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केंद्रीय मंत्री शेखावत ने सीएम गहलोत को लिया निशाने पर, जानें वजह

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राजस्थान में ईआरसीपी के मुद्दे पर सीएम गहलोत- केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बीच आरोप-प्रत्यारोपर का सिलसिला जारी है। सीएम गहलोत के हमले के बाद शेखावत ने पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री बीजेपी की जन आक्रोश रैली में सीएम गहलोत पर जमकर निशाना साधा। शेखावत ने कहा कि गहलोत सरकार जल जीवन मिशन हो या ईआरसीपी, पानी से जुड़े किसी भी मुद्दे पर काम कम और राजनीति ज्यादा कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ईआरसीपी पर एक भी कानूनी औपचारिकता पूरी नहीं की और इसे राजनीति की फुटबॉल बना रही है। इसी प्रकार जल जीवन मिशन में पूरे देश में सबसे कम काम कहीं हुआ है तो वह राजस्थान है।  केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री शनिवार को टोंक की देवली उनियारा विधानसभा क्षेत्र और सवाईमाधोपुर क्षेत्र में जन आक्रोश सभाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस तरह से बिना कानूनी औपचारिकताएं पूरी किए बिना नगर पालिका किसी मकान का नक्शा पास नहीं कर सकती, वैसे ही बिना कानूनी औपचारिकता पूरी किए केन्द्र सरकार चाहते हुए भी ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा नहीं दे सकती। 

उन्होंने कहा कि नदियों को जोड़ने का पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना था। नरेन्द्र मोदी सरकार इसे आगे बढ़ा रही है। इन 13 जिलों को नदी से जोड़ने के लिए मैंने रिवर लिंक परियोजना की पांच टॉप प्राथमिकता में शामिल करवाया है। यह परियोजना ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने से ज्यादी सस्ती है। इसमें 90% पैसा केन्द्र सरकार वहन करेगी, जबकि पहले वाली परियोजना में 60-40 का अनुपात था। इसके बाजवूद गहलोत सरकार ईआरसीपी को राजनीति की फुटबॉल बनाकर लोगों को गुमराह कर रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ईआरसीपी योजना वसुंधरा सरकार के समय पेश की गई थी, लेकिन गहलोत सरकार ने इसमें आगे कोई कार्रवाई नहीं की। इस सरकार ने ईआरसीपी के लिए डीपीआर में कमी छोड़ी, इसे पूरा नहीं किया। पर्यावरण की क्लीयरेंस नहीं ली। फॉरेस्ट की क्लीयरेंस नहीं है। मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच समझौता नहीं है। गहलोत सरकार इस योजना को राजनीति की फुटबॉल बनाकर 13 जिलों के लोगों को गुमराह कर रही है। 

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि गहलोत सरकार पानी पर केवल राजनीति करती है। जल जीवन मिशन में मैंने व्यक्तिगत रुचि लेकर राजस्थान के लिए 27 हजार करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत कराया, जो कई राज्यों से ज्यादा था, लेकिन इस सरकार ने मात्र पांच हजार करोड़ रुपए खर्च किया। मात्र दस प्रतिशत बजट खर्च किया। घर-घर पानी पहंचाने के मामले में राजस्थान पूरे देश में नीचे से दूसरे नम्बर पर है। गहलोत सरकार पानी पर इसलिए काम नहीं करना चाहती कि उसे डर है कि इसका श्रेय कहीं मोदीजी को नहीं मिल जाए।

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