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क्यों पायलट के गढ़ में पीएम का दौरा बेहद अहम, 2018 में हो गया था सफाया

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पीएम मोदी एक बार फिर 12 फरवरी को राजस्थान पहुंचेंगे। पीएम दौसा में दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस वे के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी के दौसा दौरे को लेकर सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के बीच हलचल तेज है। मोदी के दौरे के माध्यम से भाजपा पूर्वी राजस्थान में गुर्जर-मीणा वोटर्स को साध कर 39 सीटों पर कब्जा जमाना चाहती है। राजस्थान भाजपा नेताओं ने जातीय समीकरण साधने के तहत ही मोदी की दौसा में जनसभा रखी है। दौसा पूर्वी राजस्थान की राजनीति का केंद्र माना जाता है। दौसा सचिन पायलट के प्रभाव वाला इलाका माना जाता है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को पूर्वी राजस्थान में जबर्दस्त सफलता मिली थी। राजस्थान के भाजपा नेता पीएम मोदी की जनसभा के माध्यम से मीना-गुर्जर वोटर्स को साधना चाहते हैं। दोनों जातियों पर कांग्रेस का प्रभाव रहा है। यहीं वजह है कि विधानसभा चुनाव 2018 में पूर्वी राजस्थान के दौसा, अलवर, सवाईमाधोपुर, धौलपुर, भरतपुर और करौली से  बीजेपी का सूपड़ा साफ हो गया था। बीजेपी को 39 में से मात्र एक सीट धौलपुर में शोभारानी कुशवाह के रूप में मिली थी। वह भी अब पार्टी में नहीं है। पूर्वी राजस्थान का जातीय समीकरण कांग्रेस के ज्यादा अनुकूल रहता आया है। पीएम मोदी अपने दौरे से गुर्जरों के बाद मीना वोर्टर को साध पाएंगे? इससे  पहले पीएम मोदी 23 जनवरी को गुर्जर समाज के आराध्य देवता श्री देवनारायण जी के 1111वें अवतरण महोत्सव समारोह पहुंचे थे।\

बीजेपी जहां पीएम मोदी के राजस्थान आगमन की तैयारियां पूरी करने में जुटी है। वहीं कांग्रेस की ओर से भी इस दौरान ईस्टर्न कैनाल प्रोजेक्ट यानी ERCP के मुद्दे पर पीएम मोदी को घेरने की तैयारी कर रही है। राज्यपाल के अभिभाषण का जवाब देते हुए सदन में गहलोत यह कहा कि ERCP को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने के लिए बीजेपी नेताओं को साथ देना चाहिए। PM मोदी को उनका वादा याद दिलाना चाहिए। इस दौरान सीएम ने यह भी कहा था कि पीएम दौसा आ रहे है, हम सभी को उनसे मिलकर ERCP को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की रिक्वेस्ट करनी चाहिए। किसान संगठनों ने पीएम मोदी के आने से पहले उन्हें ईआरसीपी किया हुआ वादा याद दिलाया है।

प्रदेश में तकरीबन 11 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। विभिन्न दलों ने इसकी तैयारी भी जोरो शोरों से शुरू कर दी है। सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियां समीकरण तलाशने और साधने की जुगत करती दिख रही हैं। इस काउ बेल्ट में जातिगत समीकरण प्रभावी रहता है। यही वजह है कि विभिन्न पार्टियां अपने हिसाब से वोटर्स को लुभाने की कोशिश कर रही है। आदिवासियों और गुर्जर समाज के बाद अब बीजेपी की नजर मीणाओं पर है। यही वजह है कि अगले महीने पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह मीणा बेल्ट में हुंकार भरने की तैयारी कर रहे हैं। दौसा, भरतपुर और सवाई माधोपुर को साधा जाएगा। 

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