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जेपी नड्डा कह रहे हैं राजस्थान जीत जाएंगे, लेकिन सियासी तस्वीर क्या है

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है। नड्डा के सामने सबसे चुनौती राजस्थान को जीतने रहेगी। क्योंकि पार्टी विभिन्न  गुटों में बंटी हुई है। विभिन्न धड़ों का साधना जेपी नड्डा के लिए बड़ी चुनौती है। राजस्थान में सीएम फेस को लेकर रार है। सीएम फेस को लेकर पार्टी कोई निर्णय नहीं कर पाई है। जेपी नड्डा के लिए संगठन के कार्यक्रमों से दूरी बनाकर चल रहीं पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को मनाना बड़ी चुनौती होगी। राजस्थान बीजेपी में लंबे समय से वसुंधरा राजे साइडल लाइन चल रहीं है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ही निर्णय ले रहे हैं। वसुंधरा राजे ने हाल ही में कोर कमेटी की बैठक में शामिल नहीं होकर अपनी नाराजगी भी जाहिर कर दी है। राजस्थान बीजेपी में वसुंधरा, पूनिया और शेखावत गुट के नेता एक दूसरे पर निशाना साधते रहे हैं।  

राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2023 के अंत में होने हैं। पिछले साल जेपी नड्डा ने गुटबाजी से दूर रहने और कमजोर बूथों पर फोकस करने के निर्देश दिए थे। लेकिन जेपी नड्डा के नसीहत के बावजूद गुटबाजी दूर नहीं हो पाई है। बड़े नेताओं के टकराव और अहम के कारण सरदारशहर विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जेपी नड्डा का कार्यकाल पर 2024 तक के लिए मुहर लग गई हो, लेकिन नड्डा की चुनौती राजस्थान बीजेपी के नेताओं को  एकजुट करने की रहेगी। सीएम फेस को लेकर अपना स्टैंड क्लीयर करना होगा। वसुंधरा राजे समर्थक लंबे समय से सीएम फेस घोषित करने की मांग करते रहे हैं। वसुंधरा समर्थकों का कहना है कि राजे के दम पर ही पार्टी सत्ता में वापसी कर सकती है। राजे ने दो चुनावों में खुद को साबित भी किया है। हालांकि, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया कहते रहे हैं कि विधानसभा चुनाव पीएम मोदी के चेहरे पर लड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री का निर्णय संसदीय बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा। 

सीएम फेस को लेकर हाल ही पार्टी की राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम लेकर सियासी हलचल मचा दी थी। अलका गुर्जर ने कहा कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को नेतृत्व करना चाहिए। अलका गुर्जर के बयान पर वसुंधरा कैंप ने कोई फौरी तौर प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन माना जा रहा है के देर सवेर वसुंधरा समर्थक अलका गुर्जर को निशाने पर ले सकते हैं। राजस्थान में गहलोत सरकार के खिलाफ बीजेपी भले ही प्रदेश स्तर पर जन आक्रोश रैली का आयोजन कर रही हो, लेकिन कई जगह गुटबाजी भी खुलकर सामने आ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गुटबाजी की वजह से पार्टी गहलोत-पायलट की सियासी खींचतान को भुनाने में ज्यादा सफल नहीं रही है।

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