46.1 C
Jodhpur

गहलोत का निर्णय, कार्मिक के दो से ज्यादा संतान हो तो भी मिलेगा प्रमोशन

spot_img

Published:

राजस्थान में गहलोत सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। कर्मचारी के दो से ज्यादा संतान हो तो भी तीन साल बाद मूल वरिष्ठता मिलेगा। प्रमोशन नहीं रोका जाएगा। वार्षिक वेतन वृद्धि भी नहीं रोकी जाएगी। राज्य के कार्मिक विभाग ने संशोधित अधिसूचना जारी कर दी है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान में अभी दो से ज्यादा संतान होने पर तीन साल प्रमोशन रोकने का नियम है। अभी प्रमोशन के साथ उसकी वेतन वृद्धि रोकने का भी नियम है।  इसके साथ ही तीन वर्ष तक रहती है संबंधित कर्मचारी की वरिष्ठता। लेकिन अब कार्मिक विभाग ने जो संशोधित आदेश निकाले हैं उसके मुताबिक संशोधन से प्रमोशन के साथ मिलेगी मूल वरिष्ठता।  ऐसे में अब 2019-20 में जिनका प्रमोशन ड्यू, उसे उसी वर्ष से मिल सकेगा प्रमोशन।  जबकि वेतन वृद्धि का वार्षिक लाभ मिल सकेगा तीन साल बाद। कार्मिक विभाग ने संशोधित अधिसूचना जारी कर दी है। 

उल्लेखनीय है कि  राजस्थान में एक जून 2001 के बाद किसी सरकारी कर्मचारी की दो से अधिक संतान होने पर पांच वर्ष तक प्रमोशन नहीं मिलता है। तीसरी संतान को लेकर की गई सख्ती के बाद कर्मचारियों ने बीच का रास्ता निकाल लिया था। कर्मचारी अपनी एक संतान को दत्तक के रूप में घोषित कर देते थे, ताकि मिलने वाले लाभ में किसी प्रकार की कटौती नहीं हो सके। इस तरह की शिकायतें लगातार कार्मिक विभाग के पास पहुंच रही थीं। इसके बाद गहलोत सरकार ने दिसंबर 2021 को तीसरी संतान को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया था। कार्मिक विभाग के अनुसार सरकार ने दो से अधिक संतान होने पर पदोन्नति रोकने का यह प्रावधान जनसंख्या नियंत्रण को लेकर लिया था। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी अनाथ आश्रम से या किसी भी पारिवारिक सदस्य से संतान दत्तक लेने से जनसंख्या में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। ऐसे में उसकी संख्या कर्मचारियों की कुल संतानों की संख्या में नहीं गिनी जाएगी। गहलोत सरकार ने राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों को राहत प्रदान की है। राज्य के कार्मिक विभाग ने अहम आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि दत्तक ली हुई संतान तीसरी संतान के रूप में नहीं मानी जाएगी। कार्मिकों की पदोन्नति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। गहलोत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि दत्तक ली गई तीसरी संतान को भी संतान के रूप में ही गिना जाएगा। 

राजस्थान में पिछली वसुंधरा सरकार ने दो से अधिक संतान होने पर सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति रोकने का प्रावधान किया था, लेकिन बाद में गहलोत सरकार ने सत्ता में आते ही दो से अधिक संतान वाले कार्मिकों को राहत देते हुए तीन वर्ष तक रोकी जाने वाली एसीपी को समाप्त कर दिया था।

[bsa_pro_ad_space id=2]
spot_img
spot_img

सम्बंधित समाचार

Ad

spot_img

ताजा समाचार

spot_img
error: Content is protected !!