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केजरीवाल की बढ़त रोकने के लिए गहलोत फील्ड में उतरेंगे, जानें प्लान

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राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2023 के अंत में होने है। राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को रोकने के लिए प्लान तैयार किया है। प्रदेश कांग्रेस ने नहरी क्षेत्र पर फोकस किया है। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले में जिला स्तरीय कार्यक्रम किय जाएंगे। सीएम अशोक गहलोत 19 जनवरी को श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ पहुंचेंगे। 20 जनवरी को कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर जनता की नब्ज टटोलेंगे। सीएम गहलोत का श्रीगंगानगर दौरा नहरी क्षेत्र में केजरीवाल के प्रभाव को रोकने के तौर पर देखा जा रहा है। प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा भी मौजूद रहेंगे। खुद प्रदेश प्रभारी रंधावा नहरी क्षेत्र के हर विधानसभा क्षेत्र में जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश प्रभारी रंधावा पिछली बार जीत-हारर का रिकाॅर्ड का अध्ययन कर रहे हैं। ऐसी चर्चा है कि कैबिनेट का फेरबदल होता है तो नहरी क्षेत्र को प्राथमिकता मिलेगी। नहरी क्षेत्र में कांग्रेस को झाडू और कमल से मुकाबला करना है। बता दें  प्रदेश के नहरी क्षेत्र में सिख समुदाय की खासी आबादी है। केजरीवाल का फोकस भी नहरी क्षेत्र में ज्यादा है। ऐसे में प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा खुद सिख समुदाय के बीच जाएंगे और गहलोत सरकार की योजनाओं की जानकारी देंगे। 

राजस्थान कांग्रेस ने गुजरात चुनाव से सबक लेते हुए केजरीवाल की सेंधमारी रोकने के लिए प्लान बनाया है। पार्टी ने केजरीवाल के प्रभाव वाले इलाकों पर फोकस करना तेज कर दिया है। प्रदेश का नहरी क्षेत्र में केजरीवाल का असर है। क्योंकि नहरी क्षेत्र राजस्थान के दो जिलो श्री गंगानगर व हनुमानगढ़ की सीमा पंजाब से लगती है। पंजाब के दो जिले फाजिल्का व मुक्तसर की सीमा राजस्थान से लगती है। पंजाब के साथ सर्वाधिक सीमा श्री गंगानगर व न्यूनतम सीमा हनुमानगढ़ की लगती है। पंजाब सीमा के नजदीक जिला मुख्यालय श्री गंगानगर तथा दुर जिला मुख्यालय हनुमानगढ़ हैं। ऐसे इन इलाकों में आम आदमी पार्टी की असर माना जाता है। विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस ने दोनों जिलों में शानदार सफलता प्राप्त की थी। इस बार कांग्रेस को बीजेपी के साथ-साथ आम आदमी पार्टी से भी मुकाबला करना होगा। बता दें, आम आदमी पार्टी ने गुजरात चुनाव में कांग्रेस को खासा नुकसान पहुंचाया था। करीब 13 प्रतिशत वोट लिए थे। जिसका फायदा बीजेपी को हुआ और नुकसान कांग्रेस को हुआ था। सीएम गहलोत का श्रीगंगानगर दौरा नहरी क्षेत्र में केजरीवाल के प्रभाव को रोकने के तौर पर देखा जा रहा है। 

राजस्थान में कांग्रेस का मुख्य मुकाबला बीजेपी से माना जा रहा है। लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में उलटफेर भी हो सकता है। कांग्रेस को बीजेपी के साथ-साथ हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएएलपी, बहुजन समाज पार्टी और ओवैसी की पार्टी से भी मुकाबला करना है। आरएलपी पश्चिमी राजस्थान में असर है। आएएलपी जाट समुदाय में सेंध लगार कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है। जबकि बहुजन समाज पार्टी का असर पूर्वी राजस्थान के जिलों में है। विधानसभा चुनाव 2018 में बसपा के विधायक पूर्वी राजस्थान से ही जीते थे। इस बार ओवैसी की पार्टी भी विधानसभा चुनाव लड़ेगी। मुस्लिम वोट वैंक में सेंध लगा सकती है। सीएम गहलोत इस बात को जानते हैं, इसलिए चुनाव की तैयारियां अभी से शुरू कर दी है।

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