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जेपी नड्डा के राजस्थान में कमल खिलाने के दावे की पड़ताल, इनसाइड स्टोरी

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जेपी नड्डा के बाद राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को एक्शटेंशन मिलना तय मान जा रहा है। प्रदेश में चुनावी साल को देखते हुए भाजपा संगठन में बदलाव की संभावना कम ही है। ऐसे सतीश पूनिया चुनावी साल तक राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बने रह सकते हैं। पूनिया के नेतृत्व में प्रदेश में निकाली गई भाजपा की जन आक्रोश रैली से पार्टी के बड़े नेता खुश है। ऐसे में माना जा रहा है कि पूनिया को एक वर्ष मिल सकता है। पूनिया के सामने बड़ी चुनौती वसुंधरा कैंप को साधने की है। पूनिया  के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से पार्टी को उपचुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तमाम कोशिश के बाद भी पूनिया गहलोत सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर पैद नहीं कर पाए है। पेपर लीक मामले में बिीजेपी से ज्यादा बेरोजगार अभ्यर्थियों ने सड़क पर गहलोत सरकार को घेरा है। बता दें, भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष मदनलाल सैनी के जून 2019 में निधन के बाद सतीश पूनिया को 14 सितंबर 2019 को राजस्थान भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किया गया था। बाद में 27 दिसंबर 2019 को पूनिया को संगठन की चुनाव प्रक्रिया के तहत निर्विरोध अध्यक्ष घोषित किया गया। उनका तीन साल का कार्यकाल 27 दिसंबर को पूरा हो चुका है। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का कार्यकाल भले ही बढ़ जाए, लेकिन पूनिया की असली चुनौती विधानसभा चुनाव जीतने की रहेगी। विधानसभा उपचुनाव में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। जेपी नड्डा की नसीहत के बावजूद भी गुटबाजी दूर नहीं हो पाई है। जेपी नड्डा और पूनिया के सामने चुनाव से पहले बड़ी चुनौती वसुंधरा कैंप को साधने की है। वसुंधरा कैंप के नेता लगातार मुख्यमंत्री का चेहर घोषित करने की मांग करते रहे हैं। लेकिन पार्टी ने सीएम फेस को लेकर पूरी तरह से पत्ते हीं खोले। पार्टी के नेताओं का कहना है कि पीएम मोदी और पार्टी के चुनाव चिन्ह कमल के निशान पर ही जनता के बीच जाएंगे। वसुंधरा कैप के नेता इस बात से असहज हो जाते हैं। शायद यही कारण है कि वसुंधरा कैंप के नेताओं ने जन आक्रोश रैली से दूरी बना ली। खुद पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने वीसी के जरिए जन आक्रोश रैली को संबोधित किया। राजे ने फील्ड में उतरने से परहेज किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जेपी नड्डा भले ही राजस्थान जीतने की बात कह रहे है, लेकि वसुंधरा राजे के नाराजगी बरकरार रहती है तो पार्टी के लिए चुनाव जीतना मुश्किल हो जाएगा। वसुंधरा राजे राजस्थान भाजपा में बड़ा चेहरा है। 

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2023 के अंत में होने है। बीजेपी समते सभी क्षेत्रीय दल अपने-अपने स्तर चुनावी रणनीति बना रहे हैं। बीजेपी गहलोत सरकार सरकार के खिलाफ विधानसभा से लेकर सड़क तक विरोध-प्रदर्शन करती रही है। इसके बावजूद उपचुनावों में पार्टी का वोट बैंग घटता चला गया है। सरदारशहर उपचुनाव में पार्टी अंतिम राउंड में दूसरे स्थान पर जगह बना पाई थी। जबकि हनुमान बेनीवाल की आरएलपी ने एक बार बीजेपी को तीसरे नंबर पर खिसका दिया था। राजनीतिक  विश्लेषकों के अनुसार पार्टी एकजुट होकर ही कांग्रेस का हरा सकती है। लेकिन फिलहाल प्रदेश भाजपा में सीएम फेस को लेकर खींचतान जारी है।

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