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गहलोत ने न्यायपालिका पर टिप्पणी पर उपराष्ट्रपति को घेरा, जानें मामला

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने न्यायपालिका पर की गई टिप्पणी पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को निशाने पर ले लिया। सीएम गहलोत ने ट्वीट कर कहा-जयपुर में आयोजित अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ द्वारा न्यायपालिका को लेकर की गईं टिप्पणियों से देश में एक अनावश्यक बहस छिड़ गई है। आज के इस दौर में ऐसी टिप्पणियां करना उचित प्रतीत नहीं होता है। न्यायपालिका एवं विधायिका दोनों लोकतंत्र के मजबूत स्तम्भ हैं एवं दोनों ही अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

बता दें, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बुधवार को कहा था कि न्यायिक प्लेटफार्मों से खुद को श्रेष्ठ घोषित करना और सार्वजनिक दिखावा अच्छा नहीं है। इन संस्थानों को पता होना चाहिए कि खुद को कैसे संचालित करना है। धनखड़ राजस्थान विधानसभा में अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। संवैधानिक संस्थाओं के अपनी सीमाओं में रहकर संचालन करने की बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा था कि संविधान में संशोधन का संसद का अधिकार क्या किसी और संस्था पर निर्भर कर सकता है। उन्होंने कहा था यदि संसद के बनाए गए कानून को किसी भी आधार पर कोई भी संस्था अमान्य करती है तो ये प्रजातंत्र के लिए ठीक नहीं होगा। बल्कि ये कहना मुश्किल होगा क्या हम लोकतांत्रिक देश हैं।

न्यायपालिका पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़  की टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस ने शुक्रवार को धनखड़ से पहले उपराष्ट्रपति रहे एम वेंकैया नायडू की 2020 में दी गई टिप्पणी का हवाला दिया। इसमें नायडू ने कहा था कि राज्य के तीन अंगों में से कोई भी सर्वोच्च होने दावा नहीं कर सकता है क्योंकि केवल संविधान ही सर्वोच्च है।

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