकता रहेगी। सब लोग समझ जाएंगे। मैं सेवा की राजनीति करता हूं। मेरी राजनीति गांधी जी की तरह रचनात्मक है। इस बार मोदी लहर नहीं है।’

गहलोत-पायलट में सब ठीक?
अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच का मनमुटाव जगजाहिर है। दोनों एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर सुर्खियों में बने रहते हैं। बीते दिनों गहलोत ने पायलट को ‘बड़ा कोरोना’ और ‘गद्दार’ तक कह दिया था। बता दें कि पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के समर्थकों का ये कहना है कि राजस्थान में साल 2018 में कांग्रेस की जीत पायलट की मेहनत की वजह से ही हुई थी। इसके लिए वो पायलट को सीएम बनाने की मांग करते रहे हैं। गहलोत का ये बयान पायलट समर्थकों को जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। गहलोत ने कहा, ‘साल 1998 में कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस पार्टी को 156 सीटें मिली थी। हम मिशन 156 पर काम कर रहे हैं।’

मिशन 156 क्या है?
राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि पार्टी में एकता रहेगी। सब लोग समझ जाएंगे। हम सब मिलकर मैदान में उतरेंगे। मिशन 156 लागू होगा। चार साल में सरकार विरोधी लहर नहीं है।’ गहलोत के इस बयान के बाद ये अनुमान लगाया जा रहा है कि गहलोत पायलट को साथ लेकर चलना चाहते हैं। वहीं गहलोत इसबार 156 सीटों पर कब्जा करने का प्लान भी बना रहे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि क्या गहलोत-पायलट एक साथ चलने को राजी होते हैं या दोनों के बीच मनमुटाव बढ़ता जाएगा?

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