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कोटा में फिर एक बच्चे ने पंखे से लटक दे दी जान, पढ़ाई बना काल

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कोटा शहर की पहचान एक ऐसी जगह के तौर पर है जहां बच्चे आंखों में सपने लिए तैयारी करने जाते हैं। कोई नीट की कोचिंग करता तो कोई आईआईटी में दाखिले की तैयारी में जुट जाता। लाखों की संख्या में देश भर के बच्चे वहां दिन-रात मेहनत करते हैं। लेकिन वही कोटा शहर अक्सर आत्महत्या की खबरों को लेकर भी सुर्खियों में बना रहता है। कल यानी रविवार को कोटा में एक कोचिंग संस्थान के छात्र ने पंखे से लटक जान दे दी। पुलिस ने बताया कि ये घटना कल शाम की है। साल 2022 से अब तक कोटा में कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले कुल 22 विद्यार्थियों ने सुसाइड कर लिया।

महावीर नगर थाने के सब-इंस्पेक्टर अवधेश कुमार ने बताया कि एक कोचिंग संस्थान में पढ़ने वाले 17 साल के छात्र ने रविवार शाम करीब सात बजे आत्महत्या कर ली। वह उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर शहर का रहने वाला था। छात्र यहां जेईई मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहा था।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, छात्र यहां एक कोचिंग में जुलाई 2022 से पढ़ाई कर रहा था। इस घटना के बारे में तब पता चला जब छात्र के दोस्तों ने उसके पास फोन किया और वो फोन नहीं उठाया। इसके बाद छात्र के कुछ दोस्त जब उसके कमरे पर पहुंचे तो कमरा अंदर से बंद था। दरवाजा खटखटाने पर अंदर से कोई जवाब नहीं आया। छात्र के दोस्तों ने इसकी जानकारी मकान मालिक को दी। इसके बाद पुलिस को फोन किया गया। पुलिस ने जब कमरे का दरवाजा तोड़ा तो अंदर छात्र पंखे पर लटका हुआ मिला। पुलिस ने बताया कि पिछले एक महीने से छात्र कोचिंग नहीं जा रहा था। छात्र के परिजनों को इस घटना की जानकारी दी गई है।

राजस्थान के कोटा में साल 2011 से अब तक कुल 121 छात्रों ने आत्महत्या कर ली। राजस्थान सरकार ने छात्रों के तनाव को कम करने के लिए कोचिंग संस्थानों को एक कानून लाने का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक, कोचिंग सेंटर को टॉपर्स बच्चों की तस्वीरों को पोस्टर पर नहीं लगाना है। साथ ही कोटा के प्रत्येक कोचिंग सेंटर को करियर काउंसलर रखना होगा। साथ ही बच्चों को उनके करियर को लेकर परामर्श देने के लिए एक्सपर्ट भी रखना होगा।

राजस्थान सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, इस विधेयक में कोचिंग सेंटर के फीस पर भी निगरानी रखने की बात की गई है। क्योंकि कई बच्चे महंगी फीस के चलते भी सुसाइड जैसा कदम उठा लेते हैं। साथ ही बच्चों पर पढ़ाई के दबाव को कम करने के लिए उपाय भी पेश किए गए हैं। बता दें कि 23 जनवरी से शुरू हो रहे राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में इस विधेयक को पेश किए जाने की संभावना है।

सुसाइड के आंकड़े बढ़ रहे हैं
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 में छात्रों ने सबसे ज्यादा सुसाइड महाराष्ट्र में किया। वहां एक साल में 1834 बच्चों ने आत्महत्या कर लिया। बता दें कि साल 2020 में कुल 12,526 छात्रों की मौत आत्महत्या से हुई। ये संख्या साल 2021 में बढ़कर 13,089 हो गई।

पढ़ाई का दबाव बन रहा बच्चों के लिए काल
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, बच्चों के आत्महत्या का कारण हमेशा नहीं पता चल पाता। लेकिन साल 2021 के रिपोर्ट के मुताबिक, 10732 बच्चों में से 864 बच्चे ऐसे थे जिन्होंने परीक्षा की डर से सुसाइड कर लिया। इन सभी की उम्र 18 साल से कम थी। बता दें कि कोटा में जिस छात्र ने कल सुसाइड किया उसकी उम्र 17 साल थी।

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